गुरुग्राम: फरीदाबाद पुलिस को नकली नोट छापने वाले गिरोह का सुराग किसी मुखबिर या छापेमारी से नहीं मिला. इसकी शुरुआत होटल के एक हाउसकीपिंग कर्मचारी की एक छोटी-सी बात से हुई. उसने देखा कि सूरजकुंड के होटल सरोवर पोर्टिको का कमरा नंबर 404-बी लगातार दो दिनों से बंद था और उसमें न कोई अंदर जा रहा था, न बाहर आ रहा था.
होटल कर्मचारी ने इसकी जानकारी सूरजकुंड थाना पुलिस को दी. इसी छोटी-सी सूचना से पुलिस ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया, जिसे वह खुद भी बेहद अजीब बता रही है. पुलिस के मुताबिक, 34 लाख रुपये सालाना पैकेज पाने वाला 27 साल का एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर होटल के कमरे में अस्थायी प्रिंटिंग प्रेस लगाकर नकली भारतीय नोट छाप रहा था.
आरोपी की पहचान फरीदाबाद के सेक्टर-17 निवासी विनायक झा के रूप में हुई है. वह नोएडा की एक आईटी कंपनी में काम करता है. पुलिस ने उसे होटल में जमा कराए गए पहचान पत्र के आधार पर गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार, झा ने बेंगलुरु के एक संस्थान से पढ़ाई की है.
होटल का कमरा बना प्रिंटिंग प्रेस
फरीदाबाद पुलिस के प्रवक्ता यशपाल सिंह के मुताबिक, विनायक झा 26 जून को अपने असली नाम से होटल में रुका था और उसे कमरा नंबर 404-बी दिया गया था. जब कमरा लगातार दो दिन तक बंद रहा और होटल कर्मचारी उससे संपर्क नहीं कर पाए, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी. पुलिस और होटल प्रबंधन ने मिलकर कमरे का दरवाजा तोड़ा. अंदर से एक लैपटॉप, प्रिंटर, नोटों जैसा कागज, 500 रुपये का एक नकली नोट और 100 रुपये के 10 नकली नोट बरामद हुए.
होटल में चेक-इन के समय जमा कराए गए पहचान पत्र की मदद से पुलिस सीधे उसके घर पहुंची और उसे हिरासत में ले लिया. पुलिस का कहना है कि कमरे से मिले सामान और नकली नोटों के बारे में वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका.
दोस्तों की डॉलर वाली रील देखकर आया आइडिया
दो दिन तक लगातार पूछताछ के दौरान जो बात सामने आई, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया.
पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, झा ने बताया कि अमेरिका में रहने वाले उसके दोस्त अक्सर इंस्टाग्राम पर ऐसी रील भेजते थे, जिनमें वे डॉलर के नोट हवा में उछालते या नोटों के ढेर पर लेटे दिखाई देते थे. जब उसने उनसे पूछा, तो दोस्तों ने बताया कि वीडियो में इस्तेमाल किए गए नोट असली नहीं, बल्कि छपे हुए नकली नोट थे.
पुलिस के अनुसार, यहीं से झा के दिमाग में भी ऐसा करने का विचार आया. पुलिस ने बताया कि इसके बाद उसने इंटरनेट पर भारतीय नोटों की डिजाइन और प्रिंटिंग से जुड़ी जानकारी जुटाई. फिर दिल्ली के सदर बाज़ार के ऑनलाइन विक्रेताओं से एक प्रिंटर, अन्य ज़रूरी सामान और असली नोट जैसे दिखने वाले खास कागज मंगवाए.
पुलिस के अनुसार, शुरुआत में उसने बहुत कम नकली नोट छापे. बरामद नकली नोटों के अलावा कई और शीट भी मिलीं, जिन पर नोट छपे हुए थे लेकिन उन्हें अभी काटा नहीं गया था. पुलिस का कहना है कि वह आगे बड़े स्तर पर नकली नोट छापने की तैयारी कर रहा था, लेकिन होटल का बंद कमरा उसकी इस योजना पर भारी पड़ गया.
पुलिस के मुताबिक, झा ने कहा कि उसने इन नकली नोटों का बाज़ार में इस्तेमाल नहीं किया. वह इन्हें सिर्फ इंस्टाग्राम रील बनाने के लिए तैयार कर रहा था. इसके बाद पुलिस झा को दिल्ली के सदर बाज़ार भी लेकर गई, जहां से उसने यह खास कागज़ खरीदा था. पुलिस ने उस सप्लायर की पहचान कर ली है, जिससे उसने कागज़ खरीदा था.
पुलिस ने सप्लायर के पास से ऐसे कागज के कई रोल भी बरामद किए हैं और अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.
विनायक झा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की नकली मुद्रा बनाने से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. इस अपराध में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है. पुलिस ने उसका लैपटॉप, प्रिंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं. जांच की जा रही है कि क्या उसने पहले भी नकली नोट छापे थे और क्या इस पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था.
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