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Saturday, 5 September, 2026
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Exclusive: एस्कॉर्ट, शराब और ‘मुजरा’—IDFC घोटाले में IAS अफसरों को कैसे ‘खुश’ किया गया—CBI ने बताया

सीबीआई की चार्जशीट में 6 IAS अफसरों से जुड़े कथित लेन-देन का ब्योरा है. इन पर बिना तय प्रक्रिया के सरकारी पैसे को निजी बैंक में भेजने और बदले में कथित तौर पर फायदा लेने का आरोप है.

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नई दिल्ली: पांच सितारा होटलों में शानदार पार्टियों और एस्कॉर्ट सेवाओं से लेकर एक निजी फार्महाउस में ‘मुजरा’ और हवाला के जरिए सोना और नकदी देने तक, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा में कथित 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी सार्वजनिक धन घोटाले में अब आरोपी बनाए गए कम से कम चार IAS अफसरों से जुड़े कथित ‘लाभ’ का चौंकाने वाला सिलसिला सामने रखा है.

दिलचस्प बात यह है कि पांच सितारा होटलों में हुई इनमें से कुछ पार्टियों के बिल काफी कम थे—एक लाख रुपये से भी कम.

मामले में CBI की हालिया चार्जशीट के मुताबिक, ये ऐशो-आराम कथित तौर पर एक सुनियोजित साजिश में ‘लेन-देन’ का हिस्सा थे. इसका मकसद सरकारी खजाने से सरकारी पैसा निकालना और उसे निजी बैंक की कुछ खास शाखाओं में जमा करना था, जिसके बाद कथित तौर पर उस पैसे को निकाल लिया जाता था.

एक सूत्र ने कहा, “सरकारी पैसे के बदले कथित तौर पर डांस, शराब और एस्कॉर्ट सेवाएं दी गईं—इसके अलावा मास्टरमाइंड रिभव ऋषि ने करोड़ों रुपये नकद और लाखों रुपये का सोना भी दिया. वह उस समय चंडीगढ़ में IDFC First Bank का मैनेजर था.”

हरियाणा सरकार के आठ विभागों का पैसा जिसमें हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (HSAMB), हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL), हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (HSPCB) और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) शामिल हैं, अलग-अलग सूचीबद्ध बैंकों में रखा गया था. आरोप है कि यह पैसा IDFC First Bank और AU Small Finance Bank की कुछ खास शाखाओं में ट्रांसफर किया गया, जहां अब आरोपी बनाए गए बैंक अधिकारी तैनात थे.

इन शाखाओं में खाते खोले गए और कथित साजिश के तहत सरकारी पैसे को इन खातों में भेजा गया.

CBI के मुताबिक, यह घोटाला बैंक अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों को शामिल करते हुए चार स्तर की एक ‘योजना’ के जरिए चलाया गया. इसमें नकली फिक्स्ड डिपॉजिट, जाली चेक, फर्जी कंपनियों और कई स्तरों पर किए गए लेन-देन के जरिए सरकारी पैसे को कथित तौर पर निकाल लिया गया.

सबसे पहले, आरोपी बैंक मैनेजरों ने कथित तौर पर सरकारी खातों को संभालने वाले अधिकारियों को अपनी बैंकों में सरकारी पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने के लिए मनाया. दूसरे, बैंक के अंदर के लोगों ने कथित तौर पर नकली डेबिट नोट और जाली चेक के जरिए पैसा निकाल लिया. साथ ही, इन पैसों के ट्रांसफर को छिपाने के लिए लेन-देन से जुड़े अलर्ट को दबा दिया गया. तीसरे, फर्जी कंपनियों के एक नेटवर्क का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया, ताकि निकाले गए पैसे को अलग-अलग रास्तों से घुमाया और भेजा जा सके.

इसके बाद, ज्वेलर्स और रियल एस्टेट से जुड़े लोगों की पहचान की गई, ताकि निकाले गए पैसे को संपत्तियों में बदला जा सके. CBI ने अपनी जांच में पाया है कि कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि, जो उस समय चंडीगढ़ में IDFC First Bank का मैनेजर था, ने इस “योजना” को शुरू करने के सिर्फ दो साल में दुबई में एक आलीशान अपार्टमेंट, करोड़ों रुपये की महंगी घड़ियां और एक बिल्कुल नई BMW कार खरीदी.

ये जानकारियां बुधवार को सीबीआई की ओर से IDFC First Bank-AU Small Finance Bank घोटाला मामले में छह IAS अधिकारियों विनीत गर्ग, पंकज अग्रवाल, मोहम्मद शायिन, डॉ. साकेत कुमार, प्रदीप कुमार और राम कुमार सिंह के खिलाफ दाखिल की गई तीसरी चार्जशीट का हिस्सा हैं. यह चार्जशीट पंचकूला में CBI मामलों की विशेष अदालत के जज के सामने दाखिल की गई.

छह IAS अफसरों के अलावा, चार्जशीट में हरियाणा सरकार के नौ अन्य अधिकारियों और चार बैंक अधिकारियों के नाम भी हैं. अब तक इस मामले में कुल 37 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है.

छह आरोपी IAS अफसरों में से पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार और राम कुमार सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है और वे न्यायिक हिरासत में हैं. वहीं, बाकी तीन के खिलाफ बिना गिरफ्तार किए चार्जशीट दाखिल की गई है.

कथित घोटाला पहली बार फरवरी 2026 में सामने आया था. उस समय हरियाणा सरकार के एक अधिकारी ने एक खाता बंद करने की कोशिश करते हुए विभाग के रिकॉर्ड और खाते में मौजूद असली रकम के बीच अंतर पाया था. मामले को हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो ने अपने हाथ में लिया. मार्च में हरियाणा सरकार ने CBI जांच की मांग की और केंद्रीय एजेंसी ने अप्रैल में औपचारिक रूप से मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए एफआईआर दर्ज की.

‘एस्कॉर्ट्स, मुजरा और लाखों की बारिश’

CBI के अनुसार, सीनियर IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल, जिसने HSAMB के तत्कालीन चेयरमैन के तौर पर इस धोखाधड़ी में मुख्य भूमिका निभाई थी, उसे ‘मुजरा’ पार्टियों और लग्ज़री होटल में ठहरने से लेकर एस्कॉर्ट्स के इंतज़ाम तक कई “अनुचित फायदे” मिले—इन सबका खर्च IDFC के रिभव ऋषि ने कैश में उठाया था.

CBI का आरोप है कि अपराध से हुई कमाई का इस्तेमाल इन लग्ज़री पार्टियों के लिए किया गया, जिनमें कई आरोपी शामिल हुए. आरोप है कि चंडीगढ़ में कुछ पार्टियों के लिए दिल्ली से महिला डांसर बुलाई गई थीं. एजेंसी का दावा है कि एक मौके पर डांसरों पर लाखों रुपये के नोट बरसाए गए थे.

एक सूत्र ने बताया, “एफडी गाइडलाइंस को नज़रअंदाज़ करके अकाउंट खोलने के बदले में, IDFC के रिभव ने उन्हें मुजरा डांस पार्टियों, सेक्सुअल फेवर के लिए महिलाओं के इंतज़ाम, शराब, लग्ज़री होटल में ठहरने और दूसरे खर्चों के रूप में गैर-कानूनी फायदे पहुंचाए.”

CBI के एक और सूत्र के अनुसार, अग्रवाल की मांग पर ऋषि ने मोहाली के ज़िरकपुर में एक प्राइवेट विला में ऐसी कई पार्टियां आयोजित की थीं.

सूत्रों ने बताया कि अग्रवाल खास तौर पर विदेशी कलाकारों वाले डांस ग्रुप के साथ विला में पार्टियों की मांग करता था. असल में, डांसरों पर बरसाने के लिए नए नोटों की गड्डियां (लाखों रुपये) मंगवाई जाती थीं.

दिप्रिंट से बात करते हुए, पंकज अग्रवाल के वकील विशाल गर्ग ने कहा, “ये आरोप बेबुनियाद हैं. उनसे कोई रिकवरी नहीं हुई है, यहां तक ​​कि उनके घर पर की गई तलाशी में भी कुछ नहीं मिला. वह बेगुनाह हैं.”

रिभव ऋषि के वकील दीपांशु बंसल ने भी कहा कि ये आरोप पहली नज़र में ही झूठे लगते हैं. उन्होंने कहा, “हमें इन IAS अधिकारियों के खिलाफ CBI द्वारा दायर सप्लीमेंट्री रिपोर्ट नहीं दी गई है, लेकिन इन सभी आरोपों का पूरी तरह से और सख्ती से खंडन किया जाता है.”

उन्होंने आगे कहा, “यह बात ज़ोर देकर कहना ज़रूरी है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अपराध का सबूत नहीं होते. हर आरोप को सक्षम अदालत के सामने कानूनी रूप से मान्य और ठोस सबूतों से साबित करना होता है. अभी तक हमें सप्लीमेंट्री रिपोर्ट नहीं दी गई है और आरोप भी तय नहीं हुए हैं. मेरे क्लाइंट को कानून के अनुसार जांच एजेंसी द्वारा इस्तेमाल किए गए हर दस्तावेज़, बयान और सबूत का जवाब देने और उसे चुनौती देने का अधिकार है.”

उन्होंने कहा, “किसी सक्षम अदालत के फैसले के बिना आरोपों को साबित तथ्य के तौर पर पेश करने की कोशिश पूरी तरह से गलत है और मेरे क्लाइंट के अधिकारों के खिलाफ है.”

इस बीच, कथित घोटाले में अग्रवाल की भूमिका के बारे में बताते हुए सूत्र ने कहा कि उन्होंने ही ऋषि को विभाग के चीफ फाइनेंशियल एडवाइज़र (CFA) राजेश से मिलवाया था, जबकि विभाग में IDFC फर्स्ट बैंक में खाता खोलने का कोई प्रस्ताव भी नहीं आया था.

आरोप है कि बाद में अग्रवाल के कहने पर ये खाते खोले गए और अन्य अधिकृत बैंकों के बजाय IDFC को प्राथमिकता दी गई.

एजेंसी ने अग्रवाल के व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं, जब फरवरी 2026 में IDFC फ़र्स्ट बैंक में HSAMB के खाते से 10 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी वाली डेबिट एंट्री सामने आई थी.

सूत्र ने कहा, “बैंक, वित्त विभाग या कानून लागू करने वाली एजेंसियों को मामले की सूचना देने का निर्देश देने के बजाय, अग्रवाल ने इस ट्रांज़ैक्शन को कम करके आंका और शिकायत दर्ज करने के निर्देश देने में टालमटोल करता रहा.”

इस मामले में चार्जशीट किए गए 2000 बैच के अधिकारी अग्रवाल, आरोपी छह IAS अधिकारियों में सबसे सीनियर अधिकारियों में से एक है. बीजेपी सरकार का भरोसेमंद सिविल सर्वेंट रहा अग्रवाल 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान हरियाणा के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर था और 2026 के राज्यसभा चुनावों के लिए रिटर्निंग ऑफिसर भी रहा.

‘कोयो कोयो में खाना, कॉर्बीज़ में ड्रिंक्स’

IAS अधिकारियों को मिले कथित “अनुचित फायदों” की अपनी लिस्ट में CBI ने दावा किया है कि HPGCL के तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद शयीन ने कई बार अपनी पत्नी और दोस्तों के साथ चंडीगढ़ के फाइव-स्टार होटल ‘हयात सेंट्रिक’ में ‘कोयो कोयो’ और ‘कॉर्बीज़’ में खाना खाया और इन सबका बिल कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि ने चुकाया.

इसके अलावा, सूत्रों का कहना है कि शयीन को करोड़ों रुपये नकद भी मिले.

सूत्र ने कहा, “उसे IDFC में अकाउंट खोलने और फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) करने की मंज़ूरी तेज़ी से दिलाने के बदले करोड़ों रुपये नकद और परिवार व दोस्तों के साथ फाइव-स्टार होटलों में खाने-पीने का फायदा मिला.”

मोहम्मद शयीन 2002 बैच के हरियाणा-कैडर का IAS अधिकारी है, जिसने ‘हाउसिंग फॉर ऑल डिपार्टमेंट’ में कमिश्नर और सेक्रेटरी के तौर पर और उससे पहले HPGCL के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम किया है.

CBI ने इन कथित फायदों का संबंध उस तरीके से जोड़ा है जिससे HPGCL का फंड IDFC में ट्रांसफर किया गया था. आरोप है कि ‘ड्राई फ्लाई ऐश फंड’ के नाम पर खोले गए सेविंग्स अकाउंट में फाइनेंस डिपार्टमेंट के सुरक्षा नियमों को नज़रअंदाज़ किया गया: न तो पहले से मंज़ूरी ली गई, न ही ज़रूरत बताई गई और न ही पैनल में शामिल बैंकों से कोटेशन मंगाए गए.

CBI का आरोप है कि यह अकाउंट उस ब्रांच में खोला गया जहां ऋषि मैनेजर था, न कि उस ब्रांच में जो HPGCL के सबसे पास थी. इसके बाद यह अकाउंट आठ महीने तक निष्क्रिय (dormant) रहा, जिससे पता चलता है कि वे अपराध की तैयारी कर रहे थे.

आगे आरोप है कि IDFC को फायदा पहुंचाने के लिए, इंडसइंड बैंक में चल रही और ब्याज देने वाली फिक्स्ड डिपॉज़िट को समय से पहले तोड़ दिया गया और फंड को IDFC में ट्रांसफर कर दिया गया.

सूत्र ने कहा, “इस कदम को फाइल में 14% मुआवज़ा ब्याज (compensatory interest) के कथित ऑफर के ज़रिए सही ठहराया गया था-एक ऐसी दर जो जांचकर्ताओं को पता चला कि बैंक ने कभी ऑफर ही नहीं की थी.”

CBI के मुताबिक, 14 प्रतिशत रिटर्न का वादा असल में आरोपी ऋषि का एक निजी कमिटमेंट था, जहां असली बैंक ब्याज सामान्य दरों पर अपने-आप क्रेडिट हो जाता था, वहीं अंतर की रकम कथित तौर पर आरोपी द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के फंड से डिमांड ड्राफ्ट के ज़रिए चुकाई जाती थी. एजेंसी का दावा है कि यह पैसा HSPCB, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, वेलफेयर बोर्ड और पंचायत विभाग जैसे दूसरे सरकारी विभागों से निकाले गए फंड से आया था.

जांच करने वालों ने यह भी बताया है कि वादा किए गए “ब्याज” के भुगतान के लिए ऋषि से बार-बार संपर्क किया गया था, जबकि असल बैंक ब्याज तो अपने आप ही खाते में आ जाता. CBI का कहना है कि HPGCL को जो अतिरिक्त “ब्याज” दिया जा रहा था, वह असल में दूसरे सरकारी विभागों से कथित तौर पर निकाले गए सरकारी पैसे से दिया जा रहा था.

दिप्रिंट ने मोहम्मद शयीन से कॉल और WhatsApp पर मैसेज के ज़रिए संपर्क किया. उन्होंने बस इतना कहा, “कोई टिप्पणी नहीं”.

‘करोड़ों के हवाला ट्रांज़ैक्शन’

राम कुमार सिंह, जो 2012 बैच का प्रमोटेड IAS अधिकारी था और उस समय पंचकूला नगर निगम का कमिश्नर और साथ ही कालका नगर परिषद पर सुपरवाइज़री कंट्रोल वाले ज़िला नगर कमिश्नर था, कथित तौर पर इस घोटाले के सबसे बड़े फायदा उठाने वाला व्यक्ति था.

सूत्रों के मुताबिक, उसने IDFC फर्स्ट बैंक में नगर निगम का फंड जमा कराने में अहम भूमिका निभाई. एक सूत्र ने कहा, “राम कुमार सिंह को हवाला के ज़रिए कई किश्तों में करोड़ों रुपये मिले. कुछ पेमेंट चंडीगढ़ में उसके सेक्टर 19A स्थित घर पर किए गए.”

CBI का आरोप है कि ये पेमेंट सिंह द्वारा IDFC में नगर निगम का फंड जमा कराने में मदद करने के बदले में किए गए थे.

जांचकर्ताओं ने उस तेज़ी पर भी सवाल उठाए हैं जिसके साथ यह ट्रांज़ैक्शन किया गया. सिंह ने कथित तौर पर पिछले साल 30 अक्टूबर को एक कोटेशन लेटर पर साइन किए थे, जिसमें बैंकों को जवाब देने के लिए सिर्फ 31 अक्टूबर तक का समय दिया गया था. पूरी प्रक्रिया, मूल्यांकन और मंज़ूरी से लेकर डिपॉज़िट को समय से पहले निकालने और 80 करोड़ रुपये की FDR बनाने तक—31 अक्टूबर को ही पूरी हो गई थी.

एक सूत्र ने कहा, “यह सब IDFC को फायदा पहुंचाने के लिए इतनी कम समय में किया गया क्योंकि दूसरे बैंकों से फंड ट्रांसफर करने और अकाउंट खोलने के बाद FD बुक करने की डील पहले ही हो चुकी थी.”

दिप्रिंट ने सिंह का पक्ष रखने वाले वकील डीएस चावला से WhatsApp कॉल और मैसेज के ज़रिए संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उनके जवाब देने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.

करोड़ों कैश, लाखों का सोना

CBI का आरोप है कि विनीत गर्ग ने HSPCB के तत्कालीन चेयरमैन के तौर पर इस कथित साज़िश में अहम भूमिका निभाई और बदले में करोड़ों कैश और सोना भी हासिल किया.

सूत्र ने कहा, “सब कुछ उसकी देखरेख और कंट्रोल में था. उसे एक बिचौलिए के ज़रिए करोड़ों रुपये मिले, जिसमें लाखों का सोना भी शामिल था.”

CBI की जांच के मुताबिक, गर्ग ने IDFC फर्स्ट बैंक की हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) में एंट्री आसान बनाई; उसने कथित तौर पर रुकावटें हटाई और बैंक को ऐसा बिज़नेस हासिल करने में मदद की जो उसे मेरिट के आधार पर नहीं मिल सकता था.

जांचकर्ताओं का आरोप है कि जब तक गर्ग ने चार्ज नहीं संभाला था, बोर्ड का फंड ज़्यादातर सरकारी बैंकों और HDFC, Axis और ICICI जैसे बड़े प्राइवेट बैंकों के पास रखा जाता था, जबकि छोटे बैंकों पर विचार नहीं किया जाता था. गर्ग के कार्यकाल में कथित तौर पर यह स्थिति बदल गई, जिससे IDFC के लिए रास्ता साफ हो गया. CBI ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं कि अधिकारी ने प्रोसेस को ई-फाइलों से फिजिकल फाइलों में बदल दिया और आरोप लगाया कि खुद ही ज़रूरी नोटशीट्स की जांच-पड़ताल की थी.

एजेंसी ने एक और घटना का ज़िक्र किया है जिसे वह गर्ग के स्कूल शिक्षा विभाग में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के तौर पर पहले के कार्यकाल की एक वैसी ही घटना बताती है. आरोप है कि जून 2024 में ज़रूरी मंज़ूरी के बिना कोटक महिंद्रा बैंक में हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के दो बैंक खाते खोले गए थे; CBI का कहना है कि इस मामले को गर्ग ने खुद देखा था.

एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रैंक के 1991 बैच के IAS अधिकारी हरियाणा के ब्यूरोक्रेटिक पदानुक्रम में चौथे नंबर पर हैं.

दिप्रिंट ने विनीत गर्ग से टेक्स्ट मैसेज और फोन कॉल के ज़रिए संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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