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Wednesday, 26 August, 2026
होमविदेशइस्लामाबाद में अस्पताल की आग से 14 नवजात बच्चों की मौत, शहबाज सरकार ने जांच के दिए आदेश

इस्लामाबाद में अस्पताल की आग से 14 नवजात बच्चों की मौत, शहबाज सरकार ने जांच के दिए आदेश

2012 के बाद से लगी चौथी बड़ी आग में, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (PIMS) से 19 लोगों को बचाया गया. इमरान खान ने शुक्रवार को अस्पताल में एक छोटा सा मेडिकल चेकअप करवाया.

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नई दिल्ली: बुधवार को पाकिस्तान के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक, इस्लामाबाद के पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) के मैटरनिटी वार्ड में आग लगने से 14 नवजात बच्चों की मौत हो गई.

अस्पताल के अधिकारियों ने कहा है कि एयर-कंडीशनिंग यूनिट में बिजली की खराबी से आग लगने की आशंका है. बचाव दल ने अस्पताल से कम से कम 19 लोगों को बचाया, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे. अस्पताल की वेबसाइट के मुताबिक, उसके मैटरनिटी वार्ड में 150 से ज्यादा बेड हैं. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को इसी अस्पताल में थोड़ी देर के लिए मेडिकल चेकअप कराया था.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने “गहरे दुख और शोक” का इजहार किया और तुरंत जांच के आदेश दिए. उन्होंने कहा कि मौतों के पीछे की परिस्थितियों की पूरी तरह जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. इस्लामाबाद के जिला प्रशासन ने तथ्यों की जांच के लिए एक समिति बनाई है और उसे 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है.

राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की. उन्होंने कहा कि अस्पतालों में आग से सुरक्षा और इमरजेंसी के लिए प्रभावी इंतिजाम होने चाहिए, खासकर नवजात बच्चों की देखभाल वाले इलाकों में.

इस हादसे को लेकर विपक्ष ने भी सरकार की आलोचना की है. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के पूर्व केंद्रीय मंत्रियों फवाद चौधरी और शिरीन मजारी ने स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल के इस्तीफे की मांग की. उनका कहना था कि सरकार को इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.

चौधरी ने X पर लिखा, “इतने बड़े और दुखद हादसे के लिए जिम्मेदार प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. सिर्फ निलंबन और तबादला सजा के तौर पर काफी नहीं होगा. इस बेहद दर्दनाक घटना के लिए केंद्रीय मंत्री को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता.”

पाकिस्तान में हाल के वर्षों में कई भीषण आग की घटनाएं हुई हैं. अधिकारियों और सुरक्षा से जुड़े लोगों ने इन घटनाओं को आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम न होने, बिल्डिंग नियमों को कमजोर तरीके से लागू करने और इमरजेंसी के लिए खराब तैयारी से जोड़ा है.

जनवरी में कराची के गुल प्लाजा शॉपिंग सेंटर में आग लगने से 67 लोगों की मौत हो गई थी. 2021 में इसी शहर में एक फैक्ट्री में आग लगने से 16 कर्मचारियों की मौत हुई थी. वहीं 2012 में कराची की एक गारमेंट फैक्ट्री में आग लगने से करीब 300 कर्मचारियों की मौत हो गई थी. वहां पर्याप्त निकास न होने की वजह से कर्मचारी अंदर फंस गए थे.

विश्व बैंक के मुताबिक, पाकिस्तान में स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला खर्च दक्षिण एशिया में सबसे कम है. जून में सरकार द्वारा नया राष्ट्रीय बजट मंजूर किए जाने के बाद, पाकिस्तान के सबसे बड़े डॉक्टरों के संगठन ‘पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन’ ने चेतावनी दी थी कि देश का स्वास्थ्य ढांचा “संरचनात्मक लापरवाही की वजह से एक ऐसी स्थिति में है, जहां पूरी व्यवस्था ढह रही है”.

PMA के महासचिव डॉ. अब्दुल गफूर शोरो ने कहा था, “PMA गंभीर चिंता के साथ यह देखता है कि संघीय सरकार की ओर से 2026-27 वित्त वर्ष के लिए स्वास्थ्य और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के मंत्रालय के लिए घोषित 53.3 अरब रुपये का नया बजट अभी भी ऐसे दिखने वाले बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देता है, जबकि देशभर में चुपचाप बढ़ रहे मातृ और बाल पोषण संकट से निपटने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं के लिए बहुत कम पैसा दिया गया है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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