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Tuesday, 7 July, 2026
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कर्नाटक के कई हिस्सों में सूखे की आशंका के बीच राज्य में स्थिति की समीक्षा करेंगे: शिवकुमार

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कलबुर्गी (कर्नाटक), सात जुलाई (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि राज्य के कई इलाकों में सूखे की आशंका के बीच वह वहां की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

हालांकि, सूखे जैसे हालात को देखते हुए कृषि ऋण माफी की मांग पर मुख्यमंत्री ने कोई पक्का वादा नहीं किया और कहा, ‘‘हम पहले इसकी जांच कर लें।’’

शिवकुमार ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं यहां सूखे जैसे हालात का जायजा लेने आया हूं। मैं लोगों और जन-प्रतिनिधियों से मिल रहा हूं। कुछ दिन में मैं बेलगावी इलाके का भी दौरा करूंगा।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘किसी इलाके को सूखा-ग्रस्त घोषित करने और उससे जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए एक कानूनी प्रक्रिया है।’’

कृषि ऋण माफी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘कितना ऋण है और कहां है? पहले इसकी जांच हो जाए फिर बात करते हैं।’’

इस दौरान लोगों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए याचिकाएं सौंपीं।

ऐसी शिकायतों को सुनने और उनका समाधान करने के लिए सरकार ने एक नया ‘प्रजा सेवा’ विभाग बनाया है, जिसके प्रमुख एक मंत्री होंगे। यह विभाग नागरिकों की याचिकाओं का अध्ययन करेगा और जहां भी संभव हो, राहत पहुंचाएगा।

राज्य के विकास और जल प्रबंधन के बारे में शिवकुमार ने कहा कि कम बारिश को लेकर पूरे देश में चिंता है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की स्थिति अपेक्षाकृत संतोषजनक है।

शिवकुमार ने कहा, ‘‘राज्यों के बीच पानी के विवादों का स्थायी समाधान खोजने के मकसद से, हमने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के साथ ऐतिहासिक स्तर की बातचीत की है। केंद्र सरकार ने कृष्णा, कावेरी और गोदावरी नदियों को जोड़ने वाली परियोजना के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग एक लाख करोड़ रुपये है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए और राज्य के लोगों के कल्याण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए मिलकर काम करने का फैसला किया है।’’

राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर शिवकुमार ने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का वोट देने का अधिकार नहीं छूटना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘यह राजनीति का मामला नहीं है; हर नागरिक के मतदान अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। बूथ स्तर के अधिकारियों को हर घर में कम से कम तीन बार जाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल हों। इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।’’

भाषा वैभव माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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