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Sunday, 5 July, 2026
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भारत को हर पांच साल में 5,00,000 टन रिफाइंड कॉपर क्षमता जोड़ने की ज़रूरत: आईसीए इंडिया

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नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) देश में बुनियादी ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र के तेजी से विस्तार के बीच भारत को बढ़ती तांबे की मांग को पूरा करने के लिए प्रत्येक पांच साल में करीब पांच लाख टन अतिरिक्त परिष्कृत तांबा उत्पादन क्षमता विकसित करने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय तांबा संघ भारत (आईसीए इंडिया) के प्रबंध निदेशक मयूर करमारकर ने रविवार को यह बात कही।

उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में तांबे की मांग देश की आर्थिक वृद्धि के अनुरूप बढ़ने की संभावना है। एसोसिएशन का अनुमान है कि वर्ष 2026 में तांबे की मांग में लगभग नौ प्रतिशत की वृद्धि होगी।

आपूर्ति की स्थिति पर उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान कॉपर के द्वितीयक स्मेल्टर के दोबारा शुरू होने तथा हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के नए द्वितीयक स्मेल्टर के चालू होने से देश की उत्पादन क्षमता में करीब एक लाख टन की बढ़ोतरी होगी। हालांकि, यह देश की मौजूदा लगभग 18 लाख टन की कुल मांग के मुकाबले काफी कम है।

करमारकर ने कहा कि इससे कुछ हद तक राहत मिलेगी, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर लगातार बढ़ेगा, इसलिए रिफाइनिंग और स्मेल्टिंग क्षेत्र में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।

उन्होंने बताया कि घरेलू स्तर पर तांबा कैथोड की उपलब्धता में भी सुधार होगा। हिंडालको अपनी स्मेल्टर-रिफाइनरी क्षमता का विस्तार कर रही है, जबकि कच्छ कॉपर की नई उत्पादन क्षमता भी जल्द शुरू होने वाली है। इससे देश में घरेलू प्रसंस्करण के लिए अधिक मात्रा में तांबा कैथोड उपलब्ध होगा।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा विस्तार योजनाएं भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगी। उनका कहना था कि यदि भारत की वृद्धि दर और तांबे की खपत का मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो हर पांच साल में करीब पांच लाख टन नई परिष्कृत तांबा क्षमता जोड़ना अनिवार्य होगा। तभी घरेलू उत्पादन बढ़ती मांग के साथ कदम मिला सकेगा।

आईसीए इंडिया के वार्षिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में देश में तांबे की मांग 9.3 प्रतिशत बढ़कर 18.78 लाख टन हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में यह 17.18 लाख टन थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, भवन निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और नई प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिए जाने से तांबे की मांग में लगातार तेजी आ रही है। भवन निर्माण क्षेत्र में तांबे की मांग 11 प्रतिशत और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 17 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रिकॉर्ड क्षमता जोड़ी गई। इसके अलावा एयर कंडीशनर, पंखे, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन जैसी टिकाऊ उपभोक्ता सामान की मजबूत बिक्री के चलते इस क्षेत्र में भी दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे तांबे की मांग को और बल मिला।

भाषा अजय रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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