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Wednesday, 2 September, 2026
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NEET पेपर लीक आरोपी ने तिहाड़ में मांगी हनुमान चालीसा, शिवाजी पर किताब

सीबीआई ने धनंजय लोखंडे को महाराष्ट्र से हरियाणा और फिर राजस्थान तक लीक हुए प्रश्न पत्र पहुंचाने की मुख्य कड़ी के रूप में पहचाना है.

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नई दिल्ली: इस साल की नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट) नीट परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने से जुड़े मामले के एक मुख्य आरोपी ने जेल अधिकारियों को हनुमान चालीसा और मंगल स्तोत्र जैसे धार्मिक ग्रंथ उपलब्ध कराने के निर्देश देने की मांग की है. आरोपी धनंजय लोखंडे ने मराठी लेखक रंजीत देसाई द्वारा छत्रपति शिवाजी पर लिखे गए जीवनी आधारित उपन्यास ‘श्रीमान योगी’ की एक कॉपी भी मांगी है.

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को लोखंडे की यह याचिका मंजूर कर ली. यह याचिका उसके वकील विक्रम सिंह के जरिए दाखिल की गई थी. अदालत ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुरक्षा जांच के बाद किताबें लोखंडे को दी जाएं. ये किताबें उसका वकील या परिवार के सदस्य उपलब्ध कराएंगे.

विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने आदेश में कहा, “तथ्यों और परिस्थितियों तथा आरोपी नंबर 8 की तरफ से दी गई दलीलों को देखते हुए, संबंधित जेल अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि आवेदन के प्रार्थना खंड (a) में बताई गई धार्मिक किताब आरोपी को उपलब्ध कराई जाए. यह किताब उसके परिवार के किसी सदस्य या उसके अधिकृत वकील द्वारा दी जाएगी और सुरक्षा जांच तथा इस संबंध में जेल मैनुअल के नियमों के अनुसार उपलब्ध कराई जाएगी.”

नीट-यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक की जांच के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से लोखंडे दिल्ली की तिहाड़ जेल में है. एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में लोखंडे को महाराष्ट्र से हरियाणा और फिर राजस्थान तक लीक हुए प्रश्न पत्र पहुंचाने की एक मुख्य कड़ी बताया है.

एजेंसी के मुताबिक, लोखंडे ने अपने साथियों को पुणे की कारोबारी महिला मनीषा वाघमारे से प्रश्न पत्र लेने के लिए भेजा था. वाघमारे ने ये प्रश्न पत्र नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के पैनल में शामिल विषय विशेषज्ञों से हासिल किए थे. लीक हुए सवालों की फिजिकल कॉपियां मिलने के बाद, लोखंडे ने कथित तौर पर इन्हें नासिक के आरोपी शुभम खैरनार के साथियों को दे दिया. बाद में उन्होंने इन्हें गुरुग्राम में यश यादव को दिया, जहां से ये राजस्थान के सीकर में बिवाल परिवार तक पहुंचे.

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ आरोप लगाए हैं. इनमें विषय विशेषज्ञों की तिकड़ी—पी.वी. कुलकर्णी, मनीषा हवालदार और मनीषा मंधारे, भी शामिल हैं. पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई विशेष अदालत इस मामले की रोजाना सुनवाई कर रही है.

इस बीच, अदालत ने मंधारे और हवालदार की उन याचिकाओं को भी खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा इस्तेमाल नहीं किए जाने वाले दस्तावेजों और सामग्री को देखने के लिए ज्यादा समय मांगा था. मंगलवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील वी.के. पाठक और अर्जुन आनंद ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने मामले के उन दस्तावेजों को, जिन पर अभियोजन पक्ष भरोसा नहीं कर रहा है, 24 और 25 अगस्त को दो-दो घंटे तक देखा था. अदालत को यह भी बताया गया कि हवालदार के वकील ने 25, 27 और 31 अगस्त को ऐसी सामग्री को कुल छह से सात घंटे तक देखा था.

हालांकि, मंधारे और हवालदार के वकीलों ने अपने व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए और समय मांगा, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया.

विशेष न्यायाधीश गुप्ता ने कहा, “यह अदालत ऐसी दलीलों में कोई दम नहीं पाती. संशोधित कानून के प्रावधान के अनुसार, इस मामले का मुकदमा तेजी से और रोजाना के आधार पर चलाया जाना है. इसलिए हर दिन महत्वपूर्ण है और आरोपियों के वकीलों की जिम्मेदारी थी कि जिन दिनों उन्हें दस्तावेज देखने के लिए दिए गए थे, उन दिनों वे अभियोजन पक्ष द्वारा इस्तेमाल नहीं किए जाने वाले दस्तावेज़ की जांच के लिए ज्यादा से ज्यादा समय का इस्तेमाल करते.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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