रांची: पहला बैरिकेड टिक नहीं पाया. सोमवार को हज़ारों छात्र झारखंड विधानसभा की ओर बढ़े. पुलिस लाउडस्पीकर से बार-बार उनसे बैठने और शांति बनाए रखने की अपील करती रही.
पुलिस ने ऐलान किया, “आप हमारे भाई-बहन हैं, शांति बनाए रखें”, लेकिन भीड़ आगे बढ़ती गई, पहले भारी बैरिकेड को तोड़ दिया और विधानसभा की ओर आगे बढ़ती रही. इसके बाद पुलिस ने उन्हें पीछे धकेलने के लिए लाठियों का इस्तेमाल किया.
एक महिला प्रदर्शनकारी ने हंगामे के बीच चिल्लाकर कहा, “हम शांतिपूर्ण हैं. हम अपने अधिकारों के लिए यहां हैं. शांतिपूर्ण प्रदर्शन हमारा अधिकार है.” इसके बाद वह भी भीड़ के साथ नारा लगाने लगी: “झारखंड छीनकर मांगा है, अब अधिकार छीनकर मांगेंगे.”
रविवार को रांची में छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी बैठक के बाद झारखंड सरकार ने कहा कि वह उनकी “98 प्रतिशत” मांगों पर सहमत हो गई है. इसमें 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में ईडी जांच की संभावना भी शामिल है. हालांकि, सरकार JSSC संयुक्त स्नातक स्तर (CGL) परीक्षा रद्द करने या सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग पर सहमत नहीं हुई.

छात्रों ने सुबह करीब 10 बजे पुराने विधानसभा भवन से मार्च शुरू किया था और करीब 3 किलोमीटर चलने के बाद सुरक्षा बलों ने उन्हें विधानसभा से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर रोक दिया. रास्ते में बैरिकेड की कई परतें लगाई गई थीं. बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए थे और आंसू गैस के इंतज़ाम भी किए गए थे.
टकराव उस समय हुआ जब हज़ारों प्रदर्शनकारी सड़क पर डटे रहे, नारे लगाते रहे और वहां से हटने से इनकार कर दिया. पुलिस अधिकारी छात्रों से बातचीत करते रहे और उनसे कहा कि वे तय प्रदर्शन स्थल पर बैठें और वहीं अपना आंदोलन जारी रखें, विधानसभा की ओर आगे न बढ़ें.
भीड़ में मौजूद कई लोगों के लिए सिर्फ रांची पहुंचना ही एक संघर्ष था. हजारीबाग, धनबाद, बोकारो और दूसरे जिलों से छात्र रातभर ट्रेन, ऑटो और मोटरसाइकिल से यात्रा करके मार्च में शामिल होने पहुंचे. पुलिस कई सीमा क्षेत्रों पर तैनात थी और बताया गया कि छात्रों को राजधानी की ओर जाने से रोका गया.

‘छात्रों को रोका नहीं जा सकता’
24 साल के दुर्गेश कुमार ने बताया कि रविवार रात रांची जाते समय उनकी कार को रोक दिया गया था. बाद में वह एक ओमनी वैन से शहर में पहुंचने में सफल रहे.
उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझे और मेरे दोस्तों को रोक दिया था, लेकिन मैं आने में सफल रहा. हमारे जैसे हजारों लोगों को रोका गया. लेकिन भीड़ को देखिए. इन छात्रों को रोका नहीं जा सकता.”
प्रदर्शन के दौरान एक भावुक पल भी देखने को मिला. कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो वहां पहुंचे और भीड़ ने उन्हें ऊपर उठा लिया. उनके हाथ में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आंदोलन के नेता शिबू सोरेन की तस्वीर थी, जिनका हाल ही में निधन हुआ है.

महतो ने कहा, “गुरुजी शिबू सोरेन ने पूरी ज़िंदगी संघर्ष किया, उन्होंने पूरी ज़िंदगी आंदोलनों का नेतृत्व किया. अगर वह जिंदा होते, तो हमारे प्रदर्शन में शामिल होते. गुरुजी अब हमारे साथ नहीं हैं. इस प्रदर्शन में हमारे साथ उनकी तस्वीर है.”
महतो ने कहा कि वह ठीक से चल नहीं पा रहे थे, फिर भी पुलिस के साथ टकराव की संभावना के बावजूद वह यहां आए थे.
उन्होंने कहा, “मैं अपनी जान जोखिम में डालकर यहां आया हूं. मैं चल नहीं सकता. किसी भी समय पुलिस के साथ झड़प हो सकती है, भगदड़ मच सकती है. मुझे पता है कि मैं भाग नहीं सकता. वे आंसू गैस के गोले छोड़ सकते हैं. सरकार जब तक हमारी बात नहीं सुनती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा.”
सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जन्मदिन है. एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि छात्रों का इरादा प्रदर्शन स्थल पर मुख्यमंत्री का केक काटने का भी था.
प्रदर्शनकारी ने कहा, “उन्हें हमारी मांगें मान लेनी चाहिए और हमें पार्टी देनी चाहिए.”

रांची सिटी एसपी पारस राणा ने कहा कि पुलिस मार्च के लिए पहले से तैयारी कर रही थी और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही थी कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे.
राणा ने कहा, “छात्रों ने कहा है कि मार्च शांतिपूर्ण रहेगा और हम भी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि यह शांतिपूर्ण रहे. हमने इसके लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए हैं.”
उन्होंने कहा कि छात्रों को तय जगह से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और उस जगह तक किसी तरह के बल का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.
उन्होंने कहा, “उस जगह तक कंटीले तार नहीं लगाए गए हैं.”
प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिला. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम कुमार महतो ने कहा कि विपक्षी पार्टियां स्वाभाविक रूप से कुछ समर्थन देंगी, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन छात्रों का है.
महतो ने कहा, “छात्र परेशान हैं. यह उनका प्रदर्शन है. अगर उनकी मांगें पूरी हो जाती हैं, तो वे प्रदर्शन नहीं करेंगे.”
उन्होंने यह भी कहा कि वह ‘विधानसभा घेराव’ मार्च में शामिल होंगे.
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