नयी दिल्ली, छह नवंबर (भाषा) घरेलू बाजार में सोने की कीमत अगले 6-12 महीनों में बढ़कर 1.60-1.68 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है। निवेश मांग जारी रहने और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के बीच दाम बढ़ने का अनुमान है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (एमओएफएसएल) ने अपनी ताजा तिमाही सर्राफा रिपोर्ट में अनुमान लगाया कि मध्यम अवधि में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें 4,500-4,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच जाएंगी, जबकि अल्पावधि में घरेलू कीमतें 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पास रह सकती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष की असाधारण तेजी के बाद अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि के अनुमान, मुद्रास्फीति के जारी रहने, ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल और वैश्विक घटनाक्रमों के बीच 2026 में बहुमूल्य धातुओं में उतार-चढ़ाव देखा गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमत जनवरी 2026 में लगभग 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जो बाद में घटकर 4,000 अमेरिकी डॉलर से नीचे आ गईं और फिर उनमें सुधार हुआ।
चांदी भी 100 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के पार जाने के बाद तेज गिरावट का शिकार हुई। रुपया-डॉलर विनिमय दर में उतार-चढ़ाव ने घरेलू सर्राफा कीमतों में अस्थिरता को और बढ़ा दिया।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 की एकतरफा तेजी के विपरीत, इस साल बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में अधिक तेज उतार-चढ़ाव देखे गए हैं, जो बदलती वैश्विक वृहद आर्थिक स्थितियों और मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदों को दर्शाते हैं।
घरेलू बाजार में दिवाली के दौरान सोने की कीमतें 2016 में दर्ज किए गए लगभग 30,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 2026 में करीब 1.5 लाख रुपये हो गई हैं, जो पिछले एक दशक में हुई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाती हैं।
ऐतिहासिक रुझान बताते हैं कि त्योहारी मांग का संबंध अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव की तुलना में घरेलू प्रीमियम, आयात और भौतिक खरीदारी की मात्रा से अधिक रहा है।
ऐतिहासिक प्रदर्शन यह भी दर्शाता है कि सोने ने आमतौर पर दिवाली के बाद के 30 दिनों की तुलना में दिवाली से ठीक पहले के 30 दिनों के दौरान अधिक मजबूत प्रतिफल दिया है।
एमओएफएसएल के जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा, ”वैश्विक आर्थिक और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में अपना महत्व बनाए हुए है। हालांकि, निकट भविष्य में इसकी दिशा फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, मुद्रास्फीति के रुझान, अमेरिकी डॉलर की चाल और वास्तविक बॉन्ड प्रतिफल से निर्धारित होगी।”
भाषा पाण्डेय रमण
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