नई दिल्ली: बैंक में पासबुक अपडेट कराने पहुंची एक महिला की शिकायत से 10.24 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड का मामला सामने आया. आरोप है कि यह फ्रॉड तीन साल तक चलता रहा. पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ग्रेटर नोएडा शाखा की कर्मचारी दीपांशी पर बैंक अधिकारियों की आईडी का गलत इस्तेमाल करने, लेनदेन के अलर्ट बंद करने और ग्राहकों के बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट से पैसे निकालने का आरोप है.
इस मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है. इससे पहले गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने PNB के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. कई किसानों ने शिकायत की थी कि उनके बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट से पैसे निकाल लिए गए. इनमें कई ऐसे किसान हैं, जिन्हें जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन बेचने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार से मुआवजा मिला था.
दिप्रिंट ने पहले बताया था कि इन किसानों ने अपनी जीवनभर की कमाई बचाकर रखी थी. कई किसान इससे नया घर बनाने और बच्चों की शादी करने की योजना बना रहे थे, लेकिन ग्रेटर नोएडा के बिरौंडी गांव में रहने वाले कई किसानों के सामने अब अपनी जमा पूंजी को लेकर अनिश्चितता है.
CBI ने PNB के कर्मचारियों और खाताधारकों के खिलाफ दर्ज की FIR
CBI की FIR PNB की सेक्टर-पाई शाखा की शिकायत पर दर्ज हुई है. शिकायत में बैंक की ऑफिस असिस्टेंट/सब-स्टाफ दीपांशी और अन्य लोगों के नाम हैं. इनमें आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेंबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी शामिल हैं. कुछ अज्ञात लोगों और सरकारी कर्मचारियों के नाम भी शिकायत में हैं.
बैंक ने आरोप लगाया है कि इन लोगों ने मिलकर आपराधिक साजिश रची और धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी और खातों में हेरफेर के जरिए करीब 10.24 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया.
बैंक के चीफ मैनेजर और अधिकृत प्रतिनिधि अजय कुमार पांडे ने बैंक रिकॉर्ड के आधार पर शिकायत दर्ज कराई.
पासबुक अपडेट कराने पहुंची महिला के खाते से शुरू हुई जांच
CBI की FIR के मुताबिक, सेक्टर-पाई शाखा की ग्राहक संगीता अपने पति और बेटी के साथ पासबुक अपडेट कराने बैंक पहुंची थीं. वहां उन्हें पता चला कि 16 सितंबर को उनके खाते से तीन ऐसे लेनदेन हुए थे, जिनकी उन्हें जानकारी नहीं थी.
उन्होंने शाखा प्रमुख से मिलने की कोशिश की, लेकिन वह उस समय उपलब्ध नहीं थीं. इसके बाद बैंक कर्मचारी दीपांशी ने उनसे मुलाकात की और उन्हें समझाया कि ये लेनदेन सही हैं.
बाद में संगीता के पति की शिकायत शाखा प्रमुख तक पहुंची. जब शाखा प्रमुख ने दीपांशी से इस बारे में पूछा तो उसने बताया कि संगीता ने अपने पति से फोन पर बात की थी और कहा था कि उसने प्रॉपर्टी में निवेश किया है और विवादित रकम आशुतोष पाठक के खाते में भेजी है.
जांच के दौरान इन तीन लेनदेन से जुड़े जरूरी वाउचर भी बैंक में नहीं मिले. इसके बाद शाखा प्रमुख को शक हुआ.
FIR के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दीपांशी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि ये लेनदेन आशुतोष पाठक के कहने पर किए गए थे.
FIR में कहा गया है कि दीपांशी को जानने वाले आशुतोष पाठक ने भी कथित तौर पर इस तरीके के बारे में बताया और ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे निकालने की बात स्वीकार की. आरोप है कि इसके लिए बैंक अधिकारियों की जानकारी और अनुमति के बिना उनकी यूजर आईडी का इस्तेमाल किया गया.
तीन साल तक अलग-अलग खातों में भेजे गए पैसे
बैंक की जांच में पता चला कि आशुतोष पाठक का खाता दीपांशी ने ही खोला था. इसके बाद कई ग्राहकों के खातों से पैसे निकालकर आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेंबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी के खातों में भेजे गए.
FIR के मुताबिक, कई मामलों में पैसे पहले दूसरे खातों में भेजे गए और फिर आशुतोष पाठक के खाते में पहुंचाए गए. कुछ रकम सीधे उनके खाते में गई और कुछ पैसे निकाल भी लिए गए.
CBI के मुताबिक, सभी संदिग्ध लेनदेन आखिरकार आशुतोष पाठक के खाते तक पहुंचे. इससे ग्राहकों के पैसे को एक तय तरीके से दूसरे खातों में भेजने का पैटर्न सामने आया.
बैंक अधिकारियों की आईडी का कथित गलत इस्तेमाल
PNB की शिकायत के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला कि संबंधित लेनदेन से जुड़े वाउचर बैंक के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं थे.
FIR में कहा गया है कि सिस्टम लॉग, यूजर एक्टिविटी रिकॉर्ड और लेनदेन की जांच से पहली नजर में पता चला कि करीब तीन साल तक ग्राहकों के खातों में कई अनधिकृत लेनदेन किए गए. आरोप है कि दीपांशी ने शाखा के अलग-अलग अधिकारियों की CBS यूजर आईडी का गलत इस्तेमाल किया.
इसके अलावा कुछ ग्राहकों के मोबाइल लेनदेन अलर्ट भी पैसे निकालने से पहले बंद कर दिए गए. इससे ग्राहकों को अनधिकृत लेनदेन की जानकारी मिलने में देरी हुई.
एफडी तोड़कर भी निकाली गई रकम
CBI FIR के मुताबिक, कई फिक्स्ड डिपॉजिट में आशुतोष पाठक और अन्य आरोपियों को संयुक्त खाताधारक बनाया गया. इसके बाद एफडी के पैसे वापस पाने वाले खाते की जानकारी बदली गई और एफडी को समय से पहले बंद कर दिया गया.
एफडी बंद होने के बाद मिली रकम संदिग्ध आरोपी के खाते में जमा कराई गई.
CBI के मुताबिक, ग्राहकों के खातों से निकली रकम कई अलग-अलग खातों में भेजी गई. इनमें आशुतोष कुमार पाठक और अन्य लोगों के खाते शामिल हैं. पैसों के लेनदेन से ग्राहकों की रकम को एक जगह इकट्ठा कर दूसरी जगह भेजने का पैटर्न सामने आया.
10.24 करोड़ की रकम, लेकिन जांच अभी जारी
PNB के मुताबिक, ग्राहकों के खातों से जुड़े लेनदेन का मिलान अभी किया जा रहा है. लेनदेन की संख्या काफी ज्यादा है और रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद प्रभावित खातों और लाभ पाने वाले लोगों की संख्या बढ़ सकती है.
बैंक ने कहा है कि अभी तक करीब 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी की पहचान हुई है. हालांकि अंतिम रकम का मिलान अभी पूरा नहीं हुआ है.
FIR के मुताबिक, दीपांशी पर आशुतोष कुमार पाठक, प्रदीप कुमार, मेंबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी, सरोज देवी और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर ग्राहकों के खातों से 10.24 करोड़ रुपये निकालने की साजिश का आरोप है.
दीपांशी बैंक की ऑफिस असिस्टेंट/सब-स्टाफ थी और बैंक के नियमों के तहत वह खुद से इस तरह के लेनदेन करने के लिए अधिकृत नहीं थी. FIR में कहा गया है कि अलग-अलग अधिकारियों की CBS यूजर आईडी का इस्तेमाल कैसे हुआ, क्या ये आईडी साझा की गई थीं या किसी और तरीके से हासिल की गईं और संबंधित अधिकारियों व लाभ पाने वाले लोगों की क्या भूमिका थी, इसकी विस्तृत जांच जरूरी है.
बैंक का आरोप है कि दीपांशी ने अपने पास उपलब्ध सिस्टम एक्सेस का गलत इस्तेमाल किया और ग्राहकों के खातों से अनधिकृत पैसे निकालने के साथ लेनदेन से जुड़े वाउचर भी नष्ट कर दिए.
PNB की शुरुआती जांच में बैंकिंग क्रेडेंशियल के अनधिकृत इस्तेमाल, ग्राहकों के खातों में बदलाव, रकम को दूसरे खातों में भेजने, एफडी की जानकारी बदलने और एफडी को समय से पहले बंद करने जैसी बातें सामने आई हैं.
बैंक ने मामले में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. विस्तृत जांच जारी है.
FIR में यह भी कहा गया है कि जिन ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे निकाले गए, उनकी भूमिका के बारे में अभी पूरी तरह पता नहीं चला है. बैंक के मुताबिक, अब तक सभी प्रभावित ग्राहकों की ओर से औपचारिक शिकायत नहीं मिली है. इसलिए इस पहलू की भी जांच की जा रही है.
PNB ने CBI से मामले की जांच करने का अनुरोध करते हुए कहा है कि बैंकिंग प्लेटफॉर्म का गलत इरादे से इस्तेमाल गंभीर मामला है और कानून का उल्लंघन है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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