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Thursday, 27 August, 2026
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नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश अलर्ट पर, सीमा वाले इलाकों में NDRF की टीमें तैनात

आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा ने कहा कि बिहार सरकार बाढ़ जैसे सभी हालात से निपटने के लिए तैयार है.

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नई दिल्ली: बुधवार सुबह नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद भारत सरकार के विभाग किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा से लगे जिलों में सैकड़ों नावें तैनात की गई हैं. उत्तर प्रदेश में 11 बचाव टीमें जमीन पर काम कर रही हैं और बिहार में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की नौ टीमें काम कर रही हैं.

सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया, इसके अलावा, सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए गांवों के निचले इलाकों में पुलिस चौकियां बनाई गई हैं.

बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा ने दिप्रिंट को बताया कि सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है. उन्होंने कहा, “हम बाढ़ जैसे सभी हालात से निपटने के लिए तैयार हैं. मुख्यमंत्री ने भागलपुर, बेगूसराय, छपरा, मुंगेर और आसपास के इलाकों का हवाई सर्वे किया है.”

इसके अलावा, सदा ने कहा कि सीमा से लगे गांवों में करीब 1.5 मीटर तक पानी पहुंच गया है और निचले इलाकों से लोगों को हटा दिया गया है.

अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. बाढ़ के पानी ने घरों, वाहनों, पुलों और दूसरी सुविधाओं को तबाह कर दिया है, इसलिए मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत ने बुधवार को भारतीय वायुसेना (IAF) के C-130J विमान से नेपाल के लिए 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाएं भेजीं. इसमें अस्थायी ठिकाने, कंबल, सफाई से जुड़ी किट, सोलर लैंप और दवाओं जैसी ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं.

गुरुवार को दूसरी उड़ान भी रवाना हुई. इसमें नेपाल के लिए 37.5 टन HADR सामग्री, दवाएं और खाने के पैकेट भेजे गए. जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, “भारत नेपाल के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है. हम चल रहे राहत कार्यों में पूरी मजबूती से मदद करते रहेंगे.”

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोन और एकजुटता जताने के लिए गहरी सराहना व्यक्त की. उन्होंने हिमालयी देश में आई तबाही से निपटने के दौरान भारत की ओर से दी जा रही मदद की भी सराहना की.

ग्लेशियर की झील का तिब्बत में फटना

बिहार सरकार के सूत्रों ने बताया कि बुधवार सुबह 9:00 बजे तिब्बत में ग्लेशियर की एक झील फट गई. इससे तिब्बत से निकलने वाली भोटे-कोशी नदी, जो नेपाल में त्रिशूली नदी में मिलती है, में करीब 3 मीटर तक पानी बढ़ गया.

इसके चलते अब नीचे की ओर गंडक नदी में पानी के बहाव और जलस्तर के अचानक बढ़ने की आशंका है.

बुधवार दोपहर 12:00 बजे वाल्मीकिनगर में गंडक बैराज से 86,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया और पानी का बहाव बढ़ रहा था. फिलहाल नेपाल में देवघाट गेज पर नारायणी नदी का जलस्तर 4.77 मीटर है.

इस जगह खतरे का निशान 9 मीटर है और चेतावनी का स्तर 7.30 मीटर है. अगर जलस्तर बढ़ता है, तो पानी को गंडक बैराज तक पहुंचने में करीब चार घंटे लगने की उम्मीद है.

सूत्रों ने बताया कि बिहार के जल संसाधन विभाग ने तुरंत कार्रवाई की और वाल्मीकिनगर में गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए.

अधीक्षण अभियंता की अगुवाई में एक तकनीकी टीम को मुख्यालय से गंडक बैराज भेजा गया. गंडक नदी के बेसिन में आने वाले सभी जिलों को भी चेतावनी का संदेश जारी किया गया.

विभाग के अधिकारियों को लगातार सतर्क रहने और निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्हें किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा गया है. बाढ़ से निपटने के लिए सामान रखने और तटबंधों की लगातार जांच करने के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं.

बिहार के मुख्य सचिव ने सभी संबंधित जिलों के अधिकारियों के साथ आपात बैठक की. उन्होंने अधिकारियों को सभी जरूरी तैयारियां करने के निर्देश दिए. इनमें तटबंध के अंदर रहने वाले लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए जानकारी देना और उन्हें समय पर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शामिल है.

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें उन इलाकों में तैनात की जा रही हैं, जहां बाढ़ का असर हो सकता है.

सीमा वाले इलाकों में तैनात बिहार पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाढ़ आने की स्थिति में लोगों के लिए सूखा राशन और राहत सामग्री की व्यवस्था की जा रही है. नावों का भी इंतजाम किया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराजगंज और कुशीनगर में स्थानीय प्रशासन को सभी जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. नेपाल में आई बाढ़ के कारण महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक और नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है.

उत्तर प्रदेश में एक कंट्रोल रूम भी स्थिति पर नजर रख रहा है. महाराजगंज के एक पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गांवों के आसपास छोटी पुलिस चौकियां बनाई गई हैं. लोगों को स्वास्थ्य और इलाज की सुविधाएं भी दी जा रही हैं.

इस बीच, उत्तर प्रदेश के एक SDRF अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि कुशीनगर में दो टीमें भेजी गई हैं. इसके अलावा, PAC और NDRF की टीमें भी महाराजगंज, बलरामपुर, गोंडा और श्रावस्ती पर नजर रख रही हैं, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

अधिकारी ने कहा, “जवानों और उपकरणों की व्यवस्था फिर से कर दी गई है और लगातार करीब से निगरानी की जा रही है.”

NDRF की टीमें सीमा के पास तैनात

NDRF ने एक बयान में कहा कि केंद्रीय जल आयोग (CWC) की एडवाइजरी के अनुसार, नेपाल में भारतीय सीमा से करीब 160 किलोमीटर दूर फुरके खोला में त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की खबर मिली है. इसकी वजह नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर की झील फटने (GLOF) की संदिग्ध घटना बताई जा रही है.

बाढ़ का पानी आगे गंडक नदी में नीचे की ओर जाने की आशंका है.

बयान में कहा गया है कि भारत-नेपाल सीमा के पास गंडक नदी के किनारे बिहार और उत्तर प्रदेश के स्थानीय अधिकारियों को अलर्ट रहने और स्थिति पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है.

बयान में कहा गया कि गंडक नदी के आसपास की स्थिति का जायजा लेने के बाद NDRF की दो टीमें पश्चिम चंपारण और मुजफ्फरपुर में तैनाती के लिए भेजी गई हैं.

बिहार में NDRF की नौ टीमें तैनात की गई हैं और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त टीमें भी तैनात की जाएंगी.

उत्तर प्रदेश सरकार भी स्थिति पर लगातार नजर रख रही है. एक अतिरिक्त NDRF टीम कुशीनगर जिले में तैनात की गई है. गंडक नदी के काफी पास होने के कारण इस जिले पर बाढ़ का असर पड़ने की आशंका है. कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में बाढ़ चेतावनी और प्रतिक्रिया (FWR) के काम के लिए 11 टीमें तैनात हैं.

नेपाल और चीन में सुरक्षा बल अलर्ट पर हैं. नेपाल पुलिस ने एक्स पर कहा, “तिब्बत की ओर से रसुवा में भोटे कोशी नदी में बड़ी मात्रा में बाढ़ का पानी आने के कारण, नुवाकोट, धादिंग, चितवन, गोरखा और आसपास के इलाकों समेत त्रिशूली नदी के बेसिन में आने वाले जिलों के लोगों से बेहद सतर्क रहने और अगले आदेश तक सुरक्षित जगहों पर रहने की अपील की जाती है.”

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार, रसुवा जिले में आई बाढ़ की वजह तिब्बत क्षेत्र में भूकंप से शुरू हुआ हिमस्खलन हो सकता है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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