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Friday, 30 October, 2026
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दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने गायब आभूषणों के लिए बैंक को 47 लाख रुपये चुकाने का निर्देश दिया

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नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महिला और उसके दिवंगत ससुर के संयुक्त बैंक लॉकर से कथित तौर पर गायब हुए 47 लाख रुपये के आभूषणों के मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को यह राशि देने का निर्देश दिया है।

आयोग ने कहा कि बैंक लॉकर सौंपे जाने का कोई सबूत पेश करने में विफल रहा।

आयोग की अध्यक्ष संगीता ढींगरा सहगल और न्यायिक सदस्य बिमला कुमारी की पीठ मोनिका मारवाह की ओर से बैंक के खिलाफ दायर शिकायत पर सुनवाई कर रही थी। महिला ने आरोप लगाया था कि बैंक लॉकर में रखे 47 लाख रुपये के आभूषण गायब हो गए।

आयोग ने 27 अक्टूबर के आदेश में कहा, ‘‘विपक्षी पक्ष (बैंक) ने कथित तौर पर लॉकर सौंपे जाने के समय शिकायतकर्ता और उनके दिवंगत ससुर के लॉकर में रखी वस्तुओं की कोई रसीद उपलब्ध नहीं कराई।’’

आयोग ने बैंक को एक सितंबर 2018 से 27 अक्टूबर 2026 तक की अवधि के लिए 47 लाख रुपये की राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए तीन लाख रुपये का मुआवजा तथा मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 50 हजार रुपये देने को भी कहा।

आयोग ने कहा कि बैंक कथित तौर पर लॉकर सौंपे जाने के समय उसमें रखे सामान को देने की कोई रसीद भी उपलब्ध नहीं करा सका।

शिकायत के अनुसार, महिला 1998 से अपने ससुर के साथ संयुक्त रूप से लॉकर का इस्तेमाल कर रही थी। उसने आरोप लगाया कि अगस्त 2010 में ससुर की मृत्यु के बाद भी बैंक वर्ष 2013 तक लॉकर का किराया वसूलता रहा।

महिला ने बताया कि जब वह एक सितंबर 2018 को लॉकर खोलने के लिए बैंक पहुंची, तो उसे बताया गया कि 22 जनवरी 2015 को लॉकर बंद कर दिया गया था। महिला ने इस दावे को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि उसके 47 लाख रुपये मूल्य के आभूषण गायब हैं।

भाषा शफीक देवेंद्र

देवेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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