श्रीनगर, 14 अगस्त (भाषा) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को केंद्र शासित प्रदेश के युवाओं से विभाजन की दर्दनाक स्मृतियों से सीख लेने, दुश्मनी और सांप्रदायिक कटुता को त्यागने तथा अतीत की गलतियों को भविष्य में दोहराने से रोकने का आह्वान किया।
श्रीनगर के टैगोर हॉल में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि विभाजन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की जीवंत स्मृति है। उन्होंने युवाओं से ‘विश्वास के पुल बनाने’ का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के युवाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि अतीत की गलतियां भविष्य में दोहराई न जाएं। जहां कभी दीवारें खड़ी की गई थीं, वहां आपको ‘विश्वास के पुल’ बनाने हैं और एक समावेशी विकसित भारत का निर्माण करना है।’’
सिन्हा ने 1947 के विभाजन के दौरान असहनीय पीड़ा झेलने वाले नागरिकों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनके बलिदान पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि विभाजन का घाव आज भी हर भारतीय की सामूहिक चेतना में मौजूद है।
उपराज्यपाल ने कहा, ‘‘विभाजन के दशकों बाद भी उनका बलिदान हमें याद दिलाता है कि वह घाव आज भी नहीं भरा है….। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हम केवल अतीत को याद नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन लाखों लोगों को आवाज दे रहे हैं, जिनकी आवाज उनसे छीन ली गई थी। मैं दृढ़ संकल्प के साथ दोहराना चाहता हूं कि हम उनके दर्द को इतिहास की धूल में दफन नहीं होने देंगे।’’
उन्होंने अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में दशकों तक भेदभाव झेलने वालों को भी श्रद्धांजलि दी और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनका कष्ट समाप्त कर उन्हें देश के अन्य नागरिकों के समान अधिकार प्रदान किए।
उन्होंने विभाजन के बाद के महीनों में कबाइलियों के आक्रमण के दौरान बलिदान देने वाले अनगिनत परिवारों को भी नमन किया। सिन्हा ने कहा कि भारतीय सेना और लोगों ने बहादुरी से मुकाबला किया तथा इन परिवारों का संघर्ष और बलिदान जम्मू-कश्मीर की सामूहिक स्मृति का अभिन्न हिस्सा है।
भाषा शोभना सुरेश
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