नई दिल्ली: अगस्त 2024 में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के दो साल बाद देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर मिली-जुली है. विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार हुआ है, विदेशों से भेजे जाने वाले पैसे में तेजी आई है और महंगाई कम हुई है. लेकिन आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी बनी हुई है, निजी क्षेत्र को मिलने वाले कर्ज की रफ्तार घट रही है और कीमतें अब भी बढ़ रही हैं, हालांकि पहले के मुकाबले धीरे बढ़ रही हैं.
आर्थिक परेशानियां भी उन कारणों में शामिल थीं, जिनकी वजह से छात्रों के विरोध प्रदर्शन तेज हुए और आखिरकार हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा. बढ़ती महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार में कमी और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण और बिगड़ी आर्थिक मंदी ने बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया था. इसके बाद ढाका को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मदद मांगनी पड़ी.
हालांकि, हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद से अर्थव्यवस्था के सभी रुझानों में एक जैसा बदलाव नहीं आया है.
विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार ने उस गिरावट को पलट दिया है, जो हसीना के सत्ता छोड़ने से काफी पहले शुरू हो गई थी. वहीं, आर्थिक विकास की रफ्तार में गिरावट भी उनके सत्ता से हटने से पहले ही शुरू हो गई थी.
एक दशक तक बढ़ने के बाद आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हुई

पिछले एक दशक में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का विस्तार हुआ. कोविड-19 महामारी के दौरान भी यह बढ़ती रही. लेकिन हसीना के शासन के आखिरी वर्षों में आर्थिक विकास कमजोर पड़ने लगा और जिस वित्त वर्ष में उन्होंने सत्ता छोड़ी, उसमें यह और धीमा हो गया.
जुलाई 2024 से जून 2025 के बीच बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का महंगाई के असर को हटाने के बाद का कुल उत्पादन लगभग 34.6 ट्रिलियन बांग्लादेशी टका रहा. इसकी गणना 2015-16 की स्थिर कीमतों के आधार पर की गई है.
हालांकि, अर्थव्यवस्था के बढ़ने की रफ्तार अलग-अलग समय पर काफी अलग रही. वित्त वर्ष 2016 से 2019 के बीच अर्थव्यवस्था औसतन हर साल 7.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी. इसके बाद महामारी के दौरान वित्त वर्ष 2020 में विकास दर घटकर 3.4 प्रतिशत रह गई.
अगले साल विकास दर में सुधार हुआ और यह 6.9 प्रतिशत तक पहुंच गई. वित्त वर्ष 2022 में यह बढ़कर 7.1 प्रतिशत हो गई, लेकिन इसके बाद अर्थव्यवस्था की रफ्तार फिर धीमी पड़ने लगी.
हसीना के सत्ता छोड़ने से दो वित्त वर्ष पहले ही आर्थिक विकास में सुस्ती साफ दिखाई देने लगी थी. वित्त वर्ष 2025 में, जिस साल हसीना ने सत्ता छोड़ी, GDP की विकास दर गिरकर 3.5 प्रतिशत रह गई. यह एक दशक में दूसरी सबसे कम विकास दर थी. इसके बाद वित्त वर्ष 2026 में कुछ सुधार हुआ और शुरुआती आंकड़ों के अनुसार विकास दर 4.1 प्रतिशत रही.
विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार
विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव की तस्वीर इससे अलग है. हसीना के सत्ता छोड़ने से पहले शुरू हुई लंबी गिरावट के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार हुआ है. नवंबर 2024 में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें लगभग 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. सितंबर 2026 तक यह फिर लगभग जुलाई 2022 के स्तर पर पहुंच गया.
जुलाई 2022 से जुलाई 2024 के बीच विदेशी मुद्रा भंडार 31.17 अरब डॉलर से गिरकर 20.39 अरब डॉलर रह गया. यानी इसमें लगभग 34.6 प्रतिशत की गिरावट आई.
हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद भी यह गिरावट जारी रही. नवंबर 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 18.61 अरब डॉलर रह गया, जो इस अवधि में इसका सबसे निचला स्तर था.
दिसंबर 2024 में भंडार में फिर बढ़ोतरी शुरू हुई. इसके बाद बीच-बीच में उतार-चढ़ाव के बावजूद जून 2026 में यह बढ़कर 32.91 अरब डॉलर हो गया. सितंबर 2026 में विदेशी मुद्रा भंडार 31.2 अरब डॉलर था.

महंगाई कम हुई, लेकिन कीमतें अब भी ऊंची हैं
जुलाई 2024 से सितंबर 2026 के बीच बांग्लादेश में सालाना महंगाई दर में गिरावट आई. जुलाई 2024 में यह 11.7 प्रतिशत थी, जो सितंबर 2026 में घटकर 8.3 प्रतिशत रह गई.
हालांकि, इसी अवधि में चीजों की कुल कीमतें लगातार बढ़ती रहीं. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) जुलाई 2024 के 126.06 से बढ़कर 153.33 हो गया. यानी इसमें लगभग 21.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.
इसका मतलब है कि कीमतें बढ़ती रहीं, लेकिन उनके बढ़ने की रफ्तार धीमी हो गई. महंगाई दर में गिरावट का मतलब है कि कीमतें पहले के मुकाबले धीरे बढ़ रही हैं. इसका यह मतलब नहीं है कि रहने-खाने और दूसरी जरूरतों पर होने वाला खर्च कम हो गया है.
इन्हीं बढ़ती लागतों ने लोगों में असंतोष बढ़ाने में भूमिका निभाई थी. इस अवधि में बांग्लादेश में महंगाई बढ़ने की रफ्तार कम हुई, जिसे अंग्रेजी में ‘डिसइन्फ्लेशन’ कहते हैं. ऐसा नहीं हुआ कि कीमतें गिर गईं, जिसे ‘डिफ्लेशन’ कहा जाता है.

निजी क्षेत्र को मिलने वाले कर्ज से कमजोर मांग का संकेत
अर्थव्यवस्था पर लगातार बने दबाव का एक और संकेत निजी क्षेत्र को मिलने वाले कर्ज की धीमी होती रफ्तार है. निजी क्षेत्र पर बकाया कुल कर्ज की रकम सामान्य कीमतों के हिसाब से अब भी बढ़ रही है, लेकिन इसके सालाना बढ़ने की दर में काफी गिरावट आई है.
जुलाई 2024 से जुलाई 2026 के बीच निजी क्षेत्र पर बकाया कर्ज की सालाना वृद्धि दर लगभग 5.5 प्रतिशत अंक गिर गई. यह 10.1 प्रतिशत से घटकर 4.6 प्रतिशत रह गई. जून 2026 में यह लगभग 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो अध्ययन की गई अवधि में सबसे कम थी.

जुलाई से दिसंबर 2026 की अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट में बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक, बांग्लादेश बैंक ने निजी क्षेत्र में कर्ज की कमजोर मांग के लिए सख्त वित्तीय स्थितियों और अर्थव्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितता को जिम्मेदार बताया.
केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि कर्ज नहीं चुकाने के मामले बढ़ने और सरकार की उधार लेने की जरूरत बढ़ने के कारण वाणिज्यिक बैंक अब कर्ज देने में ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं.
बैंक अपने पास मौजूद अतिरिक्त पैसे को निजी कारोबारों को कर्ज देने के बजाय सरकार की ऐसी प्रतिभूतियों में लगा रहे हैं, जिनमें जोखिम कम होता है.
टैक्स से होने वाली कमाई पर दबाव बना हुआ है
देश की अर्थव्यवस्था के आकार के मुकाबले सरकार की टैक्स से कमाई जुटाने की क्षमता भी कमजोर हुई है.
टैक्स-GDP अनुपात यह बताता है कि अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन के मुकाबले सरकार को टैक्स से कितनी कमाई होती है.
बांग्लादेश में यह अनुपात वित्त वर्ष 2023 के 7.30 प्रतिशत से थोड़ा बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 7.36 प्रतिशत हुआ. लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यह गिरकर 6.79 प्रतिशत रह गया.

विदेशों से भेजे जाने वाले पैसे में तेजी, कपड़ों के निर्यात में उतार-चढ़ाव
बांग्लादेश को विदेशों से मिलने वाले पैसे यानी रेमिटेंस और रेडीमेड कपड़ों का निर्यात, विदेशी मुद्रा कमाने के दो अहम स्रोत हैं. लेकिन इन दोनों का रुझान अलग-अलग रहा है.
रेमिटेंस में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. वहीं, कपड़ों के निर्यात में लगातार दो साल की गिरावट के बाद वित्त वर्ष 2025 में सुधार हुआ, लेकिन वित्त वर्ष 2026 में इसमें थोड़ी गिरावट आ गई. बांग्लादेश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक देश है.
हसीना के शासन का आखिरी पूरा वित्त वर्ष, यानी वित्त वर्ष 2024 में विदेशों से भेजे गए पैसे की कुल रकम 23.91 अरब डॉलर थी. यह वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 30.33 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2026 में 35.59 अरब डॉलर हो गई.
इस तरह दो साल में रेमिटेंस में कुल मिलाकर लगभग 49 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.

विश्व बैंक ने बताया कि वित्त वर्ष 2025 में बांग्लादेशी टका की कीमत में गिरावट और सरकार तथा बैंकों की ओर से दिए गए प्रोत्साहनों ने बैंकिंग व्यवस्था के औपचारिक माध्यमों से विदेशों से पैसे भेजे जाने में बढ़ोतरी करने में मदद की.
दूसरी ओर, कपड़ों के निर्यात में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. बांग्लादेश के कुल सामान के निर्यात से होने वाली कमाई में कपड़ा उद्योग की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से ज्यादा है.
कोविड-19 महामारी के बाद इस क्षेत्र में सुधार हुआ और वित्त वर्ष 2022 में कपड़ों का निर्यात 42.61 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
इसके बाद लगातार दो वित्त वर्षों तक निर्यात से होने वाली कमाई में गिरावट आई और वित्त वर्ष 2024 में यह घटकर 36.15 अरब डॉलर रह गई.
वित्त वर्ष 2025 में निर्यात में 8.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 39.35 अरब डॉलर तक पहुंच गया. लेकिन वित्त वर्ष 2026 में इसमें थोड़ी गिरावट आई. इसके बावजूद, निर्यात से होने वाली कमाई वित्त वर्ष 2024 के स्तर से ऊपर रही.
कुल मिलाकर, हसीना को सत्ता से हटाए जाने के दो साल बाद बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर मिली-जुली है.
इनमें से कई आर्थिक रुझान हसीना के सत्ता छोड़ने से पहले ही शुरू हो गए थे. इसलिए अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का पूरा श्रेय या पूरा दोष राजनीतिक बदलाव को देना मुश्किल है.
इसी तरह, कुछ आर्थिक संकेतकों में बाद में हुआ सुधार अपने आप यह साबित नहीं करता कि अर्थव्यवस्था की बुनियादी समस्याएं दूर हो गई हैं.
चुनौतियां अब भी इतनी बड़ी हैं कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण बिगड़ते आर्थिक हालात और भू-राजनीतिक तनाव के बीच बांग्लादेश अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए IMF से 4.5 अरब डॉलर के नए कर्ज पैकेज की मांग कर रहा है.
खास बात यह है कि इस साल 5 अगस्त को नई दिल्ली में दिए गए अपने भाषण में, जो सत्ता से हटाए जाने के बाद उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था, हसीना ने आरोप लगाया कि उन्हें पद से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था तेजी से बिगड़ गई है.
उन्होंने दावा किया कि आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो गई है, निवेश और रोजगार के अवसर कम हुए हैं और उनके कार्यकाल के दौरान हासिल की गई आर्थिक उपलब्धियां अब पीछे जा रही हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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