मुंबई, 30 जून (भाषा) बैंकों और गैर-बैंकिंग क्षेत्र के मजबूत बही-खाते के बल पर भारतीय वित्तीय प्रणाली मजबूत बनी हुई है। साथ ही मार्च, 2026 के अंत में बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (जीएनपीए) कई दशक के निचले स्तर 1.8 प्रतिशत पर आ गई हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) के अनुसार, बार-बार के झटकों के बावजूद वैश्विक वित्तीय प्रणाली ने अब तक उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद शुरुआत में बाजार में कुछ अस्थिरता देखी गई, लेकिन उसके बाद बाजार व्यवस्थित बने रहे।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि भारत के मजबूत वृहद आर्थिक आधार उसे कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में रखते हैं और पिछले संकट की तुलना में बाहरी झटकों से अधिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
हालांकि, आरबीआई ने चेतावनी दी कि ऊर्जा और अन्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों, पेट्रोल पंप दरों में सीमित समायोजन, उत्पाद शुल्क में कटौती और सब्सिडी पर बढ़ते खर्च के कारण राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।
साथ ही, आरबीआई ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच अंतरिम शांति समझौता भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए सहायक साबित हो सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि घरेलू वित्तीय प्रणाली मजबूत बनी हुई है, जिसे बैंक और गैर-बैंकिंग क्षेत्र के मजबूत बही-खाते का समर्थन प्राप्त है। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक मजबूत पूंजी, पर्याप्त नकदी, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और स्थिर लाभप्रदता के कारण सुरक्षित स्थिति में हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने कहा कि भारतीय बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात मार्च, 2026 तक घटकर कई दशक के निचले स्तर 1.8 प्रतिशत पर आ गया है।
हालांकि, आरबीआई ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली की मजबूती बरकरार है, लेकिन वित्तपोषण एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभर रहा है, क्योंकि बचतकर्ता बेहतर रिटर्न के लिए शेयर और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कृत्रिम मेधा (एआई)-आधारित साइबर हमले बैंकिंग क्षेत्र के लिए निकट अवधि की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली दो प्रमुख शक्तियों बढ़ते भू-राजनीतिक विभाजन और कृत्रिम मेधा (एआई) में तीव्र तकनीकी प्रगति से उत्पन्न व्यवधान के कारण पुनर्गठित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि जारी संघर्षों और लगातार आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, जिसका आंशिक कारण एआई आधारित संभावित उत्पादकता लाभों को लेकर आशावाद है। हालांकि, तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच निकट भविष्य का दृष्टिकोण अनिश्चित बना हुआ है।
मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली ने बड़े पैमाने पर बाहरी झटकों के बावजूद उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। मजबूत वृद्धि, कम मुद्रास्फीति, वित्तीय और गैर-वित्तीय कंपनियों के मजबूत बही-खाते और पर्याप्त ‘बफर’ ने देश की व्यापक आर्थिक-वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने में मदद की है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न तनाव कम होने और अंतरिम शांति समझौते के बाद जोखिम कुछ हद तक घटे हैं, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं अब भी बनी हुई हैं।
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर आरबीआई ने कहा कि आपूर्ति बाधाओं और कमजोर मानसून की आशंका के कारण मुद्रास्फीति ऊपरी सीमा तक या लगभग छह प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में हालिया गिरावट वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों की सख्ती को दर्शा सकती है, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर भी दबाव बना हुआ है।
केंद्रीय बैंक ने यह भी बताया कि परिवारों पर कुल कर्ज बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 45.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसमें गैर-आवासीय खुदरा ऋणों की हिस्सेदारी अधिक रही है।
भाषा योगेश अजय
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