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Saturday, 31 October, 2026
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श्रीनगर सांसद रुहुल्लाह मेहदी 3 नवंबर को NC और लोकसभा सीट से देंगे इस्तीफा, बोले—वादे पूरे नहीं हुए

अनुच्छेद 370 बहाली, कैदियों की रिहाई और लोगों के अधिकारों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप.

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बडगाम: जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रहा तनाव शनिवार को खुलकर सामने आ गया. श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि वह 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा सदस्यता, दोनों से इस्तीफा देंगे.

मेहदी 3 नवंबर को बडगाम के बेहिश्त-ए-जहरा पार्क में अपने पिता आगा सैयद मेहदी की पुण्यतिथि पर लोगों को संबोधित करेंगे. इसी दौरान वह अपने इस्तीफे पर औपचारिक कार्रवाई करेंगे.

मेहदी ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनाव के दौरान जनता से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया और न ही उन पर काम किया गया. उन्होंने खास तौर पर अनुच्छेद 370 की बहाली, कुछ कैदियों की रिहाई और लोगों के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा उठाया.

उन्होंने किसी तरह की ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ में शामिल होने की अटकलों को भी खारिज किया. मेहदी ने कहा कि उनका फैसला किसी पद या व्यक्तिगत शिकायत की वजह से नहीं है, बल्कि यह सिद्धांतों पर आधारित है.

मेहदी के कार्यालय की ओर से जारी बयान में पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला किया गया. बयान में आरोप लगाया गया कि पार्टी नेतृत्व जम्मू-कश्मीर को परिवार की संपत्ति की तरह चला रहा है और सत्ता हासिल करने के लिए किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया.

बयान में कहा गया कि पार्टी ने अनुच्छेद 370 की बहाली, कैदियों की रिहाई और लोगों के अधिकारों की रक्षा का वादा किया था. लेकिन सत्ता में आने के बाद इन वादों पर काम नहीं किया गया.

लोकसभा सीट से इस्तीफे को लेकर बयान में कहा गया कि यह सीट जनता से किए गए वादे के आधार पर जीती गई थी और मेहदी उस वादे के साथ धोखा करने में भागीदार बनने के बजाय सीट छोड़ देंगे.

जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा ने कहा कि अगर मेहदी पार्टी छोड़ते हैं तो वह अकेले जाएंगे और इससे पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस में किसी तरह की नाराजगी से इनकार किया. राणा ने कहा कि पार्टी मजबूत है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार भी मजबूत है.

उन्होंने कहा कि कुछ विधायकों में मंत्री बनने की इच्छा हो सकती है, लेकिन मंत्री पद सीमित हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही राज्य का दर्जा बहाल होगा और इसके बाद मंत्रियों की नियुक्ति की जाएगी.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी में असंतोष की खबरें सामने आई थीं. हाल ही में चार नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था.

इनमें कुपवाड़ा के त्रेहगाम से मीर सैफुल्लाह, श्रीनगर के खनयार से अली मोहम्मद सागर, हब्बा कदल से शमीमा फिरदौस और पहलगाम से अल्ताफ अहमद वानी शामिल हैं.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के कश्मीर प्रांतीय अध्यक्ष शोएब अहमद मीर ने कहा कि कुछ नेताओं ने कैबिनेट विस्तार के बाद अपनी चिंताएं जताई थीं. उन्होंने इसे पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया.

उन्होंने कहा कि कुछ विधायकों ने शुक्रवार को हुई बैठक में ‘दरबार मूव’ को लेकर चर्चा की थी. हालांकि, उन्होंने 27 सदस्यों के असंतुष्ट होने की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया और इसके पीछे बीजेपी का हाथ होने का आरोप लगाया.

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