नई दिल्ली: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के अध्यक्ष पद से गड़बड़ियों के आरोपों के बीच इस्तीफा देने वाले रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एल. खियांग्ते को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया. अधिकारियों ने बताया कि “दोष साबित करने वाला सबूत” सामने आया है कि 14वीं JPSC परीक्षा कराने का ठेका एक कंपनी को रिश्वत के बदले दिया गया था.
खियांग्ते अक्टूबर 2024 में रिटायर होने तक राज्य के मुख्य सचिव भी रहे थे. उन्हें फरवरी 2025 में JPSC का अध्यक्ष बनाया गया था. सोमवार को झारखंड अपराध जांच विभाग (CID) ने उन्हें गिरफ्तार किया. इसी दौरान रांची में दो हफ्ते से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे छात्र विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे.
छात्र JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) जैसी परीक्षा कराने वाली संस्थाओं में कथित बड़े स्तर की गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. वे टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) की ओर से कराई गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने और कथित गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग कर रहे हैं.
जब छात्रों ने बैरिकेड तोड़ दिए और झारखंड विधानसभा परिसर के पास पहुंच गए, तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. दोपहर में विधानसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई.
1988 बैच के झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी खियांगते ने 22 जुलाई को JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था. उसी दिन CID ने JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए मामला दर्ज किया था.
राज्य की जांच एजेंसी ने रांची में उनके घर और कार्यालय पर छापेमारी की थी. इसके बाद से उनसे कम से कम चार बार पूछताछ की जा चुकी है.
झारखंड पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा, “उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और साफ तौर पर दोष साबित करने वाले सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि संबंधित कंपनी TDPL से रिश्वत की मांग की गई थी.”
उन्होंने उनके खिलाफ लगाए गए किसी खास आरोप की जानकारी देने से इनकार कर दिया.
खियांग्ते की गिरफ्तारी से एक दिन पहले रांची के एक न्यूज पोर्टल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि खियांगते और TDPL के बीच 2 करोड़ रुपये की रिश्वत और कुल बिल की रकम का 20 प्रतिशत देने को लेकर समझौता हुआ था.
एक अन्य अधिकारी ने कहा, “मामले की जांच चल रही है. कंपनी को कुछ नियमों और शर्तों के आधार पर काम का आदेश दिया गया था, जो भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आता है.”
दिप्रिंट ने पिछले हफ्ते रिपोर्ट किया था कि TDPL को 14वीं JPSC परीक्षा के लिए पूरी परीक्षा कराने का ठेका दिया गया था, जबकि कंपनी ने टेंडर के लिए आवेदन तक नहीं किया था. इसके बजाय उसे इस काम के लिए सीधे नामित किया गया था.
पिछले हफ्ते की शुरुआत में राज्य CID ने धर्मेंद्र कुमार नाम के एक कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार किया था. वह खियांग्ते के घर में बने कार्यालय में काम करता था. जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुमार की पहचान खियांग्ते और JPSC परीक्षा घोटाले के कथित मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी के बीच संपर्क की मुख्य कड़ी के रूप में हुई है.
गिरफ्तारी के समय तिवारी राज्य के गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर तैनात था. उसने सितंबर 2024 में JSSC CGL परीक्षा पास की थी.
रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार से परीक्षा रद्द करने और कथित सिंडिकेट के खिलाफ पूरी जांच कराने की भी मांग की है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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