नई दिल्ली: महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के मामले में पूर्व भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने मंगलवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में अपनी अंतिम दलीलें पेश कीं और अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया.
मामले में बृजभूषण शरण सिंह और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर पर महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर मुकदमा चल रहा है. आरोप उस समय के हैं जब बृजभूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष थे.
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्वनी पंवार ने मामले की सुनवाई की. आरोपियों की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन ने अधिवक्ता रेहान खान और ऋषभ भाटी के साथ पक्ष रखा.
सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया. अदालत ने अब मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया है, जब शिकायतकर्ता पक्ष अपनी अंतिम दलीलें पेश करेगा. इसके बाद अदालत इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख सकती है.
इससे पहले 12 मई को अदालत ने विशेष जांच दल (SIT) के एक सदस्य का बयान दर्ज किया था. मामले के जांच अधिकारी का बयान भी रिकॉर्ड किया जा चुका है.
यह मामला उन शिकायतों से जुड़ा है, जो महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दर्ज कराई थीं. आरोपों को लेकर पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया था. शिकायतों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी.
जांच पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस ने 15 जून 2023 को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ करीब 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. चार्जशीट भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A, 354D और 506(1) के तहत दाखिल की गई थी.
इस बीच, भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने 9 मई को पहलवान विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. नोटिस में तीन बार की ओलंपियन पर अनुशासनहीनता और कथित एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे तथा उन्हें गोंडा में आयोजित राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित किया गया था.