news on theprint
मुख्य आरोपी योगेश राज की फाइल फ़ोटो | ट्विटर
Text Size:
  • 86
    Shares

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भीड़ के हमले के चलते पुलिस इंस्पेक्टर की मौत के मामले में मंगलवार को चार लोगों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने चार को हिरासत में भी लिया है. प्राथमिकी में बजरंग दल के एक वरिष्ठ नेता योगेश राज को भी नामजद किया गया है, जिन्होंने इससे पहले गोहत्या का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी. पुलिस ने योगेश राज को मुख्य अभियुक्त बनाया है.

मामले में दो एफआईआर दर्ज हुई है. दिप्रिंट को प्राप्त दोनों एफआईआर की कॉपी प्राप्त हुई है. इसके मुताबिक, एक एफआईआर योगेश राज की ओर से दर्ज कराई गई थी जिसमें सात लोगों पर गोकशी का आरोप लगाया गया है. दूसरी एफआईआर उपद्रव करने, भीड़ को उकसाने और इंस्पेक्टर की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के बारे में दर्ज की गई है.

प्राथमिकी (एफआईआर) के अनुसार, 27 लोगों को नामजद किया गया है जबकि सोमवार की घटना में 60 लोगों को अज्ञात के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. सोमवार को गोकशी के शक में उग्र हुई भीड़ हमले में एक इंस्पेक्टर सहित दो मौतें हुई थीं. इसमें पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई थी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की कार्रवाई में एक युवक की भी मौत हो गई थी.


यह भी पढ़ें: अखलाक मामले में जांच अधिकारी रह चुके इंस्पेक्टर की भीड़ की हिंसा में मौत


पुलिस जब भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही थी, तभी इंस्पेक्टर एसके सिंह को सिर में गोली मार दी गई थी, जबकि एक युवक भी मारा गया.

भीड़ द्वारा यह हमला गोहत्या की अफवाह फैलने के बाद किया गया. स्याना के स्टेशन हाउस ऑफिसर, जिन्होंने 2015 में गौहत्या से संबंधित दादरी हत्या मामले में एक मुस्लिम शख्स को निशाना बनाए जाने की जांच की थी भीड़ ने उन्हें सामने से गोली मार दी. बुलंदशहर में तनावपूर्ण स्थिति के चलते बड़े पैमाने पर सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है.

एफआईआर में लिखा गया है कि विरोध कर रहे लोगों को प्रशासन द्वारा काफी समझाया बुझाया गया, थाने आकर एफआईआर की कॉपी लेने को कहा गया. उन्हें कड़ी कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन वे नहीं माने और पथराव कर दिया.

‘इसके बाद योगेश राज आदि लोगों के नेतृत्व में चौकी चिंगरावठी के सामने उपद्रव करने लगे. एसडीएम के द्वारा समझाने के बावजूद भीड़ उग्र हो गई. भीड़ को नामित उपरोक्त व्यक्ति भीड़ को हिंसा के लिए भड़काते रहे, जिससे भीड़ में शामिल लोगों ने अवैध असलहोंं, धारदार हथियारों और लाठी डंडों से पुलिस पर हमला कर दिया.’


यह भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गोकशी के शक में बवाल, युवक और इंस्पेक्टर की मौत


एफआईआर के मुताबिक, भीड़ ने हिंसा के दौरान वाहनों में आग लगाई, पथराव किया और पुलिस का वाहन और चौकी जला दी. इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को चोट लगने के ​बाद अस्पताल ले जाने की कोशिश हुई तो भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया. बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. भीड़ ने पुलिस की पिस्टल और मोबाइल भी छीन लिए.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सुबोध कुमार की बहन ने मीडिया से कहा, ‘मेरा भाई अखलाक मामले में जांच अधिकारी था इ​सलिए उसे मार दिया गया. यह पुलिस का षडयंत्र था. उन्हें शहीद घोषित किया जाए और उनके नाम का स्मारक बनवाया जाए. हमें पैसे नहीं चाहिए. मुख्यमंत्री बस गाय गाय गाय रटते रहते हैं.’ उन्होंने इस घटना पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘बुलंदशहर में जो हुआ इससे मानवता का नुकसान हुआ है. राज्य सरकार ने कहा है कि जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ बिना किसी पूर्वाग्रह के कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मैं लोगों से अपील करता हूं कि ऐसे तत्वों से सावधान रहें जो अपने फायदे के लिए अशांति फैलाते हैं.’

(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट के साथ)


  • 86
    Shares
Share Your Views

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here