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Saturday, 4 July, 2026
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दिल्ली मेट्रो की ट्रेनों के भीतर श्रव्य विज्ञापन शुरू करने की योजना

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(श्रुति भारद्वाज)

नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) दिल्ली मेट्रो की ट्रेनों में सफर के दौरान घोषणाओं के बीच की संक्षिप्त विराम जल्द ही विज्ञापनों की आवाज से टूट सकता है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) अपनी यात्री-किराए से अलग होने वाली आय को बढ़ाने के लिए रेड, येलो, ब्ल्यू और मैजेंटा लाइनों पर ट्रेनों के भीतर ऑडियो विज्ञापन शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

एक अधिकारी ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य टिकट बिक्री से इतर निगम की कमाई को मजबूत करना और अपनी ट्रेनों को विज्ञापन के एक बेहतरीन मंच के रूप में इस्तेमाल करना है।

इसके साथ ही इस पहल का एक उद्देश्य दिल्ली मेट्रो को दुनिया की प्रमुख परिवहन प्रणालियों और हवाई अड्डों के समकक्ष ला खड़ा करना भी है, जहां इस तरह के विज्ञापन प्रसारित किए जाते हैं।

इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए निगम ने एक निविदा जारी की है। इसके तहत विभिन्न विज्ञापन एजेंसियों से रेड (लाइन 1), येलो (लाइन 2), ब्ल्यू (लाइन 3) और मैजेंटा (लाइन 8) लाइनों की छह-छह ट्रेनों में विज्ञापन का समय सुरक्षित करने, उनका विपणन करने और पूरा प्रबंधन संभालने के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं।

अधिकारी के अनुसार, कश्मीरी गेट और सुल्तानपुर को जोड़ने वाली येलो लाइन राजधानी के सबसे पुराने और व्यस्ततम रास्तों में से एक है। रेड लाइन के बाद यह गलियारा विज्ञापन अवधि के लिहाज से चारों लाइनों में दूसरा सबसे बड़ा अवसर देता है, जहां दोनों दिशाओं के फेरों में कुल 596 सेकंड का समय विज्ञापनों के लिए उपलब्ध है।

उन्होंने विस्तार से बताया कि दिलशाद गार्डन और रिठाला को जोड़ने वाली रेड लाइन में विज्ञापनों के लिए सबसे अधिक कुल 721 सेकंड का समय उपलब्ध है। इसके बाद द्वारका और यमुना बैंक के बीच ब्ल्यू लाइन में 634 सेकंड का समय है, जबकि जनकपुरी पश्चिम और बॉटनिकल गार्डन के बीच मैजेंटा लाइन पर कुल 300 सेकंड का समय मिलेगा।

अधिकारी ने साफ किया कि यह विज्ञापन केवल सामान्य परिचालन घोषणाओं के बीच मिलने वाले शांत समय के दौरान ही प्रसारित किए जाएंगे। यात्रियों से जुड़ी जरूरी जानकारियों और सुरक्षा संदेशों को ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

यात्रियों की सुविधा को देखते हुए दो विज्ञापनों के बीच पर्याप्त समय का अंतर रखना भी अनिवार्य होगा।

अधिकारी के मुताबिक, यह व्यवस्था दुनिया के बड़े मेट्रो नेटवर्कों द्वारा अपनाई जाने वाली पद्धतियों के जैसी ही है, जहां यात्रा संबंधी आवश्यक सूचनाओं को प्रभावित किए बिना व्यावसायिक घोषणाओं को बेहद सावधानी से जोड़ा जाता है। विज्ञापनों की आवाज, उसकी गुणवत्ता और वे कितनी बार बजेंगे, इसे भी पूरी तरह नियंत्रण में रखा जाएगा।

निगम ने पहली बार दिसंबर 2023 में कश्मीरी गेट और बदरपुर के बीच चलने वाली वॉयलेट लाइन की छह ट्रेनों में प्रयोग के तौर पर इसकी शुरुआत की थी। अधिकारी ने कहा कि इस नए विस्तार से साफ है कि निगम अब इस व्यवस्था को अपने सबसे व्यस्त लाइनों पर भी लागू करने का मन बना चुका है।

चुनी गई एजेंसी ट्रेनों में विज्ञापन जुटाने और तकनीकी तालमेल से लेकर पैसों का पूरा हिसाब-किताब रखने के लिए जिम्मेदार होगी; इससे होने वाली कुल कमाई का 85 प्रतिशत हिस्सा मेट्रो को मिलेगा और बाकी बचा हिस्सा एजेंसी के पास रहेगा।

कुल समय का पांच प्रतिशत हिस्सा जनहित के संदेशों के लिए आरक्षित रहेगा, जिसका खर्च मेट्रो खुद उठाएगी।

भाषा सुमित प्रशांत

प्रशांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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