नई दिल्ली: कई दिनों से चल रही अटकलों के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी और उसकी सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि “कुछ लोगों” की वजह से उन्हें यह फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा.
31 जुलाई को पूनावाला ने अपने एक्स बायो से बीजेपी से जुड़ी सभी बातें हटा दी थीं. इसके बाद उनके पार्टी से इस्तीफा देने की अटकलें शुरू हो गई थीं. हालांकि, उस समय बीजेपी या उनकी ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को लिखे पत्र में पूनावाला ने कहा कि वह सभी जिम्मेदारियों से बिना किसी शर्त के इस्तीफा दे रहे हैं.
उन्होंने लिखा, “कृपया इस पत्र को 30 जुलाई 2026 को लिखे मेरे पिछले पत्र के साथ पढ़ें, जिसमें मैंने आर्थिक और निजी परेशानियों के कारण बीजेपी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से बिना किसी शर्त के इस्तीफा देने की पेशकश की थी.”
उन्होंने आगे कहा, “पिछले कुछ दिनों में कुछ लोगों की वजह से हुई घटनाओं, जिनके बारे में मैंने आपको विस्तार से बताया है, उन्होंने मुझे अपने पहले के फैसले पर फिर से मजबूती से खड़े होने के लिए मजबूर किया है. बिना किसी दुख के और केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन जी, गृह मंत्री अमित शाह जी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी और महासचिव (संगठन) श्री बी.एल. संतोष जी जैसे वरिष्ठ नेताओं के लिए आभार, प्यार, स्नेह और बहुत सम्मान की भावना के साथ, मैं पूरी विनम्रता के साथ एक बार फिर पिछले पांच वर्षों में मुझे मंच और अवसर देने के लिए पार्टी को धन्यवाद देना चाहता हूं.”
बाद में एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने पार्टी के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि “किसी दूसरे देश और किसी दूसरी पार्टी में मेरी जैसी कहानी, जिसमें एक युवा, पसमांदा मुस्लिम और गैर-वंशवादी व्यक्ति हो, शायद संभव ही नहीं होती.”
Resignation Letter.
With utmost humility, sense of affection & gratitude i have once again submitted my resignation letter to @BJP4India & Hon’ble Shri @NitinNabin ji & have requested that the same be accepted.
Eternally grateful for guidance, love, respect and platform that… pic.twitter.com/yUvyJiWNdX
— Shehzad Jai Hind (@Shehzad_Ind) August 17, 2026
पूनावाला राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला के भाई हैं. दोनों के बीच सार्वजनिक रूप से मतभेद तब सामने आए थे, जब बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस के आंतरिक चुनावों में पार्टी नेतृत्व की खुलकर आलोचना की थी. इसके बाद तहसीन ने उनसे दूरी बना ली थी.
पुणे से आने वाले पूनावाला एक संपन्न आगा खान मुस्लिम परिवार से हैं. उन्होंने 2008 में कांग्रेस के लिए काम करना शुरू किया था. पूनावाला ने कानून की पढ़ाई की और कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी के साथ इंटर्नशिप की. इसके बाद वह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) में वॉलंटियर के तौर पर जुड़े. 2008 में अपना कोर्स पूरा करने के बाद उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस की मीडिया रिसर्च टीम के साथ इंटर्नशिप की.
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें यह बात “बहुत भावुक करने वाली लगी और मैं सच में आभारी हूं कि पार्टी ने मेरा इस्तीफा तुरंत स्वीकार करने से इनकार कर दिया और मुझसे अपने फैसले पर फिर से विचार करने को कहा.”
पूनावाला 2017 में बीजेपी में शामिल हुए थे और इससे पहले दिल्ली बीजेपी में भी जिम्मेदारियां संभाल चुके थे. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक और काफी सोच-विचार करने के बाद उन्होंने अंतिम फैसला लिया है कि “मैं बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी की सक्रिय प्राथमिक सदस्यता की अपनी भूमिका से मुझे मुक्त करने का अनुरोध करना चाहता हूं.”
कानून की पढ़ाई कर चुके पूनावाला ने 2017 में उस समय सुर्खियां बटोरी थीं, जब उन्होंने कांग्रेस के अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया को धांधली वाला बताया था. उन्होंने दावा किया था कि राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने के लिए चुनाव में उनके पक्ष में धांधली की गई थी. इस विवाद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी.
दिप्रिंट ने उस समय रिपोर्ट किया था कि पार्टी छोड़ते वक्त उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल के कार्यालय से संपर्क करने की बार-बार कोशिशों के बावजूद कांग्रेस नेताओं ने उनके साथ बहुत खराब व्यवहार किया. इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी थी.
पीएम मोदी ने कांग्रेस और उसकी पार्टी अध्यक्ष चुनाव प्रक्रिया पर हमला करने के लिए उनके दावों का इस्तेमाल किया था.
पूनावाला के अनुसार, यह फैसला “बहुत ज़रूरी आर्थिक और निजी परिस्थितियों” की वजह से लिया गया. उन्होंने कहा कि उन्होंने निजी क्षेत्र में जाने का फैसला किया है.
हालांकि, उन्होंने कहा कि जहां भी और जिस भी रूप में संभव होगा, वह प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के विजन और काम का समर्थन करते रहेंगे.
उन्होंने कहा, “जैसा कि मैंने कहा, मैं सिर्फ व्यवस्था छोड़ रहा हूं, व्यक्ति या विचार नहीं.”
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