नई दिल्ली: बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के कुछ हिस्सों में अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 105 भारतीय पर्यटकों के लापता होने की खबर है.
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बताया कि बाढ़ का पानी रसुवा जिले में घुसने के बाद 384 लोग लापता बताए गए हैं. इनमें 291 विदेशी नागरिक हैं. बाढ़ ने घरों, वाहनों, पुलों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को तबाह कर दिया.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत जल्द से जल्द राहत सामग्री भेज रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ से हुई मौतों पर शोक जताया. उन्होंने शाह से कहा, “इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं.”
प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाहसँग कुराकानी गरेँ र नेपालमा आएको बाढीका कारण ज्यान गुमाउनेहरूप्रति समवेदना व्यक्त गरेँ। यस कठिन समयमा भारतका जनता नेपालका आफ्ना दिदीबहिनी तथा दाजुभाइहरूसँग ऐक्यबद्ध भई साथै उभिएका छन्।
भारत नेपाललाई सम्भव भएसम्मका सबै प्रकारका मानवीय सहायता उपलब्ध…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 26, 2026
भारत नेपाल को हर संभव मानवीय मदद देने के लिए तैयार है. हमारी टीमें बचाव और राहत के काम के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम कर रही हैं.
Spoke to Prime Minister Balendra Shah and conveyed condolences on the loss of lives due to the floods in Nepal. The people of India stand in solidarity with their sisters and brothers in Nepal at this difficult time.
India is ready to provide all possible humanitarian…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 26, 2026
द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत जा रहे 300 से ज्यादा भारतीय तीर्थयात्रियों का भी नेपाल-चीन सीमा पर रसुवागढ़ी इलाके में संपर्क टूट गया है.
अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की ओर से अचानक आया पानी भोटे कोशी नदी में पहुंचा, जिससे सीमा के तिमुरे और स्याप्रु बेसी इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए.

तिब्बत की तरफ ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग के पास भी मिट्टी का मलबा गिरा, जिससे लोग हताहत हुए और कई लोग लापता हो गए. ऐसा नहीं लगता कि बाढ़ रसुवा में हुई भारी बारिश की वजह से आई. इसके बजाय सैटेलाइट तस्वीरों में सीमा के तिब्बती हिस्से में काफी बारिश दिखाई दी. अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या अचानक आई बाढ़ की वजह ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) यानी ग्लेशियर की झील का अचानक फटना था.
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार, रसुवा जिले में बाढ़ बुधवार को तिब्बती क्षेत्र में आए भूकंप से शुरू हुए हिमस्खलन के कारण आई हो सकती है.
नेपाल सेना के दो हेलिकॉप्टर काठमांडू से प्रभावित इलाकों की ओर भेजे गए, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि पानी का स्तर बहुत ज्यादा होने के कारण वे तिमुरे और स्याप्रु बेसी में उतर नहीं सके. सेना के प्रवक्ता राजा राम बसनेत ने कहा कि मुश्किल हालात ने बचाव के काम को काफी कठिन बना दिया है.
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बाढ़, नुकसान और चल रहे बचाव अभियान का जायजा लेने के लिए मंत्रिपरिषद की आपात बैठक की.
शाह ने कहा, “नदी के किनारे रहने वाले लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने और सतर्क रहने की सलाह दी जाती है.”
गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने भी भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की.

बाढ़ का पानी नीचे की ओर त्रिशूली नदी के बेसिन में पहुंच गया, जिसके बाद नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन के इलाकों के लिए चेतावनी जारी की गई. अधिकारियों ने बाढ़ के खतरे को देखते हुए काठमांडू से रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिंग की ओर जाने वाला यातायात भी रोक दिया.
तिब्बत सीमा के पास स्थित तिमुरे बाजार और उसके पास का सीमा शुल्क क्षेत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है. बाढ़ का पानी कई वाहनों और सामान को बहा ले गया. सीमा के पास तिमुरे में तैनात सशस्त्र पुलिस बल के नौ जवानों के भी लापता होने की खबर है.
जलविद्युत परियोजनाओं, सड़कों और पुलों को भी नुकसान पहुंचा या वे बह गए. नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि करीब 430 मेगावाट बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसमें ज्यादातर जलविद्युत परियोजनाएं शामिल हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, यह नेपाल की कुल करीब 3.2 गीगावाट की स्थापित जलविद्युत क्षमता का 12 प्रतिशत से ज्यादा है.
भोटे कोशी का बाढ़ का पानी नारायणी देवघाट तक पहुंच गया था, जहां पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा था.
भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलती है और नेपाल से होकर बहती है. इसके बाद यह त्रिशूली नदी प्रणाली में मिल जाती है, जो आगे भारत में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है. इस इलाके में पिछले साल भी एक भयानक बाढ़ आई थी. उस समय भोटे कोशी में आई बाढ़ से नौ लोगों की मौत हुई थी और नेपाल-चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज नष्ट हो गया था. इससे कई महीनों तक व्यापार और परिवहन प्रभावित रहा था.
सीमा के चीन वाले हिस्से में ग्यिरोंग काउंटी और ग्यिरोंग बंदरगाह में भी मिट्टी का मलबा गिरा, जिससे सड़कें बंद हो गईं और शिगात्से क्षेत्र के कुछ हिस्सों में संचार और बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई. शिन्हुआ के मुताबिक, इस घटना में बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए और कई लोग लापता हैं.
शी जिनपिंग ने तिब्बत में लापता लोगों की तलाश के लिए हर संभव प्रयास करने और दूसरी आपदाओं के खतरे को कम करने के लिए निगरानी और पहले से चेतावनी देने वाली व्यवस्था को मजबूत करने का आदेश दिया.
बाढ़ का असर नीचे की ओर बढ़ने के बाद बिहार के अधिकारियों ने भी सतर्कता बढ़ा दी. मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने जिला मजिस्ट्रेटों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की और गंडक और कोसी नदी प्रणाली के किनारे वाले इलाकों में अधिकारियों को खास तौर पर सतर्क रहने का निर्देश दिया.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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