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Thursday, 2 July, 2026
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यूपी IAS रिंकू राही फिर विवादों में, जालौन में BJP ब्लॉक प्रमुख से ‘हाथापाई’ के आरोप के बाद तबादला

बीजेपी नेता का आरोप- 23 जून को एक कोल्ड स्टोरेज में पहले कहासुनी हुई, फिर SDM ने धक्का दिया और मारने की कोशिश की. मंगलवार को रिंकू राही की तैनाती उरई में SDM (न्यायिक) के रूप में की गई.

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लखनऊ: भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) 2023 बैच के अधिकारी रिंकू सिंह राही, जो पहले भी कई विवादों के केंद्र में रह चुके हैं, एक बार फिर सुर्खियों में हैं. जालौन के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) रहे राही का मंगलवार को तबादला कर उन्हें उरई में एसडीएम (न्यायिक) बनाया गया. वहीं, राकेश कुमार सोनी को जालौन का नया एसडीएम नियुक्त किया गया है.

जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय के आदेश पर किया गया यह प्रशासनिक फेरबदल कुछ दिन पहले राही और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन के बीच कथित कहासुनी और फिर धक्का-मुक्की की घटना के बाद हुआ है. हालांकि, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है.

यह घटना 23 जून की है, जब राही एक कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण करने पहुंचे थे. उसी समय बीजेपी नेता रामराजा निरंजन भी वहां मौजूद थे. बताया जाता है कि दोनों के बीच बहस शुरू हो गई. बीजेपी नेता के मुताबिक, यह कहासुनी इतनी बढ़ गई कि एसडीएम ने उन्हें थप्पड़ मारने की कोशिश की. निरंजन का आरोप है कि थप्पड़ उनके चेहरे पर नहीं लगा, बल्कि उनके हाथ पर लगा. यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई.

घटना के बाद निरंजन ने जिलाधिकारी राजेश पांडेय को लिखित शिकायत दी और सबूत के तौर पर सीसीटीवी फुटेज भी सौंपी. आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति बना दी.

मीडिया से बात करते हुए निरंजन ने तबादले का स्वागत किया और जिला प्रशासन का धन्यवाद दिया, लेकिन कहा कि सिर्फ तबादला काफी नहीं है. उन्होंने कहा, “तबादला कोई समाधान नहीं है. जांच पूरी होने के बाद कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और एसडीएम के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी सम्मानित नागरिक को ऐसी बेइज्जती का सामना न करना पड़े.”

यह पहली बार नहीं है जब राही का बीजेपी नेताओं से विवाद हुआ हो. करीब एक महीने पहले बीजेपी विधायक गौरीशंकर वर्मा ने भी जालौन में उनके काम करने के तरीके पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई थी.

राही ने इस मामले पर कोई बयान नहीं दिया है. दिप्रिंट ने जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की, तब उनका फोन नहीं लग सका.

आईएएस अधिकारी बनने से पहले रिंकू सिंह राही उत्तर प्रदेश में प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) अधिकारी थे. साल 2008 में जब उनकी तैनाती मुजफ्फरनगर में थी, तब उन्होंने छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति योजना में बड़े स्तर पर हुए भ्रष्टाचार का खुलासा किया था. साल 2009 में बैडमिंटन खेलते समय वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिससे उनकी एक आंख की रोशनी चली गई.

इसके बाद साल 2022 में उन्होंने दिव्यांग कोटे से सिविल सेवा परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया.

वायरल हुआ था मामला

आईएएस की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद साल 2025 में राही की पहली तैनाती शाहजहांपुर में एसडीएम के रूप में हुई थी. वहां वह उस समय विवादों में आ गए थे, जब उन पर आरोप लगा कि उन्होंने कचरा फैलाने की सज़ा के तौर पर अदालत के एक क्लर्क से उठक-बैठक लगवाई. इस कार्रवाई का वकीलों ने विरोध किया था.

लेकिन पीछे हटने के बजाय राही खुद प्रदर्शन कर रहे वकीलों के बीच पहुंचे और कान पकड़कर सार्वजनिक रूप से उठक-बैठक लगाई. उन्होंने कहा कि नियम और सज़ा सभी पर बराबर लागू होने चाहिए. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. इसके बाद उन्हें लखनऊ स्थित राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया था.

राजस्व परिषद से संबद्ध रहने के दौरान राही ने उन्हें कोई काम नहीं दिए जाने पर नाराज़गी जताई थी. इसी साल 26 मार्च को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा था कि वह बिना सरकारी काम किए सैलरी नहीं लेना चाहते.

अपने इस्तीफे में उन्होंने यह भी अनुरोध किया था कि उन्हें फिर से उनके पुराने पीसीएस पद, जिला समाज कल्याण अधिकारी, पर भेज दिया जाए ताकि वह सीधे जनता की सेवा कर सकें. इसके बाद उन्हें जालौन में बतौर एसडीएम पोस्टिंग दी गई थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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