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Tuesday, 11 August, 2026
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शिक्षा मंत्रालय में फिर बड़ा बदलाव, हायर एजुकेशन सेक्रेटरी को नियुक्ति के 17 दिन बाद बदला गया

1993 बैच की IAS अधिकारी दीप्ति गौर मुखर्जी ने नरेश पाल गंगवार की जगह ली, गंगवार को 23 जुलाई को राजधानी के जंतर-मंतर पर छात्रों के पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के चरम के दौरान सचिव नियुक्त किया गया था.

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार देर रात 23 जुलाई के अपने आदेश में आंशिक बदलाव करते हुए कॉरपोरेट मामलों की सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया. 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी मुखर्जी ने नरेश पाल गंगवार की जगह ली है. गंगवार की नियुक्ति के सिर्फ 17 दिन बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया है.

उच्च शिक्षा विभाग नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की निगरानी करता है. एनटीए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (अंडरग्रेजुएट) यानी नीट-यूजी कराता है. 3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा के बाद यह एजेंसी विवादों में आ गई थी, क्योंकि पेपर लीक होने की शिकायतों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी.

हालांकि, छह अन्य सचिव स्तर के अधिकारियों में बदलाव की घोषणा करने वाले कैबिनेट की नियुक्ति समिति के आदेश में गंगवार की नई पोस्टिंग के बारे में कुछ नहीं बताया गया है. गंगवार 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी हैं.

गंगवार को 23 जुलाई की देर रात उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया था. उन्होंने 1992 बैच के मणिपुर कैडर के आईएएस अधिकारी विनीत जोशी की जगह ली थी. यह नियुक्ति राजधानी के जंतर-मंतर पर छात्रों के पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के चरम के दौरान हुई थी. जोशी को उस समय शिक्षा मंत्रालय से हटा दिया गया था, जब पुलिस ने संसद की ओर मार्च कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और लाठियां चलाई थीं. छात्र तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नीट-यूजी पेपर लीक मामले में इस्तीफा मांग रहे थे. पुलिस की इस कार्रवाई के सिर्फ तीन दिन बाद जोशी को हटा दिया गया था.

आखिरकार 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. तब तक जेन ज़ी का प्रदर्शन जारी था और सरकार पर जिम्मेदारी तय करने का दबाव बढ़ता जा रहा था.

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने दिप्रिंट को बताया कि यह तबादला एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी क्योंकि सोमवार को छह अन्य सचिवों का भी तबादला/नियुक्ति की गई थी. हालांकि, 23 जुलाई को गंगवार की नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया पर काफी विरोध हुआ था. यह विरोध इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के हवाले से था, जिसमें बताया गया था कि उनकी पत्नी और बेटे को कथित तौर पर नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की योजना के तहत सरकार से 1.16 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी मिली थी.

कम्युनिस्ट नेता जॉन ब्रिटास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यह सबसे बड़ा मजाक है! जब देश परीक्षा घोटालों और पेपर लीक के लिए जवाबदेही की मांग कर रहा है, तब सरकार नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त करती है! यही वह आईएएस अधिकारी हैं, जिनकी मां, पत्नी और बेटे को मिलाकर नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की योजना के तहत ‘व्यावसायिक फसलों को बढ़ावा देने’ (खीरे की खेती) के लिए सरकार से 1.16 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी मिली है. क्या इसी तरह प्रधानमंत्री जवाबदेही सुनिश्चित कर रहे हैं..”

बढ़ता दबाव

उच्च शिक्षा सचिव बनाए जाने से पहले गंगवार पशुपालन और डेयरी विभाग में सचिव थे. आदेश के बावजूद जोशी को शिक्षा मंत्रालय से नहीं हटाया गया और वह उच्च शिक्षा सचिव के तौर पर काम करते रहे.

गंगवार के अलावा, केंद्र ने 24 जुलाई को ग्रामीण विकास विभाग में अतिरिक्त सचिव टी. के. अनिल कुमार को स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग का सचिव नियुक्त किया था. यह शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाला दूसरा विभाग है.

उस समय तक जोशी उच्च शिक्षा और स्कूल शिक्षा, दोनों विभागों का काम संभाल रहे थे. ऐसा इसलिए था क्योंकि स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव संजय कुमार, जो बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी थे, 1 जुलाई को रिटायर हो गए थे. जोशी को पंचायती राज मंत्रालय में भेज दिया गया था.

6 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा के लिए करीब 22.7 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. पेपर लीक के बाद मामला सीबीआई के पास गया, जिसने कई राज्यों में गिरफ्तारियां की हैं. 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई. इसके नतीजे 16 जुलाई को घोषित किए गए.

पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन इसके तुरंत बाद शुरू हो गया. इसका नेतृत्व नई बनी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया. सीजेपी का प्रदर्शन तब और तेज हो गया, जब पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 28 जून को भूख हड़ताल शुरू की.

बढ़ते प्रदर्शनों के बीच सरकार को कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा. भारत की परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के तरीके देखने के लिए Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स बनाई गई.

सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में भी बदलाव किए. इसके जरिए कानून को और सख्त बनाया गया और पेपर लीक विरोधी कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू करने का प्रावधान किया गया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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