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Tuesday, 11 August, 2026
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED ने कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को किया गिरफ्तार

ED के रायपुर जोनल ऑफिस ने मामले में पूछताछ के बाद अग्रवाल को गिरफ्तार किया. इस गिरफ्तारी के साथ एजेंसी की चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच और तेज हो गई है.

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नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

ED के रायपुर जोनल ऑफिस ने मामले में पूछताछ के बाद अग्रवाल को गिरफ्तार किया. इस गिरफ्तारी के साथ एजेंसी की चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच और तेज हो गई है.

यह कार्रवाई मामले में 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां अटैच किए जाने के करीब दो महीने बाद हुई है. ED ने 28 मई को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत तीन प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी किए थे. इनके तहत करीब 200 करोड़ रुपये की डीड वैल्यू और 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की अनुमानित बाजार कीमत वाली संपत्तियों को निशाना बनाया गया था.

ED के मुताबिक, जांच रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की ओर से दर्ज FIR से शुरू हुई.

एजेंसी के अनुसार, कारोबारी अनवर ढेबर और पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा के नेतृत्व वाले कथित शराब सिंडिकेट ने 2019 से 2023 के बीच राज्य की आबकारी व्यवस्था में कथित तौर पर हेरफेर किया.

ED का दावा है कि इस नेटवर्क ने शराब की खरीद की बढ़ी हुई कीमतों, बिना हिसाब वाली शराब के अवैध उत्पादन और चुनिंदा संस्थाओं को दिए गए FL-10A लाइसेंस के जरिए कमीशन से 2,883 करोड़ रुपये से ज्यादा की अपराध से हुई कमाई जुटाई.

पहले अटैचमेंट ऑर्डर में विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी संपत्तियों को शामिल किया गया है.

जांचकर्ताओं का आरोप है कि अग्रवाल ने अहम वित्तीय भूमिका निभाई. वह डिस्टिलरी और लाइसेंस धारकों से कमीशन इकट्ठा करता था और रकम ढेबर तक पहुंचाता था.

ED ने अग्रवाल की कथित अवैध कमाई के बराबर उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों को भी अटैच किया है.

ED ने ढेबर से जुड़ी कई बेनामी संपत्तियां भी अटैच की हैं. इनमें रायपुर के ढेबर सिटी होम्स में प्लॉट और शाइनिंग स्टार बिल्डकॉन, मूनलाइट रियल एस्टेट, स्वर्ण इंफ्राबिल्ड और जय गुरुदेव इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी शेल कंपनियों के जरिए रखी गई कई जमीनें शामिल हैं. इस अटैचमेंट के तहत संपत्तियों की कुल कीमत करीब 30 करोड़ रुपये आंकी गई है.

दूसरे अटैचमेंट में ED ने प्रीमियम होटल संपत्ति होटल वेस्टिन गोवा को निशाना बनाया है. यह होटल उत्तरी गोवा के अंजुना में स्थित है. यह संपत्ति Pacifica Hotels India Private Limited के नाम पर दर्ज है, जिसके निदेशकों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं.

एजेंसी का आरोप है कि करीब 110 करोड़ रुपये की अपराध से हुई कमाई से होटल पूरी तरह खरीदा गया था. यह रकम कथित तौर पर शराब घोटाले से मिली बिना हिसाब वाली नकदी थी और चैतन्य बघेल के कहने पर इसे पहुंचाया गया था.

तीसरे अटैचमेंट में वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं. इनमें बैंक खाते, शेयर और तीन FL-10A लाइसेंसधारी कंपनियों—Om Sai Beverages Pvt Ltd, Dishita Ventures Pvt Ltd और Nexgen Power Engitech Pvt Ltd—के म्यूचुअल फंड शामिल हैं.

ED के मुताबिक, इन कंपनियों को सिंडिकेट को अपने मुनाफे का 50-60 प्रतिशत हिस्सा देने के लिए मजबूर किया गया था. यह रकम करीब 51 करोड़ रुपये थी.

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