नयी दिल्ली, 27 नवंबर (भाषा) ‘इंडिया सीड सॉवरेन्टी अलायंस’ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अंतरराष्ट्रीय बीज संधि ‘आईटीपीजीआरएफए’ में प्रस्तावित बदलावों को खारिज करने की अपील करते हुए कहा है कि इससे देश के बीज अधिकारों को नुकसान होगा।
अलायंस की मुख्य चिंता ‘आईटीपीजीआरएफए’ में बदलावों को लेकर है जो 64 फसलों से आगे बढ़कर सभी पौधों के जेनेटिक संसाधन और उनकी ‘डिजिटल सीक्वेंस इन्फॉर्मेशन’ (डीएसआई) को शामिल करने के लिए मुक्त वैश्विक पहुंच के बहु-स्तरीय प्रणाली का विस्तार करेगा।
भारत वर्ष 2002 से ‘खाद्य एवं कृषि के लिए पौध जीन संसाधन अंतरराष्ट्रीय संधि’ (आईटीपीजीआरएफए) का एक पक्ष रहा है। इन बदलावों पर अभी पेरू की राजधानी लीमा में बातचीत चल रही है।
अलायंस ने अपने खुले पत्र में कहा, ‘‘वैश्विक दक्षिण के देशों को हमारे समृद्ध जेनेटिक खजाने और जीनोमिक जानकारी अपने बौद्धिक संपदा अधिकार का दावा करने और अधिक मुनाफा कमाने को प्राथमिकता देने वाली ‘वैश्विक उत्तर’ की बीज कंपनियों को क्यों सौंपी जानी चाहिए।’’
अलायंस ने वैश्विक दक्षिण से परिशिष्ट-1 में प्रस्तावित संशोधन से इनकार करने, कृषक अधिकारों के लिए एक प्रणाली पर मिलकर काम करने और पारंपरिक जेनेटिक संसाधन पर पेटेंट के गलत इस्तेमाल को रोकने की अपील की।
इसके अलावा, अलायंस ने निगरानी प्रणाली को बेहतर बनाने, लाभ साझा करने की शर्तों का पालन पक्का करने, राष्ट्रीय विरासत रजिस्ट्री बनाने, किसानों के साथ भागीदारीपूर्ण सुनवाई करने, संधि की कार्रवाई के लिए अनुभवी वार्ताकार नियुक्त करने, और पारंपरिक बीजों का इस्तेमाल करके कृषि-पारिस्थिकी रास्ता अपनाने को भी कहा।
अलायंस ने प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, ‘‘हमें भरोसा है कि आप देश एवं किसानों के जरूरी हितों, जिसमें बीज की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता शामिल है, की पूरी तरह से रक्षा करने की पूरी कोशिश करेंगे।’’
बहुराष्ट्रीय बीज कंपनियों को पहले से ही वैश्विक व्यापार के 54 प्रतिशत से अधिक नियंत्रण है और वे दुनिया भर के किसानों से अरबों का मुनाफा कमाती हैं।
अलायंस ने भारत की पौध किस्मों एवं किसानों के अधिकार संरक्षण कानून को लागू करने में गंभीर कमियों का भी उल्लेख किया है।
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