चेन्नई: दो बड़े दक्षिण भारतीय आर्थिक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी बदलने के मकसद से बनाई जा रही 262 किलोमीटर लंबी बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे परियोजना कानूनी अड़चन में फंस गई है. तमिलनाडु का 25 किलोमीटर लंबा एक अहम हिस्सा अब बड़ी रुकावट बनकर उभरा है.
परियोजना पूरी होने में देरी का कारण तमिलनाडु के 25.5 किलोमीटर लंबे अरक्कोनम-कांचीपुरम पैकेज को लेकर चल रहा कानूनी विवाद है. यह पैकेज डीपी जैन एंड कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था.
इस वजह से एक्सप्रेसवे को एक छोर से दूसरे छोर तक पूरी तरह खोलने की मौजूदा बढ़ाई गई समयसीमा, यानी 2026 के मध्य तक, पूरी करना अब संभव नहीं दिख रहा है.
अधिकारियों को अब उम्मीद है कि कर्नाटक (71.7 किमी), आंध्र प्रदेश (85.2 किमी) और तमिलनाडु (106 किमी) में फैला पूरा 262.9 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे 2027 में किसी समय चालू हो सकेगा.
अब तक इस कॉरिडोर के 230 किलोमीटर से ज्यादा हिस्से का काम पूरा हो चुका है. इसमें कर्नाटक के 71.7 किलोमीटर, आंध्र प्रदेश के प्रस्तावित 85.2 किलोमीटर में से 78.5 किलोमीटर और तमिलनाडु में 80 किलोमीटर से अधिक हिस्सा शामिल है.
एक्सप्रेसवे को तीन चरणों में 10 निर्माण पैकेजों में बांटा गया है. कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में तीन-तीन पैकेज हैं, जबकि तमिलनाडु में चार पैकेज हैं.
परियोजना निदेशक सावित्री देवी ने दिप्रिंट से कहा, “एक पैकेज (अरक्कोनम-कांचीपुरम) का मामला अदालत में है, इसलिए हमें नहीं पता कि इसे कब पूरा किया जा सकेगा और पूरी एक्सप्रेसवे सेवा कब शुरू होगी. हालांकि बाकी दो पैकेजों (एक आंध्र प्रदेश और एक चेन्नई में), जिन पर अभी काम चल रहा है, अक्टूबर 2026 तक पूरे हो जाएंगे.”
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी वीरेंद्र साम्ब्याल ने दिप्रिंट को बताया कि परियोजना पर मोंटे कार्लो, केसीसी, आरसीसीएल और डीपी जैन समेत कई ठेकेदार काम कर रहे हैं. आंध्र प्रदेश का लंबित पैकेज मोंटे कार्लो को दिया गया है, जबकि चेन्नई वाला पैकेज डीपी जैन को दिया गया था.
अरक्कोनम-कांचीपुरम पैकेज का काम मई 2025 में पूरी तरह रुक गया था. इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नवंबर 2025 में ठेका समाप्त करने का नोटिस जारी किया, जिसके बाद डीपी जैन मद्रास हाई कोर्ट पहुंच गया.
ठेकेदार ने अदालत से अनुरोध किया कि परियोजना को खत्म करने के बजाय किसी दूसरी संस्था को सौंपने की अनुमति दी जाए.
NHAI सूत्रों ने बताया कि डीपी जैन ने परियोजना को किसी दूसरी संस्था या ऋणदाता समर्थित पक्ष को सौंपने की मांग की है, ताकि पूरी तरह ठेका समाप्त होने से बचा जा सके. क्योंकि इससे तुरंत कर्ज चुकाने की समस्या, ब्लैकलिस्ट होने का खतरा और इस पैकेज पर अब तक खर्च की गई रकम के नुकसान का जोखिम पैदा हो सकता है.
ठेकेदार ने देरी के लिए फ्लाई ऐश की कीमत बढ़ने से बढ़ी लागत को जिम्मेदार बताया. लेकिन एनएचएआई ने कहा कि रियायत समझौते में फ्लाई ऐश की खरीद या कीमत से जुड़ा कोई प्रावधान नहीं है और बाजार से फ्लाई ऐश खरीदना ठेकेदार की जिम्मेदारी है.
हाई कोर्ट ने NHAI के पक्ष में फैसला दिया, जिसके खिलाफ ठेकेदार ने हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में रिट याचिका दाखिल की. मामला अभी लंबित है और काम रुका हुआ है.
वीरेंद्र साम्ब्याल ने दिप्रिंट से कहा, “उस पैकेज का लगभग 55 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. चूंकि मामला अदालत में लंबित है, इसलिए हम यह नहीं बता सकते कि परियोजना कब पूरी होगी.”
उन्होंने कहा, “अदालत जो भी आदेश देगी, उसके लिए हम तैयार हैं. हम नया टेंडर जारी करने, पुराना टेंडर रद्द करने या परियोजना को ट्रांसफर करने, सभी विकल्पों के लिए तैयार हैं.”
इस हिस्से में काम दोबारा शुरू होने के बाद बचे हुए हिस्से को पूरा करने में कम से कम 12 महीने लगने का अनुमान है. एनएचएआई अदालत के निर्देशों का इंतजार कर रहा है और जरूरत पड़ने पर रियायतधारी को बदलने के लिए तैयार है.
राज्य सरकार के अधिकारी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए एनएचएआई का इंतजार कर रहे थे, लेकिन मामला अदालत में होने की वजह से वे फिलहाल इंतजार और निगरानी की स्थिति में हैं.
दिप्रिंट ने ईमेल के जरिए डीपी जैन से प्रतिक्रिया मांगी है. जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

यह एक्सप्रेसवे दो बड़े आर्थिक और तकनीकी केंद्रों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है. इसके शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय मौजूदा एनएच-48 के जरिए लगने वाले 5-6 घंटे से घटकर 2.5 से 3 घंटे रह जाने की उम्मीद है.
इस परियोजना से रोजाना यात्रा करने वाले लोगों, कारोबारी यात्रियों, लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है, जो दक्षिण भारत में सामान की आवाजाही के लिए इस कॉरिडोर पर काफी निर्भर हैं. यह एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के उद्योगों, निर्माताओं और निर्यातकों के लिए भी बड़ा लाभ साबित होगा.
धीमी शुरुआत
जमीन अधिग्रहण की दिक्कतों, वन मंजूरी से जुड़ी समस्याओं और लोगों के विरोध ने शुरुआत से ही परियोजना की रफ्तार धीमी कर दी थी. इसके बाद रेलवे से रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) की मंजूरी लेने और हाई-टेंशन बिजली लाइनों तथा ट्रांसमिशन टावरों को हटाने जैसी तकनीकी और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियों ने परियोजना में कई महीनों की देरी कर दी.
कांचीपुरम-श्रीपेरंबदूर हिस्से में लगभग 4.7 किलोमीटर का काम कई महीनों तक मुख्य रूप से बिजली ढांचे को स्थानांतरित करने की समस्याओं के कारण रुका रहा. हालांकि, एनएचएआई अधिकारियों ने कहा कि अब यह समस्या सुलझा ली गई है.
वीरेंद्र साम्ब्याल ने कहा कि ट्रांसमिशन टावर लगाने के लिए वैकल्पिक जगह तय कर ली गई है, बिजली काटने की मंजूरियां भी मिल गई हैं और काम जारी है.
अधिकारियों के अनुसार उस हिस्से का काम जल्द पूरा हो जाएगा.
इस बीच परियोजना के कई अन्य हिस्सों में काफी प्रगति हुई है. कर्नाटक में होसकोटे से बेथमंगल तक का 71.7 किलोमीटर लंबा हिस्सा पूरा हो चुका है.

आंध्र प्रदेश में करीब 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और परियोजना अपने अंतिम चरण में है. तमिलनाडु में लगभग 106 किलोमीटर लंबे हिस्से में पिछले साल तक करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया था. हालांकि 25 किलोमीटर लंबा अरक्कोनम-कांचीपुरम हिस्सा रुका हुआ है.
एक्सप्रेसवे को कई आपस में जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण अधिकारियों को बार-बार समयसीमा बदलनी पड़ी. शुरुआत में इसे 2024 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य था, जिसे बढ़ाकर अगस्त 2025 कर दिया गया. इसके बाद जमीन अधिग्रहण में देरी, बिजली और अन्य सुविधाओं को हटाने से जुड़ी समस्याओं और कई हिस्सों में ठेकेदारों के खराब प्रदर्शन के कारण समयसीमा बढ़ाकर 2026 के मध्य तक कर दी गई.
इस साल मार्च में संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, परियोजना के चिन्हित हिस्सों की कुल लागत 2022 में परियोजना शुरू होने के समय 7,811 करोड़ रुपये थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 10,507 करोड़ रुपये हो गई.
सिर्फ अरक्कोनम-कांचीपुरम पैकेज की लागत ही 1,155 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,525 करोड़ रुपये हो गई.
NHAI के क्षेत्रीय अधिकारी वीरेंद्र साम्ब्याल ने दिप्रिंट को बताया कि तमिलनाडु में एक्सप्रेसवे का सबसे लंबा हिस्सा है और यहां मोंटे कार्लो, KCC, RCCL और डीपी जैन समेत कई ठेकेदार काम कर रहे हैं.
NHAI एक्सप्रेसवे खोलने पर विचार करेगा
चेन्नई और बेंगलुरु के यात्री और उद्योग जगत से जुड़े लोग, जो लंबे समय से तेज और सुरक्षित यात्रा का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अब और इंतिजार करना होगा क्योंकि परियोजना में और देरी हो रही है. फिलहाल यात्री मौजूदा एनएच-48 कॉरिडोर पर निर्भर हैं, जो अब भी भीड़भाड़ वाला है और जहां यात्रा में ज्यादा समय लगता है. हालांकि, एनएचएआई ने संकेत दिया है कि जहां संभव होगा, वहां चरणबद्ध तरीके से एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्से खोलने की संभावना पर विचार किया जाएगा, ताकि लोगों को जल्द कुछ लाभ मिल सके.
वीरेंद्र साम्ब्याल ने कहा, “हम जनता के इस्तेमाल के लिए एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों को खोलने पर फैसला करेंगे. यात्रियों की सुविधा के लिए हम इसकी संभावनाओं पर विचार करेंगे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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