नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्रता दिवस की स्पीच में ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी से राजनीतिक हलचल मचने के एक दिन बाद, विपक्ष ने इसे अपने ऊपर हमला बताया. इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी को समझाने की कोशिश की और इस शब्द की एक परिभाषा भी बताई.
रिजिजू ने X पर कहा कि यह टिप्पणी विपक्षी नेताओं के लिए नहीं थी. उन्होंने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द उन लोगों के लिए है जो माओवाद का समर्थन करते हैं, संविधान को नहीं मानते, अलगाववाद का समर्थन करते हैं या पूर्वोत्तर भारत को देश से अलग करने की कोशिश करते हैं.
उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विपक्षी नेताओं को दिमागी नक्सल नहीं कहा. सिर्फ ये लोग दिमागी नक्सल हैं: 1. जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते. 2. जो अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं. 4. जो चिकन नेक को काटकर नॉर्थ-ईस्ट को भारत से अलग करना चाहते हैं.”
संसदीय कार्य मंत्री ने JNU के पूर्व छात्र और एक्टिविस्ट शरजील इमाम के एक पुराने भाषण का वीडियो क्लिप भी शेयर किया. इमाम नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ सक्रिय रूप से प्रदर्शन कर रहे थे.
PM @narendramodi ji didn't say opposition leaders as Dimagi Naxals. Only following are Dimagi Naxals:
1. Who support Maoists and reject Indian Constitution.
2. Who stand with separatists & support Article 370.
4. Who want to cut chicken neck to separate North-East from India.— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) August 16, 2026
इस क्लिप में इमाम कथित तौर पर कहते हुए सुनाई दे रहे हैं: “अगर हमारे पास 5 लाख संगठित लोग हैं, तो हम भारत और नॉर्थ-ईस्ट को हमेशा के लिए अलग कर सकते हैं. अगर हमेशा के लिए नहीं, तो कम से कम एक-दो महीने के लिए.”
रिजिजू ने लिखा, “जो लोग इस तरह के लोगों का समर्थन करते हैं, सिर्फ उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहा जाता है.”
शनिवार को लाल किले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने एक “नए दुश्मन”, “दिमागी नक्सल” के बारे में चेतावनी दी.
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को खत्म कर दिया गया है, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में “दिमागी नक्सल” मौजूद हैं, जिन्हें “पहचानने और अलग-थलग करने” की जरूरत है, ताकि भारत के युवाओं को एकजुट करके विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा किया जा सके.
इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें जयराम रमेश भी शामिल हैं, ने प्रधानमंत्री पर हमला बोला. उन्होंने X पर लिखा, “पहले उन्होंने अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा. अब वह उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं. यह उनकी हताशा का पक्का संकेत है. यह अलग बात है कि वह आखिर में वही सब करने लगते हैं जिसकी ये तथाकथित ‘अर्बन नक्सल’ या अब ‘दिमागी नक्सल’ मांग या वकालत करते हैं. यह बेवजह नहीं है कि प्रधानमंत्री के पास MA है, जिसका मतलब मास्टर अब्यूजर है, क्योंकि वह Entire Political Science (पूरा पॉलिटिकल साइंस) में ऐसे ही हैं.”
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्हें “दिमागी नक्सल होने पर गर्व है”.
‘अर्बन नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल पर मोदी सरकार ने पहले क्या कहा था
शनिवार को प्रधानमंत्री द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द इस्तेमाल किए जाने के बीच, मोदी सरकार ने 2020 में तत्कालीन राज्यसभा सांसद के.जे. अल्फोंस के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि गृह मंत्रालय ‘अर्बन नक्सलाइट्स’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करता. अल्फोंस ने पूछा था कि ‘अर्बन नक्सलाइट्स’ कौन हैं और उनके खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
तत्कालीन गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा था: “‘अर्बन नक्सलाइट्स’ शब्द का इस्तेमाल भारत सरकार का गृह मंत्रालय नहीं करता. हालांकि, भारत सरकार की राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना वामपंथी उग्रवाद के सभी रूपों को संबोधित करती है, जिसमें शहरी गतिविधियां भी शामिल हैं.”
बाद में, फरवरी 2022 में सरकार ने फिर राज्यसभा को बताया था कि सरकार ‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करती, द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार. उस समय के गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद को बताया था कि वामपंथी उग्रवाद (LWE) के मामले में सरकार इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करती, चाहे वह शहरी इलाकों में हो या किसी दूसरी जगह.
यह जवाब BJP सांसद राकेश सिन्हा के एक सवाल के जवाब में दिया गया था. उन्होंने कहा था, “माओवाद अतिरिक्त संसदीय ताकतों और अर्बन नक्सलियों की वजह से फल-फूल रहा है, जो यूनिवर्सिटीज में बैठे हैं और पत्रकारिता की आड़ में देश को तोड़ रहे हैं.”
‘युवा पढ़े-लिखे लोगों को नक्सली बताना’
कॉकरेच जनता पार्टी (CJP), जिसने NEET पेपर लीक और दूसरी परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, ने सवाल उठाया कि सिर्फ सरकार से सवाल पूछने पर पढ़े-लिखे युवाओं को ‘नक्सली’ बताया जा रहा है.
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने X पर लिखा, “‘दिमागी नक्सल’ या ऐसा कुछ भी काम नहीं करेगा, प्रधानमंत्री. आप पढ़े-लिखे युवाओं को इतनी आसानी से ‘नक्सली’ आदि कैसे बता सकते हैं? सिर्फ इसलिए कि वे आपकी सरकार से सवाल करते हैं? यह सिर्फ अहंकार है. उनकी समस्याओं को हल करने में पूरी नाकामी है. खतरे की घंटी बज रही है. जागरूकता आ गई है.”
“Dimagi Naxal” or whatever is not going to work, Prime Minister. How could you loosely brand educated young people “naxalis” etc? Just because they question your government? Sheer arrogance! Sheer incompetence at resolving their problems!
Bells are ringing. The awakening is… https://t.co/DHuGkhWrGN
— Saurav Das (@SauravDassss) August 15, 2026
इस बीच, रविवार को BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष पर सवाल उठाया और वंदे मातरम विवाद को लेकर ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया.
BJP ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी ने कांग्रेस के मुख्यालय में पार्टी के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम का गायन बीच में रोकने की कोशिश की थी. कांग्रेस का कहना है कि सोनिया पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं, क्योंकि वह कुछ समय से खड़े थे.
भंडारी ने कहा, “मैं एक बहुत बुनियादी सवाल पूछना चाहता हूं: क्या कोई देशभक्त, कोई ऐसा भारतीय जो संविधान में विश्वास करता हो, भारतीय तिरंगे और स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करता हो और भारत की संप्रभुता और अखंडता में विश्वास करता हो, कभी स्वतंत्रता दिवस पर ‘वंदे मातरम’ के नारे से नाराज़ या परेशान हो सकता है? क्या कोई इसका विरोध करेगा? कोई देशभक्त नहीं करेगा. सिर्फ ‘दिमागी नक्सल इकोसिस्टम’ की सोच रखने वाले लोग ही वंदे मातरम का विरोध कर सकते हैं.”
उन्होंने कहा, “हमने कल यह सोच देखी, जब देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, कांग्रेस मुख्यालय में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के विरोध के रूप में. स्वतंत्रता दिवस पर वंदे मातरम के खिलाफ राहुल गांधी और सोनिया गांधी का विरोध ‘दिमागी नक्सल इकोसिस्टम’ की सोच की तरफ इशारा करता है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: 40 साल पहले हत्यारों की गोलियों से मारे गए जनरल वैद्य, दो महावीर चक्र पाने वाले सैनिक को देश भूला