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Friday, 30 October, 2026
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दिल्ली: प्रतीकात्मक संसद में प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी की भूमिका निभाई

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नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित प्रतीकात्मक संसद में प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य राजनेताओं की भूमिका निभाई।

उन्होंने इस दौरान चुनाव की निष्पक्षता और ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर बहस की।

नागरिक अधिकार समूह ‘सिटीजन्स फॉर डेमोक्रेसी’ द्वारा नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के सभागार में ‘लोकतंत्र बनाम अराजकता’ विषय पर आयोजित ‘प्रतीकात्मक संसद’ (मॉक पार्लियामेंट) का उद्देश्य संसदीय कार्यवाही का स्वरूप प्रस्तुत करना था।

इसमें प्रतिभागियों ने समसामयिक राजनीतिक एवं संवैधानिक मुद्दों पर बहस की, सवाल उठाए और अपने तर्क रखे।

कार्यवाही की शुरुआत प्रधानमंत्री के संसद में प्रवेश के दृश्य को दोहराने के साथ हुई।

इस दौरान प्रतिभागियों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ‘वंदे मातरम’ के नारे भी लगाए।

इसके बाद लोकतंत्र के कामकाज और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

एक अधिकारी ने बताया कि चर्चा के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता एवं विश्वसनीयता, संसद की मर्यादा, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शनों की भूमिका जैसे मुद्दे उठाए गए।

प्रतीकात्मक संसद की कार्यवाही के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), निर्वाचन आयोग की भूमिका और ‘वोट चोरी’ के आरोपों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

बहस के दौरान सत्तापक्ष के एक नेता की भूमिका निभा रहे प्रतिभागी ने कहा कि लोकतंत्र तीन स्तंभों पर काम करता है ‘सबूत’, संसद और मतपेटी।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों के बैठने की व्यवस्था संसद की तरह की गई थी।

उनके सामने उन राजनेताओं के नाम की तख्तियां रखी गई थीं, जिनकी वे भूमिका निभा रहे थे।

इनमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अमित शाह सहित अन्य नेताओं के नाम शामिल थे।

कार्यक्रम स्थल को भी संसद भवन के अंदरूनी हिस्से जैसा रूप दिया गया था। इसके लिए संसद की विषय वस्तु पर विशेष सजावट की गई थी।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की भूमिका निभा रहे एक प्रतिभागी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं को संसद की कार्यप्रणाली से परिचित कराना और देश की संसदीय व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझने का अवसर देना है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की भूमिका निभा रहे एक अन्य प्रतिभागी ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य यह संदेश देना था कि सड़क पर विरोध प्रदर्शन और अशांति फैलाकर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस चर्चा में लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शनों की भूमिका, संसद की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखने में राजनीतिक दलों की जिम्मेदारियों जैसे मुद्दे भी उठाए गए।

दोनों पक्षों के नेताओं की भूमिका निभा रहे प्रतिभागियों ने सवाल-जवाब, तर्क और प्रतितर्क के जरिए अपने-अपने विचार रखे।

यह आयोजन एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की रैली से पहले हुआ है।

इस रैली में कथित चुनावी अनियमितताओं और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।

भाषा जितेंद्र माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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