काठमांडू: नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. इसके कुछ घंटे बाद अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती जांच के अनुसार बर्फ और चट्टानों के खिसकने से यह आपदा आई हो सकती है. यह जानकारी नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के शुरुआती आकलन में सामने आई है.
घटना के बाद NDRRMA ने रसुवा इलाके और त्रिशूली नदी की सहायक नदी भोटे कोशी की पहली सैटेलाइट तस्वीरें साझा कीं. उसने कहा कि शुरुआती जांच से पता चला है कि ल्हेंडे नदी में ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ आई थी. यह बाढ़ नेपाल-चीन के रसुवागढ़ी बॉर्डर से करीब 20 किलोमीटर उत्तर में बर्फ और चट्टानों के भूस्खलन के बाद आई.
ल्हेंडे, भोटे कोशी की एक सहायक नदी है, जो तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी से निकलती है. यह रसुवा के रास्ते नेपाल में प्रवेश करती है, जहां बाढ़ आई. रसुवा में ल्हेंडे और क्यिरोंग त्सांगपो नदियां मिलकर त्रिशूली नदी बनाती हैं. यह नदी मध्य नेपाल से होकर गुज़रती है. इसमें नुवाकोट, गोरखा और चितवन जिले भी आते हैं. यह काठमांडू के पास से गुज़रती है, लेकिन राजधानी के अंदर से नहीं गुज़रती.
त्रिशूली नदी आगे जाकर देवघाट में नारायणी नदी में मिल जाती है. इसके बाद नारायणी बिहार के रास्ते भारत में प्रवेश करती है और यहां इसे गंडक नदी कहा जाता है. कोसी नदी के साथ, जो नेपाल के हिमालय से निकलती है, यह नदी बिहार में गंगा में मिल जाती है.
शुरुआत में माना गया था कि बाढ़ की वजह ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) हो सकती है. ऐसा इसलिए माना गया क्योंकि ल्हेंडे नदी ग्लेशियर से निकलती है और नेपाल में GLOF की घटनाओं का खतरा काफी ज्यादा है, लेकिन अब इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और NDRRMA के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह घटना बर्फ और चट्टानों के खिसकने से शुरू हुई हो सकती है.
इसका मतलब यह हो सकता है कि बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा, जो संभवतः किसी ग्लेशियर से आया था, ऊपर की ओर ल्हेंडे नदी में गिर गया. इससे अचानक पानी का तेज़ बहाव पैदा हुआ, जो नीचे की ओर रसुवा के बॉर्डर वाले इलाके तक बह गया. नेपाल और चीन के अधिकारी इस बर्फ और चट्टानों के खिसकने की सही वजह पता करने के लिए काम कर रहे हैं. अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि इसकी वजह भूकंप था.
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने शुरुआत में इस घटना को 4.4 तीव्रता वाले भूकंप के रूप में बताया था, लेकिन आसपास के भूकंप मापने वाले स्टेशनों, लंबे समय तक रहने वाली भूकंपीय तरंगों और सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने के बाद उसने इसकी तीव्रता बढ़ाकर 5.2 कर दी. साथ ही यह पता चला कि यह भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर के टूटने और मलबे के बहने की घटना थी.
यह नदी नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के बीच सीमा के साथ बहती है. इसलिए माना जा रहा है कि बर्फ और चट्टानों के खिसकने की शुरुआत तिब्बत में, पहाड़ी सीमा वाले इलाके के पास हुई हो सकती है.
अमेरिका की सैटेलाइट निगरानी कंपनी प्लैनेट लैब्स की ओर से साझा की गई सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा कि बाढ़ के बाद रसुवा में भोटे कोशी नदी का आकार “पांच गुना” बढ़ गया. इससे आसपास के इलाके पानी और नदी के साथ आए मिट्टी-पत्थर के मलबे में डूब गए.
काठमांडू स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठन ICIMOD के विशेषज्ञों ने कहा कि रसुवा से करीब 100 किलोमीटर नीचे गलछी में त्रिशूली नदी का जलस्तर सिर्फ 30 मिनट में 9 मीटर बढ़ गया. बाढ़ में नदी के ऊपर की ओर पानी की निगरानी करने वाली ज्यादातर प्रणालियां खराब हो गईं. हालांकि, ICIMOD ने कहा कि धादिंग जिले के गलछी में निगरानी प्रणाली अभी भी काम कर रही है.
NDRRMA के ताज़ा बचाव अपडेट के मुताबिक, अब तक 144 शव बरामद किए जा चुके हैं. इनमें से 64 शव चितवन जिले में मिले हैं, जो रसुवा से करीब 300 किलोमीटर नीचे की ओर है. नेपाल टूरिज्म बोर्ड के मुताबिक, करीब 384 यात्री अभी भी लापता हैं. वहीं पुलिस और सशस्त्र बलों के जवानों समेत 245 नेपाली नागरिकों का भी अभी तक पता नहीं चल पाया है.
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