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Wednesday, 6 May, 2026
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बंगाल में लोकतंत्र ‘बंदूक के दम पर’ चल रहा : धर्मेंद्र प्रधान

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नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र ‘‘बंदूक के दम पर’’ चल रहा है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चुनावी जनादेश की भावना को स्वीकार न करने का आरोप भी लगाया।

प्रधान ने ‘एक्स’ पर किए एक पोस्ट में कहा कि जनादेश को ‘‘जनता की आवाज’’ के बजाय ‘‘अस्वीकार किए जा सकने वाले सुझाव’’ की तरह लिया जा रहा है, जिससे यह सवाल उठता है कि सत्ता को जिम्मेदारी माना जा रहा है या अधिकार।

उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल में लोकतंत्र बंदूक के दम पर है और चुनावी परिणाम को स्वीकार न करना इस सच्चाई को उजागर करता है। जनादेश को जनता की आवाज की तरह नहीं, बल्कि ऐसे सुझाव के रूप में देखा जा रहा है जिन्हें ठुकराया जा सकता है। ममता बनर्जी द्वारा जनादेश की भावना को न मानना एक गंभीर सवाल खड़ा करता है : क्या सत्ता को जिम्मेदारी के रूप में लिया जा रहा है या सिर्फ अधिकार के रूप में?’’

प्रधान ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व जवाबदेही से बच रहा है और ‘‘सत्ता से चिपके रहने’’ की कोशिश में निर्वाचन आयोग और सुरक्षा बलों जैसे संस्थानों की विश्वसनीयता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता से चिपके रहने की प्रक्रिया में ममता बनर्जी न केवल लोगों के जनादेश को नकार रही हैं, बल्कि चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों जैसे संस्थानों की साख को भी कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं, जो स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव सुनिश्चित करते हैं।’’

प्रधान ने यह भी दावा किया कि राज्य में शासन लंबे समय से डर और जमी-जमाई राजनीतिक संरक्षण की संस्कृति से प्रभावित रहा है और जनादेश की अनदेखी लोकतांत्रिक वैधता को कमजोर करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल का यह जनादेश डर और दबाव की राजनीति के प्रति अस्वीकृति की और जवाबदेही की मांग है। इसे नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक वैधता की बुनियाद को कमजोर करना होगा।’’

उन्होंने कहा, “भारत का संविधान शासन में हठधर्मिता को सद्गुण के रूप में मान्यता नहीं देता है। जवाबदेही अनिवार्य है और जनादेश पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।’’

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से चुनाव हारने के बाद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया और राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल से निरंतर चले आ रहे शासन का अंत कर दिया।

बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि लगभग 100 सीटों पर जनादेश ‘‘लूट लिया गया’’ और मतगणना को जानबूझकर धीमा किया गया ताकि उनकी पार्टी का मनोबल तोड़ा जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमें जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत हराया गया है। मैं हारी नहीं हूं और मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी। वे संवैधानिक नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।’’

भाषा गोला मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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