नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड, जो ZEE5 की मूल कंपनी है, को नोटिस जारी किया. वजह यह है कि OTT प्लेटफॉर्म दिव्यांग लोगों, खासकर दृष्टिबाधित लोगों के लिए इस्तेमाल करने योग्य नहीं है. दृष्टिबाधित लोग ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म चलाने के लिए स्क्रीन रीडर नाम की सहायक तकनीक पर निर्भर रहते हैं.
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की बेंच ने दिव्यांग अधिकारों के वकील राहुल बजाज की याचिका पर प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया. राहुल बजाज को 100 प्रतिशत दृष्टिबाधिता है.
अपनी याचिका में बजाज ने कहा कि वह दिव्यांग अधिकारों के विशेषज्ञ हैं और एक प्रैक्टिस करने वाले वकील हैं, जो दिव्यांग लोगों के लिए डिजिटल पहुंच में आने वाली बाधाओं को खत्म करने के लिए काम करते हैं.
इस मामले की अगली सुनवाई इस साल 17 सितंबर को होगी.
गुरुवार की सुनवाई के दौरान सिंगल जज बेंच ने मौखिक रूप से पूछा कि OTT प्लेटफॉर्म की ओर से अदालत में कोई पेश क्यों नहीं हुआ. इसके अलावा, खुद अदालत में मौजूद याचिकाकर्ता ने कहा कि कम से कम अंतरिम तौर पर ऐसे कदम उठाए जाएं ताकि दृष्टिबाधित लोग भी सामान्य लोगों की तरह चल रहे फीफा वर्ल्ड कप का आनंद ले सकें. अदालत ने इस बात को स्वीकार किया और आदेश दिया, “इस बीच प्लेटफॉर्म को सभी के लिए इस्तेमाल करने योग्य बनाने के लिए कदम उठाए जाएं.”
याचिका में कहा गया कि मामला इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भारत में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण के विशेष अधिकार ZEE5 के पास हैं. टूर्नामेंट में लोगों की काफी रुचि है, इसलिए यह सभी लोगों के लिए समान रूप से उपलब्ध होना चाहिए.
याचिका में क्या कहा गया
याचिका में कहा गया है कि दृष्टिहीन और कम दिखाई देने वाले लोग कंप्यूटर का इस्तेमाल स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की मदद से करते हैं.
याचिका में कहा गया है, “स्क्रीन रीडर स्क्रीन पर मौजूद सामग्री को इंसान जैसी आवाज में पढ़कर सुनाता है. स्क्रीन रीडर के साथ सही तरीके से काम करने के लिए किसी ऐप या वेबसाइट का इस्तेमाल करने योग्य होना जरूरी है.” यानी उसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए.
याचिका में कहा गया कि ये दिशानिर्देश डिजिटल पहुंच के लिए दुनिया भर में स्वीकार किए गए मानकों पर आधारित हैं. साथ ही, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 46 के तहत सभी सेवा प्रदाताओं को दो साल के भीतर तय किए गए पहुंच संबंधी मानकों का पालन करना जरूरी था. याचिका में यह भी कहा गया कि मई 2025 में यह दो साल की समय सीमा समाप्त हो गई.
इसके अलावा, भारत सरकार की वेबसाइटों पर दिए गए अन्य दिशानिर्देश, जिनमें डिजिटल पहुंच के मानक बताए गए थे, उनका पालन जून 2019 तक किया जाना था. याचिका में कहा गया कि भारत में काम करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभी भी यह लगातार कानूनी जिम्मेदारी है कि वे दिव्यांग लोगों के लिए इस्तेमाल करने योग्य हों.
याचिका में यह भी कहा गया कि केवल फीफा वर्ल्ड कप का प्रसारण ही नहीं, बल्कि पूरा ZEE5 प्लेटफॉर्म शुरू से ही इस्तेमाल करने योग्य नहीं है. यहां तक कि इसकी सदस्यता खरीदना भी एक बड़ी चुनौती है. इसकी वजह बिना लेबल वाले बटन और ऐसा इंटरफेस है जिसे स्क्रीन रीडर की मदद से ठीक तरह से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
याचिका में आगे कहा गया कि अगर कोई व्यक्ति किसी तरह प्लेटफॉर्म की सदस्यता ले भी ले, तब भी उसे कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जैसे गलत लेबल वाले कंट्रोल, बार-बार बदलता फोकस, इस्तेमाल करने योग्य न होने वाला मीडिया प्लेयर, कंटेंट ढूंढने में परेशानी, लगातार बदलता इंटरफेस और कर्सर का अपने आप इधर-उधर चला जाना.
इन्हीं कारणों से याचिकाकर्ता ने कहा कि दिव्यांग लोगों के समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले प्रज्ञा प्रसून बनाम भारत संघ का हवाला देते हुए कहा गया कि डिजिटल पहुंच का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.