नई दिल्ली: 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा पहुंचने के दो साल बाद, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकी घोषित सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ ने वहां शरणार्थी (रिफ्यूजी) का दर्जा पाने के लिए आवेदन किया था. कनाडा के न्यूज नेटवर्क ग्लोबल न्यूज़ की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. रिपोर्ट में कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) की एक गोपनीय रिपोर्ट का हवाला दिया गया है.
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब के रहने वाले बराड़ ने सुनवाई में पेश नहीं होकर यह प्रक्रिया बीच में ही छोड़ दी. रिपोर्ट के मुताबिक, वह ब्रिटिश कोलंबिया की थॉम्पसन रिवर्स यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने के लिए कनाडा पहुंचा था.
CBSA की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह “पता नहीं” है कि उसने कॉलेज में कभी क्लास भी अटेंड की या नहीं. रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा की इमिग्रेशन व्यवस्था का बराड़ ने कैसे इस्तेमाल किया, इसका जिक्र CBSA ने अपनी रिपोर्ट ‘The Bishnoi Gang: An Emerging Threat in Canada’ (बिश्नोई गैंग: कनाडा में उभरता हुआ खतरा) में किया है. इस रिपोर्ट को एजेंसी ने पिछले साल दिसंबर में इमिग्रेशन अधिकारियों के बीच बांटा था, ताकि इस अपराधी गिरोह से निपटा जा सके.
लॉरेंस बिश्नोई का अब उसके करीबी बराड़ के साथ मतभेद हो गया है. भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक दोनों के बीच दूरी आ चुकी है. दिप्रिंट पहले बता चुका है कि बराड़ 2017 में स्टूडेंट वीजा पर भारत छोड़कर चला गया था. भारत में उसके खिलाफ दर्ज किए गए चारों मामलों में उसे बरी कर दिया गया था.
कनाडा की अधिकारियों ने मई 2023 में बराड़ को अपनी मोस्ट वॉन्टेड सूची में शामिल किया था, लेकिन उसी साल बाद में चुपचाप उसका नाम हटा दिया.
रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में शरणार्थी दर्जा पाने के लिए आवेदन करने के बाद बराड़ को जून 2022 में सुनवाई के लिए पेश होना था, लेकिन वह वहां नहीं पहुंचा.
बराड़ और बिश्नोई पर कनाडा में रंगदारी वसूली और चुनिंदा हत्याओं सहित एक संगठित अपराध गिरोह चलाने के आरोप हैं. इनमें जून 2023 में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर और सितंबर 2023 में गैंगस्टर सुखदूल सिंह गिल उर्फ सुखा दुनेके की हत्या भी शामिल है. निज्जर को जुलाई 2020 में व्यक्तिगत आतंकी घोषित किया गया था और वह प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का प्रमुख था. वहीं, दुनेके को बंबीहा गैंग का कथित सदस्य माना जाता था, जो बिश्नोई और बराड़ के गैंग का प्रतिद्वंद्वी था.
ग्लोबल न्यूज़ की रिपोर्ट में कहा गया है कि बराड़ ने एडमंटन और ब्रैम्पटन में स्टूडेंट वीजा पर आए भारतीय युवाओं को निज्जर की हत्या के लिए भर्ती किया था.
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 2016 से 2024 के बीच भारत से स्टडी परमिट पर कनाडा पहुंचे लोगों द्वारा किए गए अपराधों की संख्या 8,800 प्रतिशत बढ़ गई. CBSA ने भारत को उन देशों में शामिल किया है जहां से सबसे ज्यादा विदेशी छात्र आते हैं जिन पर अपराध के आरोप लगे हैं. ग्लोबल न्यूज़ के मुताबिक, CBSA की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 से 2023 के बीच स्टडी परमिट पर कनाडा में रह रहे 4,000 भारतीयों पर 17,929 अपराधों के मामले दर्ज हुए. इनमें से 4,920 मामलों को संगठित अपराध से जुड़ा माना गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन अपराधों में से 97 प्रतिशत को कनाडाई अधिकारियों ने हिंसक अपराध माना.
रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 2024 में ही स्टडी परमिट पर कनाडा में रह रहे भारतीयों पर 13,040 आपराधिक मामलों में आरोप लगाए गए.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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