लखनऊ: पिछले एक साल में कई विवादों को लेकर चर्चा में रहे रिंकू सिंह राही एक बार फिर खबरों में हैं. इस बार उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रशासन में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और बड़े अधिकारियों को निशाना बनाया है.
राही, जो इस समय जालौन में SDM (न्यायिक) के पद पर तैनात IAS अधिकारी हैं, उन्होंने सोमवार और मंगलवार को एक्स पर यह आरोप लगाए.
सोमवार को राही ने श्रम आयुक्त और परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर सरकारी गाड़ियों की आउटसोर्सिंग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया.
उन्होंने लिखा, “मुझे नहीं पता क्यों, लेकिन भ्रष्टाचार पीछा ही नहीं छोड़ता. आप जहां भी देखते हैं, यह मौजूद है. अब जालौन कलेक्ट्रेट के जरिए आउटसोर्सिंग से एक गाड़ी उपलब्ध कराई गई है. इस आउटसोर्सिंग में भी बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार है.”
पता नहीं क्यों, लेकिन भ्रष्टाचार है कि पीछा नहीं छोड़ता। जहां देखो वहीं पर मौजूद है।
अभी कलेक्ट्रेट, जालौन से आउटसोर्स पर गाड़ी मिली है। इस आउटसोर्स में भी गजब का भ्रष्टाचार है और इस भ्रष्टाचार से ड्राइवर आदि का खुलेआम शोषण भी है।
बस जिसे टेंडर देना हो, उस फर्म से असंभव कम… pic.twitter.com/sQSPcBVyJT
— Rinku Singh Rahi (@Rahiagainstcor1) August 31, 2026
मंगलवार को राही ने एक और संदेश पोस्ट किया. इसमें उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन ऐसा लगा कि वह जिलाधिकारी को निशाना बना रहे हैं.
राही ने लिखा, “आज मैंने एक वरिष्ठ शुभचिंतक से बात की, जिन्होंने मुझे कुछ हैरान करने वाली बातें बताईं. जिले में मेरे बॉस ने मुझे बर्बाद करने में अपनी पूरी ताकत लगा दी है, यहां तक कि लखनऊ तक. सोशल मीडिया के लिए भगवान का शुक्र है, जिससे हर कोई डरता है, वरना अब तक मेरे साथ कुछ बहुत गंभीर हो सकता था.”
उन्होंने आगे दावा किया कि उनके कामों से उनके “बॉस” भी परेशानी में पड़ गए हैं.
आज एक वरिष्ठ शुभचिंतक से बात हुई, उन्होंने बड़े अचंभे वाली बातें बताईं।
जिले के मेरे बॉस ने मेरे खिलाफ एकदम पूरी ताकत लगा दी है मुझे बर्बाद करने के लिए, लखनऊ तक भी। वह तो शुक्र है कि सोशल मीडिया आदि का, जिसका डर है सभी को, अन्यथा अब तक कोई बहुत बड़ी घटना घटित हो जाती मेरे साथ।…
— Rinku Singh Rahi (@Rahiagainstcor1) August 31, 2026
उन्होंने लिखा, “शायद मेरी मौजूदगी ने मेरे बॉस के लिए भी परेशानी खड़ी कर दी है. अब तक उनकी छवि नंबर एक की थी, लेकिन मेरे आने के बाद सच्चाई सामने आ गई है और उनके चमकदार करियर पर भी सवाल उठने लगे हैं.”
सूत्रों के मुताबिक, रिंकू सिंह राही और जालौन के जिलाधिकारी राजेश पांडे के रिश्ते अच्छे नहीं हैं. यह भी कहा जा रहा है कि राही हाल में अपना पद बदले जाने से नाराज हैं.
दिप्रिंट से बात करते हुए रिंकू ने कहा, “मैं सोशल मीडिया पर पहले ही बता चुका हूं कि मैं क्या महसूस करता हूं और मैं अपनी बात पर कायम हूं. मेरा रुख साफ है और मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है. मैं कोई विवाद खड़ा नहीं करना चाहता. मैंने सिर्फ तथ्यों के बारे में लिखा है.”
2023 बैच के IAS अधिकारी राही को इस साल मई में जालौन तहसील का एसडीएम बनाया गया था. 23 जून को उन्होंने एक कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण करने के लिए दौरा किया था. इस दौरान उनकी कथित तौर पर ब्लॉक प्रमुख के साथ तीखी बहस हुई.
इस घटना के बाद उन्हें जालौन तहसील से हटा दिया गया और प्रशासनिक फेरबदल के तहत उरई में एसडीएम (न्यायिक) का पद दिया गया. माना जाता है कि इस बदलाव से राही नाराज़ हुए.
इस साल 11 जुलाई को, राही को जालौन एसडीएम के पद से हटाए जाने के कुछ ही समय बाद, उनके समर्थन में एक प्रदर्शन किया गया. लोगों के एक समूह ने उनके समर्थन में पोस्टर लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया और उनका ट्रांसफर रद्द करने की मांग करते हुए नारे लगाए. उन्होंने उन्हें “ईमानदार अधिकारी” बताया.
परिवहन विभाग पर आरोप
सोमवार को परिवहन आयुक्त को लिखे पत्र में राही ने सरकारी गाड़ियों की आउटसोर्सिंग व्यवस्था में गड़बड़ी का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि सेवा देने वाली कंपनियों की जगह बिचौलिए और दूसरे मध्यस्थ काम कर रहे हैं और इसकी वजह से परिवहन और श्रम से जुड़े नियमों का उल्लंघन हो रहा है.
राही ने कहा कि 25 अगस्त को मैनपुरी की हनी एंटरप्राइजेज ने एक बोलेरो गाड़ी उपलब्ध कराई थी. यह आउटसोर्सिंग एजेंसी थी, जिसे जिलाधिकारी कार्यालय ने GeM पोर्टल के जरिए चुना था.
उन्होंने दावा किया कि पहली नज़र में गाड़ी में ज़रूरी रजिस्ट्रेशन से जुड़ी शर्तें पूरी नहीं थीं, जिसमें पीली नंबर प्लेट भी शामिल है. उन्होंने आरोप लगाया कि गाड़ी वापस करने के बावजूद 27 अगस्त को ऐसी ही एक और गाड़ी फिर उपलब्ध करा दी गई.
उन्होंने लिखा, “दी गई गाड़ी में पीली नंबर प्लेट नहीं है. अगर सरकारी काम के लिए आउटसोर्स की गई गाड़ी के लिए पीली नंबर प्लेट ज़रूरी है, तो सरकारी काम में इसके इस्तेमाल से परिवहन नियमों और ठेके की शर्तों का पालन किए जाने पर गंभीर सवाल उठते हैं.”
राही ने यह भी आरोप लगाया कि ड्राइवरों की हर महीने करीब 6,000 रुपये की तनख्वाह कई महीनों से नहीं दी गई है. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकारी दफ्तरों के साथ मिलीभगत करके कम दरों पर टेंडर दिए जाते हैं और सिर्फ कागजों पर यह भरोसा दिलाया जाता है कि तय नियमों का पालन हो रहा है.
उन्होंने आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों की जांच की मांग की.
पुराने विवाद
जालौन में पोस्टिंग से पहले भी राही कई विवादों में रहे हैं. पिछले साल जब वह शाहजहांपुर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे, तब वकीलों के सामने उठक-बैठक करने का उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. उनका यह असामान्य रूप देखकर हर कोई हैरान था. हालांकि, राही ने साफ किया था कि उन्हें उठक-बैठक करने के लिए मजबूर नहीं किया गया था. उन्होंने कहा था कि परिसर में सफाई नहीं थी और उन्होंने उदाहरण पेश करने के लिए खुद उठक-बैठक करने का फैसला किया था.
इस साल जुलाई में राही ने उत्तर प्रदेश के नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को एक पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने कहा था कि फिलहाल एसडीएम (न्यायिक) के तौर पर उन्हें दिन में केवल करीब चार घंटे ही काम मिलता है.
उन्होंने कहा था कि जब तक उन्हें उनकी क्षमता के हिसाब से फील्ड की जिम्मेदारी नहीं दी जाती, तब तक उन्हें उनकी आधी सैलरी ही दी जानी चाहिए. उन्होंने यह भी मांग की थी कि नियमों के मुताबिक उन्हें जालौन की किसी दूसरी तहसील या राज्य के किसी दूसरे जिले में तैनात किया जाए. अगर ऐसा संभव नहीं है, तो उन्होंने दूसरे राज्य में भेजने की अनुमति मांगी थी.
हालांकि राही 2023 में आईएएस बने, लेकिन वह 2004 से राज्य सरकार की सेवा में थे. सीनियर सबऑर्डिनेट सर्विसेज परीक्षा पास करने के बाद वह जिला समाज कल्याण अधिकारी बने थे.
2008 में मुजफ्फरनगर में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने छात्रवृत्ति और फीस वापस करने की योजना में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का खुलासा किया था. बाद में 2009 में एक सुबह जब वह बैडमिंटन खेल रहे थे, तब उन पर हमला हुआ और कई गोलियां चलाई गईं. वह गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी एक आंख की रोशनी चली गई. वह कई महीनों तक अस्पताल में रहे.
इसके बाद 2022 में उन्होंने दिव्यांग कोटे से यूपीएससी परीक्षा दी और इस बार आईएएस बनने का अपना सपना पूरा किया.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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