गुरुग्राम: अंबाला में गुरुवार को हाईवे जाम होने से तीन दिन पहले, जिस व्यक्ति की कार को लेकर पहली झड़प हुई थी, वह अस्पताल के बिस्तर पर था और उसने खुद पर हुए हमले के बारे में बताया था. इसके तीन दिन बाद भी करीब 400 लोगों पर पुलिस केस होने की वजह वही व्यक्ति था. यही वजह थी कि हरियाणा के सिख संगठन अकाल तख्त का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे थे.
वाई-प्लस सिक्योरिटी पाने वाले गुरसिमरन सिंह मंड पिछले करीब एक दशक से ठीक उसी जगह खड़े दिखाई देते हैं, जहां गुरुवार को हिंसा हुई—पंजाब और उसके आसपास हिंदू राष्ट्रवादी राजनीति और सिख अलगाववादी राजनीति के बीच टकराव वाली जगह पर. कुछ लोगों के लिए इसी वजह से वह निशाने पर रहे हैं.
वहीं, कुछ दूसरे लोगों के लिए वह ऐसे व्यक्ति हैं जो जानबूझकर उकसाते हैं, गुरुद्वारों में जाते हैं और इसे अपनी सक्रियता बताते हैं. दिप्रिंट ने फोन कॉल और टेक्स्ट मैसेज के जरिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका मोबाइल फोन बंद था.
यूथ कांग्रेस से खालिस्तान विरोधी मोर्चे तक
मंड का जन्म 19 अक्टूबर 1974 को लुधियाना जिले के भुट्टा गांव में एक किसान परिवार में हुआ था. उनका परिवार स्थानीय राजनीति और सहकारी गतिविधियों से जुड़ा रहा है. उन्होंने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की. उन्होंने लुधियाना में यूथ कांग्रेस के साथ काम किया और बाद में उसकी ट्रेनिंग सेल से भी जुड़े. उन्होंने कहा है कि 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में अलगाववादी हिंसा को अपनी आंखों के सामने होते देखना उनके राजनीतिक विचारों की वजह बना.
1997 में राज्य में कांग्रेस की हार के बाद भी वह स्थानीय कांग्रेस से जुड़े रहे. सोशल प्रोफाइल की जानकारी जुटाने वाली वेबसाइट्स अब भी उन्हें पार्टी की किसान कांग्रेस सेल का राष्ट्रीय संयुक्त समन्वयक बताती हैं.
कांग्रेस से उनका यह जुड़ाव अब उस पहचान से अलग दिखाई देता है, जो उन्होंने बाद में बनाई. वह इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट (IAKTF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. इसके अलावा, उनके अपने सोशल मीडिया बायो के अनुसार, वह श्री निरंजनी अखाड़ा के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं. श्री निरंजनी अखाड़ा उन हिंदू साधु-संतों के अखाड़ों में से एक है, जो कुंभ मेले में हिस्सा लेते हैं.
उनके इंस्टाग्राम और एक्स बायो में ‘Jai Hindu Rashtra’ लिखा है. Gursimran Singh Mand नाम से चल रहे उनके फेसबुक पेज के डिटेल्स में भी अखाड़े का समर्थन लिखा हुआ है.
आलोचक मंड की अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल से भी आगे जाकर उनकी राजनीतिक पहचान बताते रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने गुरुवार की झड़प से कुछ दिन पहले पंजोखरा पुलिस स्टेशन के बाहर धरने के दौरान कहा था कि मंड के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, “सिर्फ इसलिए क्योंकि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में बोलते हैं.” हालांकि, यह राजनीतिक संरक्षण का आरोप है, मंड की किसी पक्की राजनीतिक संबद्धता की पुष्टि नहीं हुई है.
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में मंड ने खुद बीजेपी की सदस्यता का दावा नहीं किया है. उनकी खुद की पहचान अखाड़े और खालिस्तान विरोधी मोर्चे तक ही रहती है.
हालांकि, उनके इंस्टाग्राम पोस्ट में पश्चिम बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का VVIP निमंत्रण दिखता है. इसके साथ एक टेक्स्ट पोस्ट में लिखा है, “मेरे परिवार में पहली बार किसी ने पश्चिम बंगाल में भगवा सरकार देखी. इस ऐतिहासिक घटना को देखने का मौका मिलना मेरे लिए सच में सौभाग्य की बात है. इसे संभव बनाने के लिए @narendramodi जी और @amitshahofficial जी का धन्यवाद.”
एक अन्य पोस्ट में मंड को भवानीपुर विधानसभा सीट से जीत के बाद अधिकारी को माला पहनाते हुए देखा जा सकता है.
धमकियों का इतिहास
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंड को उनकी सक्रियता की वजह से बार-बार धमकियां मिलती रही हैं. 2022 में अमृतसर में हिंदू संगठन के नेता सुधीर सूरी की हत्या के बाद मंड ने कहा था कि उन्हें खालिस्तान समर्थक लोगों और गैंगस्टरों से धमकियां मिली थीं. पंजाब पुलिस ने इसके बाद उनकी सुरक्षा फिर से बहाल कर दी और उन्हें एक एस्कॉर्ट गाड़ी भी दी. बाद में उन्हें 10 हथियारबंद सुरक्षाकर्मी दिए गए. राज्य में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार बनने के बाद पंजाब पुलिस ने कुछ समय के लिए उनकी सुरक्षा हटा दी थी.
पिछले साल मार्च में मंड ने कहा था कि उन्हें गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों की ओर से विदेश के व्हाट्सएप नंबर से कॉल करके बम से उड़ाने की धमकी दी गई. इसके बाद पुलिस ने एक और केस दर्ज किया था.
उसी साल बाद में, पाकिस्तान में मौजूद गैंगस्टर शहजाद भट्टी को आतंकवादी घोषित करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद उन्होंने फिर से धमकियां मिलने की जानकारी दी. उन्होंने कहा था कि उनके परिवार को ग्रेनेड और रॉकेट लॉन्चर से हमले की धमकियां दी गई थीं. उस समय उन्हें वाई-प्लस सुरक्षा मिली हुई थी, जिसमें सीआरपीएफ के जवान भी शामिल थे.
यह सुरक्षा 7 अगस्त को सीधे तौर पर महत्वपूर्ण हो गई, जब उनकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मी, राकेश कुमार और कुलबीर राणा, उन लोगों में शामिल थे जो गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब के बाहर उनकी गाड़ी को घेर लिए जाने के दौरान घायल हुए.
मंड ने कहा है कि प्रधानमंत्री और आरएसएस के खिलाफ नारे लगाने और अमृतपाल सिंह की रिहाई की मांग करने से इनकार करने के बाद उन पर और उनके बेटे भावजोत सिंह पर तलवारों और डंडों से हमला किया गया. सिख समुदाय के प्रतिनिधियों ने इस बात से इनकार किया है. उनका आरोप है कि गुरुद्वारे के नियमों का पालन करने के लिए कहे जाने के बाद मंड ने अपनी गाड़ी भीड़ में घुसा दी.
क्यों लोगों की राय बंटी हुई है
पंजाब के सार्वजनिक जीवन में मंड की जगह कुछ अलग तरह की है. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ रहे राज्य में यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ सकता है.
उनके समर्थकों के लिए वह एक राष्ट्रवादी व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपनी जान को खतरे में डालकर अलगाववादी नेटवर्क का सामना किया है. इसके पीछे उन्हें मिली धमकियों और बढ़ाई गई सुरक्षा का रिकॉर्ड भी है. वहीं, सिख समुदाय में उनके आलोचकों के लिए वह ऐसे व्यक्ति हैं जो बार-बार विवादित धार्मिक जगहों में खुद को शामिल करते रहे हैं. उनका कहना है कि मंड के साथ होने वाले विवाद, इस मामले सहित, सुलझने से पहले ही तेजी से बढ़ जाते हैं.
हरियाणा पुलिस ने शुक्रवार को अंबाला में गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब के पास गुरुवार को हुए हाईवे जाम को लेकर दो नए केस दर्ज किए. इनमें से एक बलदेव नगर और दूसरा पंजोखरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया. दोनों मामलों में करीब 200-200 लोगों के नाम हैं. इनमें हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के अध्यक्ष जगदीश सिंह झिंडा भी शामिल हैं. इन एफआईआर में हत्या की कोशिश, खतरनाक हथियारों से चोट पहुंचाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं.
शुक्रवार को दर्ज हुए ये केस पिछले एक हफ्ते से बढ़ रहे विवाद के बाद सामने आए हैं. गुरुवार को हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और लाठियां चलाईं. पुलिस ने हजारों सिख प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए यह कार्रवाई की थी. प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे को छह घंटे से ज्यादा समय तक बंद रखा था. यह विवाद 7 अगस्त को गुरुद्वारे के बाहर मंड की एसयूवी को लेकर हुई झड़प से शुरू हुआ था.
सिख समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि गुरपर्व की वजह से भीड़ होने के कारण गुरुद्वारे की ओर जाने वाली सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही बंद कर दी गई थी. उनका कहना है कि मंड को नियमों का पालन करने के लिए कहे जाने के बावजूद वह करीब 15 मिनट तक अपनी कार के अंदर बैठे रहे. इसके बाद उन्होंने गाड़ी आगे बढ़ाई, जिससे श्रद्धालु इसकी चपेट में आए और कम से कम एक व्यक्ति घायल हुआ.
मंड ने इस घटना की अलग कहानी बताई है. उन्होंने कहा कि वह और उनका बेटा भावजोत सिंह कार में बैठे थे, तभी एक समूह ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और तलवारों, डंडों और दूसरे तेज हथियारों से हमला किया. उनकी एसयूवी का आगे का शीशा और खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए गए. मंड और उनके बेटे के अलावा उनकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मी—राकेश कुमार और कुलबीर राणा भी घायल हुए.
पुलिस के अनुसार, गुरुवार सुबह गुरुद्वारे में करीब 1,500 से 1,600 लोग जमा हुए थे. इससे पहले समुदाय के नेताओं ने गुरसिमरन सिंह मंड के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग को लेकर एक समय सीमा तय की थी.
पुलिस के साथ बातचीत चल रही थी, तभी भीड़ का एक हिस्सा अलग हो गया और उसने हाईवे जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बैरिकेड हटा दिए और दूसरे रास्तों से होते हुए अंबाला कैंट में जग्गी सिटी सेंटर के पास एनएच-44 तक पहुंच गए. उन्होंने दोनों तरफ की सड़क को छह घंटे से ज्यादा समय तक बंद रखा.
कम से कम छह पुलिसकर्मी घायल हुए, इनमें एक डीएसपी भी शामिल हैं. HSGMC अध्यक्ष झिंडा भी झड़प में घायल हुए. बीकेयू (शहीद भगत सिंह) के प्रवक्ता तेजवीर सिंह ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने का इरादा था, लेकिन बैरिकेड और आंसू गैस की वजह से स्थिति बिगड़ गई. उन्होंने कहा कि एक स्कूल के पास पुलिस की कार्रवाई से छात्रों और उनके माता-पिता को परेशानी हुई.
रात करीब 9 बजे ट्रैफिक फिर से शुरू कर दिया गया. डीजीपी सिंघल ने अंबाला के सैन्य और सिविल अस्पतालों में घायल पुलिसकर्मियों से मुलाकात की.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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