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Saturday, 16 May, 2026
होमदेश2026 NEET पेपर लीक: राजस्थान के परिवार के 5 सदस्य 2025 में भी परीक्षा पास हुए थे, अब नए सवाल उठे

2026 NEET पेपर लीक: राजस्थान के परिवार के 5 सदस्य 2025 में भी परीक्षा पास हुए थे, अब नए सवाल उठे

CBI की जांच के अनुसार, बिवाल परिवार का एक सदस्य, जो MBBS कर रहा था, उसके परिवार और उस सिंडिकेट के बीच की कड़ी था, जिसके पास NEET 2026 के प्रश्न पत्र तक अवैध पहुंच थी.

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नई दिल्ली: हो सकता है कि सिर्फ NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र ही लीक नहीं हुआ हो. अब 2025 में हुए ऐसे ही एक लीक को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जब राजस्थान के बीवाल परिवार के पांच सदस्य पहली ही कोशिश में परीक्षा पास कर गए थे.

इसका पता जांच अधिकारियों को तब चला जब उन्होंने जयपुर के जमवा रामगढ़ से गिरफ्तार दो भाइयों—मांगीलाल और दिनेश बीवाल—से जुड़े सुरागों की जांच शुरू की. दिनेश ने अपने बेटे के लिए नीट 2026 के प्रश्न हासिल किए थे. उसके बेटे ने कक्षा 10 में 43 प्रतिशत अंक और कक्षा 12 में मुश्किल से 50 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा अंक हासिल किए थे. ऐसे नंबर मेडिकल करियर के लिए ज्यादा भरोसा नहीं दिलाते.

2026 में जयपुर शहर के ग्रामीण इलाके में बीवाल परिवार के तीन उम्मीदवार NEET-UG परीक्षा में शामिल हुए थे. दिनेश के बेटे के अलावा परिवार के दो और सदस्य भी इस बेहद प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षा में बैठे थे. अब दोनों भाइयों के बेटे लापता हैं, जबकि उनके पिता दिनेश बीवाल और मांगीलाल बीवाल को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने गिरफ्तार कर लिया है.

दोनों भाइयों को पहले जयपुर में राजस्थान स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप यानी SOG ने हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में उन्हें CBI को सौंप दिया गया. सीबीआई टीम को जानकारी मिली थी कि असली प्रश्नों में से करीब 100 सवाल 500-600 सवालों वाले एक ‘गेस पेपर’ का हिस्सा थे, जो व्हाट्सऐप पर घूम रहा था.

बीवाल परिवार के वकील एडवोकेट ए. पी. सिंह ने कहा कि पूरा मामला “साजिश और अपुष्ट शिकायतों की बू देता है.”

सिंह ने दिप्रिंट से कहा, “उनके बच्चे एक ही बार में परीक्षा पास कर गए, इसलिए पड़ोसियों को परिवार से जलन हो गई. इसी वजह से पड़ोसियों ने पुलिस में शिकायत की और उन्हें गिरफ्तार करवा दिया.”

उन्होंने आगे कहा, “यह एक दिलचस्प मामला है जिसमें परिवार के सभी पुरुष सदस्यों को एक ही केस में आरोपी बना दिया गया है.”

केंद्रीय एजेंसी का कहना है कि उसने अब उस मुख्य “स्रोत” की पहचान कर ली है जिसने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षा की पवित्रता से समझौता किया. एजेंसी ने प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया है, जो प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एनटीए समिति का हिस्सा थे और जिन पर भारी रकम लेकर प्रश्नपत्र लीक करने का आरोप है.

जयपुर से सीकर, मुंबई और वाराणसी तक

CBI को पता चला है कि प्रोफेसर का पुणे में एक सहयोगी था, इसे भी अब गिरफ्तार कर लिया गया है. उस पर आरोप है कि उसने 2026 की परीक्षा की तय तारीख से पहले प्रश्नपत्र बेचने में मदद की.

बीवाल परिवार की भूमिका की अभी जांच की जा रही है. राजस्थान एसओजी और बाद में सीबीआई को मिले शुरुआती सुरागों के मुताबिक, बीवाल परिवार के पांच उम्मीदवारों ने NEET-UG 2025 की परीक्षा दी थी और सभी पास हो गए थे.

जांच अधिकारियों के मुताबिक, परिवार के इतिहास की जांच में पता चला कि तीन बहनें जयपुर, मुंबई और वाराणसी के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रही हैं. इनमें से एक इस साल फिर से नीट परीक्षा दे रही थी. यह जानकारी CBI जांच में सामने आई है.

मांगीलाल के दो और बच्चों ने भी सवाई माधोपुर और दौसा में MBBS की पढ़ाई शुरू कर दी है. एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी की कई टीमों ने इन मेडिकल संस्थानों से बीवाल परिवार के इन छात्रों की उम्मीदवारी से जुड़े सबूत जुटाए हैं.

अब तक की CBI जांच के मुताबिक, मांगीलाल का बेटा, जिसने पिछले साल परीक्षा पास की थी, उसके परिवार और NEET 2026 के प्रश्नपत्र तक गैरकानूनी पहुंच रखने वाले गिरोह के बीच कड़ी था.

CBI ने मांगीलाल, उसके बेटे और दिनेश बीवाल की रिमांड मांगते हुए गुरुवार को आरोप लगाया, “CBI अधिकारियों की पूछताछ में मांगीलाल के बेटे ने बताया कि वह सीकर में कोचिंग के दौरान यश यादव से संपर्क में आया था. यश यादव गुरुग्राम मामले का एक और आरोपी है. उसने दावा किया था कि वह पैसे लेकर NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र लीक कर सकता है.”

राजस्थान SOG की शुरुआती जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि परिवार का रिकॉर्ड पिछले साल की NEET परीक्षा की पवित्रता पर सवाल खड़े करता है. एक अधिकारी ने कहा, “यह बहुत बड़ा संयोग है कि एक ही परिवार के पांच बच्चे इतनी कठिन प्रतियोगी परीक्षा दें और सभी पहली बार में सफल हो जाएं.”

हालांकि फिलहाल CBI की जांच का दायरा इसी साल हुई परीक्षा की पवित्रता से समझौते तक सीमित है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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