नई दिल्ली: राज्य में सरकारी नौकरी पाने की कोशिश कर रहे हज़ारों युवाओं के लिए झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (JSSC-CGL) परीक्षा उनकी तैयारी की परीक्षा होनी थी, लेकिन इसके बजाय यह भरोसे की परीक्षा बन गई. पेपर लीक, नकल और परीक्षा रद्द होने के कई आरोपों के बाद यह कुछ समय में झारखंड में सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है.
रविवार को छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ छह घंटे चली लंबी बैठक के बाद झारखंड सरकार ने कहा था कि वह छात्रों की ज्यादातर मांगों पर सहमत हो गई है. इसमें तीन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग और 14वीं JPSC कंबाइंड सिविल सर्विसेज एग्जाम (CSE) में ईडी जांच की संभावना भी शामिल थी.
हालांकि, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि वे तब तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे, जब तक JSSC-CGL परीक्षा का रिजल्ट रद्द नहीं किया जाता और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया जाता.
JSSC-CGL परीक्षा असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर, जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट, लेबर एनफोर्समेंट ऑफिसर, प्लानिंग असिस्टेंट, ब्लॉक वेलफेयर ऑफिसर, ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर, सर्किल इंस्पेक्टर-कम-कानूनगो और जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट (आरक्षित वर्ग) के पदों के लिए कराई गई थी.
JSSC ने 3 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों में से 2,025 पदों को भरने के लिए 2,231 उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए चुना था. पेपर लीक के कारण एक बार परीक्षा रद्द होने के बाद सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा कराई गई थी. दोबारा हुई परीक्षा में भी पेपर लीक, नकल और दूसरी गड़बड़ियों के बड़े आरोप लगे.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने परीक्षा की CBI जांच की मांग की है. उनका कहना है कि JSSC परीक्षा में हुई सीआईडी जांच के बाद उन्हें CID पर भरोसा नहीं है.
प्रदर्शन की कोर कमेटी के सदस्य अंकित कुमार ने दिप्रिंट से कहा, “हम CID पर भरोसा क्यों करें? वह अक्सर राज्य सरकार के दबाव में काम करती है. हमें उससे कोई पूर्वाग्रह नहीं है…लेकिन CID ने खुद दिखाया है कि वह पक्षपाती है.”
रविवार की बैठक के बाद झारखंड के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने मीडिया से कहा कि छात्रों ने JSSC-CGL परीक्षा को भी रद्द करने की मांग की थी, लेकिन सरकार के पास परीक्षा रद्द करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि कोर्ट जांच की निगरानी कर रहा है. सरकार ने इस जांच की निगरानी के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाने का प्रस्ताव दिया. हालांकि, छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया.
JSSC-CGL परीक्षा से जुड़े पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों के आरोपों में एफआईआर झारखंड हाई कोर्ट के दखल के बाद ही दर्ज की गई थी. दिसंबर 2025 में कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद रिजल्ट घोषित किया गया था. कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने या इसकी CBI जांच का आदेश देने से भी इनकार कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ दायर अपील को सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जनवरी में खारिज कर दिया.
इस मामले में SIT की जांच अभी भी चल रही है. CID ने पिछले साल इस मामले में दो चार्जशीट दाखिल की थीं.
परीक्षा क्या है, क्या आरोप लगे और कोर्ट ने क्या कहा? दिप्रिंट आपको यहां समझा रहा है.
परीक्षा
JSSC ने JGGLCCE-2023 (रेगुलर) के लिए विज्ञापन जारी किया था. इसमें असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर, जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट, लेबर एनफोर्समेंट ऑफिसर, प्लानिंग असिस्टेंट, ब्लॉक वेलफेयर ऑफिसर, ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर और सर्किल इंस्पेक्टर-कम-कानूनगो के पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे. करीब 6,40,000 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था.
इसके अलावा, JSSC ने JGGLCCE-2023 (बैकलॉग) के लिए एक और विज्ञापन जारी किया था. इसमें जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट (आरक्षित वर्ग) के पद के लिए मंजूर खाली पदों पर ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे. विज्ञापन में कहा गया था कि दोनों विज्ञापनों के लिए सिर्फ एक परीक्षा कराई जाएगी. इसे ‘झारखंड जनरल ग्रेजुएट लेवल कंबाइंड कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन-2023 (रेगुलर एंड बैकलॉग)’ कहा जाना था.
शुरुआत में परीक्षा 28 जनवरी 2024 और 4 फरवरी 2024 को होनी थी, लेकिन पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई. इसके बाद नई तारीखों की घोषणा की गई और सितंबर 2024 में परीक्षा कराई गई.
इन तारीखों पर झारखंड के पूरे राज्य में सभी मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों की मोबाइल इंटरनेट, मोबाइल डेटा और मोबाइल वाई-फाई सेवाएं बंद कर दी गई थीं.
रांची के अलग-अलग कोचिंग संस्थानों के शिक्षकों और अभिभावकों समेत 1,000 से ज्यादा याचिकाकर्ताओं ने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया. उन्होंने परीक्षा में बड़े स्तर पर पेपर लीक और नकल के आरोप लगाए.
आरोप
कई उम्मीदवारों ने JSSC और पुलिस को पेपर लीक की घटनाओं की जानकारी दी थी. उदाहरण के लिए बलियापुर परीक्षा केंद्र पर रामचंद्र मंडल ने एक व्यक्ति को देखा था, जो संभवत: एस्पिरेंट था. वह अपने मोबाइल फोन पर किसी से बात कर रहा था और एक कागज़ पर उत्तर लिख रहा था. मंडल ने अपने मोबाइल फोन से उस कागज़ की तस्वीर ले ली. परीक्षा के बाद उन्होंने पाया कि उस कागज़ पर परीक्षा में पूछे गए सवालों के उत्तर लिखे थे.
इसी तरह, ‘एग्जाम फाइटर कोचिंग सेंटर’ के एक छात्र ने अधिकारियों को बताया था कि पांच छात्र प्रश्नपत्र याद करने के लिए बिहार गए थे. एक अन्य छात्र ने आरोप लगाया कि उसे टेलीग्राम ऐप पर दो तस्वीरें मिली थीं, जिनमें परीक्षा के प्रश्नपत्र के कुछ सवालों के उत्तर थे.
इन सभी आरोपों के साथ तस्वीरें और वीडियो भी दिए गए थे. इससे संकेत मिलता था कि परीक्षा शुरू होने से काफी पहले ही पेपर लीक हो गया था, जिससे कुछ छात्रों को गलत तरीके से फायदा मिला. हालांकि, छात्र परीक्षा शुरू होने से पहले अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दे सके, क्योंकि पूरे राज्य में इंटरनेट बंद था.
पेपर लीक के अलावा, परीक्षा में बड़े पैमाने पर नकल के भी आरोप लगे थे. इसमें छात्रों ने अपनी जगह परीक्षा देने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति को भेजा था.
छात्रों ने आगे आरोप लगाया था कि परीक्षा के दो से तीन दिन पहले पश्चिम बंगाल के आसनसोल के एक होटल, पश्चिम बंगाल के नियामतपुर के एक बैंक्वेट हॉल, बिहार के मुजफ्फरपुर, रांची, मांडू, दिल्ली और यहां तक कि नेपाल के काठमांडू में प्रश्नपत्र और उत्तर लीक हुए थे. आरोप था कि इन जगहों पर उम्मीदवारों के कुछ चुने हुए समूहों को परीक्षा की तैयारी कराई गई थी.
‘SIT को पेपर लीक नहीं मिला’
झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया था कि एक विशेष जांच टीम (SIT) ने पेपर लीक के सभी आरोपों की जांच की थी. इसके लिए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच की गई और मुख्य गवाहों से पूछताछ की गई.
हालांकि, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि अब तक पेपर लीक होने का कोई संबंधित सबूत नहीं मिला है.
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि चार गवाहों से जब्त किए गए मोबाइल फोन से कुल 187 उत्तर मिले थे. इनमें से केवल 66 उत्तर JSSC-CGL परीक्षा में पूछे गए सवालों से मेल खाते थे. सरकार ने कोर्ट को बताया कि परीक्षा में राज्य और केंद्र स्तर पर पहले हुई भर्ती परीक्षाओं के कई सवाल दोबारा पूछे गए थे.
राज्य ने कोर्ट को यह भी बताया कि यह कुछ ठगों द्वारा की गई धोखाधड़ी का मामला था. इन ठगों ने कुछ उम्मीदवारों को यह भरोसा दिलाया था कि उनके पास प्रश्नपत्र हैं और अगर उम्मीदवार उनसे संपर्क करेंगे तो उन्हें सवालों के जवाब दिए जाएंगे. राज्य ने कहा कि इन “ठगों” ने पिछली प्रतियोगी परीक्षाओं के सवालों के आधार पर केवल अनुमान लगाए थे.
हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार, SIT को गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले थे कि वे छात्रों से पैसे वसूल रहे थे और दावा कर रहे थे कि वे उन्हें JSSC-CGL परीक्षा के प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराएंगे. लेकिन किसी संगठित तरीके से असली पेपर लीक होने का कोई सबूत नहीं मिला था.
विरोधाभासी बातें
याचिकाकर्ताओं ने बताया था कि मई और जून 2025 में CID की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामों में कहा गया था कि परीक्षा खत्म होने के बाद पैसे का लेन-देन हुआ था और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र तक पहुंच दिलाने की बात थी. हालांकि, CID ने अपने हलफनामे में जिन सफल उम्मीदवारों के नाम बताए थे, उनमें से किसी के खिलाफ न तो चार्जशीट दाखिल की गई और न ही उन्हें गवाह के तौर पर जांचा गया.
इन जवाबी हलफनामों में कहा गया था कि आरोपियों के मोबाइल फोन में 28 उम्मीदवारों के नाम मिले थे. इन 28 उम्मीदवारों में से 10 परीक्षा में पास हुए थे. इनमें से कुछ उम्मीदवारों ने आरोपियों को पैसे भी दिए थे.
उन्होंने कथित तौर पर यह भी बताया था कि इन 28 उम्मीदवारों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण के अनुसार, 15 उम्मीदवारों के मोबाइल फोन की लोकेशन बीरगंज (नेपाल) या रक्सौल या मोतिहारी (बिहार) में मिली थी. जवाबी हलफनामे में कहा गया था कि किसी भी उम्मीदवार को प्रश्नपत्र नहीं दिया गया था. इसके बजाय उन्हें पांच से छह हाथ से लिखे पन्नों पर लिखे सवाल और उत्तर दिए गए थे और उन्हें इन्हें याद करने के लिए कहा गया था.
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि SIT की संरचना को बिना किसी कारण और न्यायिक आदेश के तीन बार बदला गया था. उन्होंने यह भी कहा कि CID ने 2025 में मामले में प्रगति दिखाते हुए अपने जवाबी हलफनामे दाखिल किए थे, जिसके बाद भी SIT को बदल दिया गया था. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जून और सितंबर 2025 में CID की ओर से दाखिल चार्जशीट ने भी इन बातों की पुष्टि की थी, लेकिन राज्य सरकार ने जांच टीम को बदल दिया.
हालांकि, कोर्ट ने माना कि CID ने कभी यह नहीं कहा था कि पेपर लीक हुआ था. कोर्ट ने माना कि SIT की रिपोर्ट और CID की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामों के बीच कोई विरोधाभास नहीं था.
HC ने FIR दर्ज करने का निर्देश दिया
याचिकाकर्ताओं ने अपने आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं किए जाने का भी दावा किया था. उनका कहना था कि प्रश्नपत्र लीक कराने और परीक्षा में अलग-अलग गलत तरीकों से नकल कराने के लिए JSSC के अधिकारियों, कर्मचारियों, कुछ एजेंसियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बीच अच्छी तरह से बनाई गई साजिश थी.
याचिकाकर्ताओं ने शुरुआत में यह भी मांग की थी कि परीक्षा का अंतिम रिजल्ट जारी न किया जाए और मामले की जांच पूरी होने तक परीक्षा के आधार पर नौकरियां न दी जाएं.
हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को एक आदेश दिया था, जिसमें दो तरह की राहत दी गई थी—JSSC को अगले आदेश तक रिजल्ट घोषित नहीं करने का निर्देश और याचिकाकर्ताओं की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश.
कोर्ट ने कहा था, “जब परीक्षा में कथित पेपर लीक जैसा गंभीर मामला हो और पिछले तीन महीनों से एफआईआर दर्ज करने और जांच करने में जवाब देने वालों की ओर से कोई उचित कारण नहीं बताया गया हो, तो अगर परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया जाता है और अब जवाब देने वालों की ओर से नियुक्तियां कर दी जाती हैं, तो इससे तीसरे पक्ष के हित पैदा होंगे और गंभीर नुकसान होगा.”
इस आदेश के बाद जनवरी 2025 में एफआईआर दर्ज की गईं. इसके कई महीने बाद अगस्त 2025 में एक विशेष जांच टीम (SIT) भी बनाई गई.
कोर्ट ने सीबीआई जांच से इनकार किया
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि परीक्षा की जांच के लिए बनाई गई SIT को राज्य सरकार ने बिना पारदर्शिता या न्यायिक मंजूरी के बार-बार अपनी मर्जी से बनाया और फिर बदला. उन्होंने कहा था कि जांच व्यवस्था में इस तरह मनमाने तरीके से बदलाव करने से जांच की विश्वसनीयता और लगातार चलने की क्षमता दोनों खत्म हुई हैं. इससे निष्पक्ष जांच का उद्देश्य भी खत्म हो गया. इसलिए याचिकाकर्ताओं ने CBI जांच की मांग की थी.
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि SIT की जांच से छेड़छाड़ हुई है, लेकिन वे इस दावे को साबित नहीं कर पाए. इसलिए कोर्ट ने मामले को CBI को सौंपने से इनकार कर दिया.
इसके बाद कोर्ट ने JSSC को परीक्षा का अंतिम रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया और राज्य सरकार को सफल उम्मीदवारों को उनके संबंधित पदों पर नियुक्त करने का निर्देश दिया. SIT को मामले की जांच फैसले के छह महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया.
कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन 28 एस्पिरेंट्स को कथित तौर पर सवाल और उत्तर रटने के लिए नेपाल ले जाया गया था, उनमें से 10 को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था. कोर्ट ने कहा कि इन 10 उम्मीदवारों का रिजल्ट SIT की जांच पूरी होने तक रोककर रखा जाएगा और उनका चयन जांच के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगा.
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जांच में और सफल उम्मीदवारों के परीक्षा में गलत तरीके अपनाने में शामिल होने की बात सामने आती है, तो राज्य उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा.
सभी नियुक्तियां जांच के नतीजे पर निर्भर
झारखंड हाई कोर्ट के 3 दिसंबर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. हालांकि, कोर्ट ने 5 जनवरी को इन याचिकाओं को खारिज कर दिया.
याचिकाओं को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि अब तक जारी किए गए सभी नियुक्ति पत्र और आगे जारी किए जाने वाले नियुक्ति पत्र सभी आपराधिक मामलों की अंतिम सुनवाई और नतीजे पर निर्भर होंगे.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने अपने आदेश में कहा, “राज्य सरकार उचित कदम उठाएगी ताकि नियुक्ति पत्रों में इसका उल्लेख किया जा सके.”
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