Wednesday, 29 June, 2022
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SKM के विरोध के बावजूद किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने लांच की ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’, लड़ेंगे पंजाब चुनाव

चढ़ूनी ने कहा, 'राजनीति प्रदूषित हो गई है. इसे बदलने की जरूरत है. नीति निर्मता पूंजीवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, पूंजीपितियों के पक्ष में नीतियां बनाई जा रही हैं. आम आदमी, गरीबों के लिए कुछ नहीं किया जा रहा.

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नई दिल्ली: किसान नेताओं के विरोध के बावजूद संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के एक सदस्य गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने पंजाब चुनाव के लिए शनिवार को चंडीगढ़ में अपनी नई पार्टी ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’ लांच किया है.

गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, ‘देश में पार्टियों की कमी नहीं है परन्तु आज देश में बदलाव की ज़रूरत है. इन पार्टियों ने राजनीति को व्यापार बना लिया है. राजनीति में बदलाव लाने के लिए, राजनीति को शुद्ध करने के लिए हम अपनी नई धर्मनिरपेक्ष पार्टी ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’ लॉन्च कर रहे हैं.

चढ़ूनी ने कहा, ‘राजनीति प्रदूषित हो गई है. इसे बदलने की जरूरत है. नीति निर्मता पूंजीवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, पूंजीपितियों के पक्ष में नीतियां बनाई जा रही हैं. आम आदमी, गरीबों के लिए कुछ नहीं किया जा रहा. इसलिए, हम अपनी नई पार्टी, संयुक्त संघर्ष पार्टी लॉन्च कर रहे हैं.

गौरतलब है कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेता योगेंद्र यादव, दर्शनपाल सिंह और राकेश टिकैत समेत किसान नेताओं ने  राजनीति में जाने से इनकार किया था और चेताया था कि इससे किसान आंदोलन पर असर पड़ सकता है. लेकिन गुरनाम चढ़ूनी की तरफ से बार-बार पार्टी बनाने का बयान आता रहा. आखिरकार उन्होंने अब अपनी पार्टी लांच कर दी है.

बतां दें कि मोदी सरकार के लाए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में दिल्ली की सीमाओं पर एक साल से ज्यादा समय तक धरना-प्रदर्शन किया. इसके बाद सरकार झुकी और तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया. लेकिन किसान एमएसपी और अन्य मांगों को लेकर अड़े हुए थे जिस पर केंद्र सरकार ने लिखित प्रस्ताव देकर उन पर कमेटी के जरिए बातचीत करने को कहा है.

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इसके बाद किसानों ने 15 जनवरी तक के लिए अपना आंदोलन टाल दिया और घर लौट गए हैं. 15 जनवरी तक अगर उनकी मांगों को सरकार नहीं मानती है तो किसानों फिर से धरने की चेतावनी दी है.

एसकेएम ने गुरनाम सिंह चढ़ूनी को किया था निलंबित

एसकेएम ने जुलाई में, किसानों ने अस्थाई तौर से अपने एक सबसे प्रमुख नेता, गुरनाम सिंह चढूनी को ये सुझाव देने पर निलंबित कर दिया था कि किसानों को 2022 के असेम्बली चुनाव लड़ने चाहिए. लेकिन भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) हरियाणा के 60 वर्षीय अध्यक्ष, अपने रुख़ पर अडिग थे. उन्होंने पंजाब में अपने ‘मिशन 2022’ के लिए, प्रचार भी शुरू कर दिया था, और पूरे प्रांत में रैलियां और जनसभाएं करके किसानों को चुनावों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहे थे.

यहां तक कि पंजाब के 32 किसान संगठनों की बैठक के बाद, वरिष्ठ एसकेएम नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने पत्रकारों को बताया था कि किसान इकाई चढूनी के मिशन 2022 के खिलाफ है, और उनके साथ किसी भी दूसरे नेता की तरह बर्ताव किया जाएगा. राजेवाल ने कहा था, ‘किसान चढूनी और उनके समर्थकों को काले झंडे दिखाएंगे’.

वहीं संयुक्त किसान मोर्चा के अहम रणनीतिकार योगेंद्र यादव ने भी एसकेएम के राजनीति में जाने से आंदोलन को कमजोर होने की बात कही थी और अपील की थी एसकेएम को राजनीति में नहीं जाना चाहिए हालांकि उन्होंने ये भी कहा था कि हर किसी राजनीति करने का हक है लेकिन एसकेएम के नाम का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. यादव ने कहा था जब तक किसानों के सभी मांगें मान नहीं ली जाती तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा.

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