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Monday, 19 October, 2026
होमदेशJPSC पेपर लीक में 20 अरेस्ट, ‘मास्टरमाइंड’ ने परीक्षा कंपनी के निदेशकों का होटल बिल चुकाया: CID का दावा

JPSC पेपर लीक में 20 अरेस्ट, ‘मास्टरमाइंड’ ने परीक्षा कंपनी के निदेशकों का होटल बिल चुकाया: CID का दावा

CID ने एक स्पेशल कोर्ट के सामने ये बातें तब कहीं जब कोर्ट 'मास्टरमाइंड' अभय कुमार तिवारी की ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई कर रही थी; कोर्ट ने उनकी अर्ज़ी खारिज कर दी.

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नई दिल्ली: झारखंड सरकार के कर्मचारी अभय कुमार तिवारी, जिन्हें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा पेपर लीक का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, ने परीक्षा कराने वाली कंपनी के निदेशकों के पांच सितारा होटल में ठहरने का खर्च अपने UPI अकाउंट से चुकाया था. राज्य CID की जांच में यह बात सामने आई है.

रांची के रेडिसन ब्लू होटल में ठहरने के लिए किए गए इन भुगतानों से तिवारी और टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के निदेशकों के बीच करीबी निजी संबंध का पता चलता है. TDPL को JPSC परीक्षा के 14वें संस्करण के आयोजन की जिम्मेदारी दी गई थी.

CID ने बुधवार को एक विशेष CID अदालत के सामने ये बातें रखीं. अदालत तिवारी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे उसने खारिज कर दिया.

TDPL को इससे पहले 2024 में तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया था, लेकिन बिना टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिए ही उसे परीक्षा कराने का ठेका दे दिया गया. CID ने TDPL के निदेशकों समरपाल सिंह और रणबीर सिंह पर साजिश में “सक्रिय रूप से शामिल” होने का आरोप लगाया है. एजेंसी ने कहा कि दोनों ने बड़े स्तर पर धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए एक “गुप्त सेल” चलाया.

तिवारी जुलाई में गिरफ्तार होने के समय गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) के पद पर काम कर रहा था. इसके साथ ही वह TDPL के मार्केटिंग मैनेजर और अधिकृत प्रतिनिधि के तौर पर भी काम कर रहा था. CID ने अदालत को बताया कि TDPL के ऑफिस का रेंट एग्रीमेंट तिवारी के नाम पर किया गया था.

TDPL में अहम पद पर रहते हुए तिवारी खुद कंपनी की ओर से कराई गई करीब एक दर्जन परीक्षाओं में शामिल हुआ था. राज्य CID ने कहा कि उसने अपनी “फर्जी तरीके से हुई चयन प्रक्रिया” का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया कि वह परीक्षा सिस्टम में हेरफेर कर सकता है और उम्मीदवारों को अलग-अलग चरणों में क्वालिफाई कराने के लिए 5 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक देने के लिए तैयार कर सकता है.

इस साल 14वीं JPSC परीक्षा के आयोजन में बड़े स्तर पर गड़बड़ियों के मामले में एजेंसी अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें JPSC के पूर्व अध्यक्ष लालबियाक्तलुआंगा खियांगते और परीक्षा के डिप्टी कंट्रोलर श्वेता कुमारी गुप्ता भी शामिल हैं. रांची में छात्रों के बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद जांच शुरू हुई थी.

CID के जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि उम्मीदवारों से नकद पैसे लेने वाले बुधेश्वर भगत ने कबूल किया है कि उसने इस साल की JPSC परीक्षा के लिए 24 उम्मीदवारों की जानकारी जुटाकर दी थी. इनमें से 11 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा पास की थी. CID ने कहा कि इन सभी 11 उम्मीदवारों ने 10-10 लाख रुपये दिए थे.

CID ने कहा कि तिवारी के नेतृत्व वाले सिंडिकेट की भूमिका सिर्फ प्रश्नपत्र लीक करने और परीक्षा में उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों को बैठाने तक सीमित नहीं थी. उसने OMR उत्तर पुस्तिकाओं में सीधे छेड़छाड़ करने और मूल्यांकन सिस्टम और सर्वर में डिजिटल तरीके से हेरफेर करने का भी काम किया. एजेंसी ने आरोप लगाया कि JPSC की ओर से कराई गई वन रेंज अधिकारी (FRO) परीक्षा की 350 से ज्यादा OMR शीट और सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षा की 150 से ज्यादा OMR शीट में हेरफेर की गई.

तिवारी की जमानत याचिका खारिज करते हुए जज योगेश कुमार ने आदेश में कहा कि केस डायरी में ऐसा खास सबूत मौजूद है, जिससे TDPL, JPSC परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों और उम्मीदवारों के बीच तिवारी की भूमिका एक मददगार के तौर पर सामने आती है. उन्होंने कहा, “TDPL के मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर उसकी पहचान, कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों के साथ उसके बैंक अकाउंट में दिखने वाले वित्तीय लेनदेन, TDPL के निदेशकों के खर्च का भुगतान, उम्मीदवारों के साथ उसके सीधे संपर्क से जुड़ी सामग्री और जांच के दौरान दर्ज किए गए बयान, इन सभी को एक साथ देखने पर परीक्षा में कथित हेरफेर में उसकी संलिप्तता को लेकर प्रथम दृष्टया पर्याप्त महत्वपूर्ण सामग्री सामने आती है.”

अदालत ने पिछले सप्ताह JPSC के पूर्व अध्यक्ष खियांगते की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी. एजेंसी ने अपनी जांच के अहम निष्कर्ष अदालत के सामने रखे थे. खियांगते की याचिका के जवाब में CID ने कहा कि परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने TDPL पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने बताया था कि एक अन्य राज्य संस्था, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने TDPL को ब्लैकलिस्ट किया हुआ था.

CID ने अदालत को बताया कि शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय खियांगते ने किस्पोट्टा से परीक्षा से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां ले लीं और उन्हें गुप्ता को सौंप दिया. गुप्ता का ट्रांसफर हो जाने के बाद भी वह परीक्षा से जुड़ा काम संभालती रही.

एजेंसी ने खियांगते पर सबूत नष्ट करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया. CID ने कहा कि JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने अपने ऑफिस का लैपटॉप और पेन ड्राइव हटा लिया और उनकी स्टोरेज को डिलीट या खरोंचकर खराब कर दिया. फोरेंसिक जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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