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Thursday, 24 September, 2026
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दूध से नहीं बने प्रोडक्ट को ‘पनीर’ नहीं कह सकेंगे, FSSAI ने दिया प्रस्ताव

फूड रेगुलेटर का यह प्रस्ताव फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (प्रोहिबिशन एंड रिस्ट्रिक्शन्स ऑन सेल्स) अमेंडमेंट रेगुलेशन्स, 2026 के ड्राफ्ट का हिस्सा है. इस पर 60 दिनों तक आपत्तियां और सुझाव दिए जा सकते हैं.

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नई दिल्ली: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने उन प्रोडक्ट्स के लिए ‘पनीर’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है, जो दूध से नहीं बनी चीज़ों से तैयार किए जाते हैं. इसका मकसद ग्राहकों को डेयरी प्रोडक्ट्स और डेयरी एनालॉग्स के बीच भ्रम से बचाना है. डेयरी एनालॉग्स ऐसे प्रोडक्ट होते हैं, जिन्हें बिना दूध वाली चीज़ों से बनाया जाता है और उनका स्वाद, बनावट या डेयरी प्रोडक्ट की दूसरी खासियतों जैसी बनाई जाती हैं.

आम पनीर दूध से बनाया जाने वाला प्रोडक्ट है. इसमें दूध को जमाया जाता है और फिर दही जैसे हिस्से को मट्ठे से अलग किया जाता है. इसके उलट, डेयरी एनालॉग्स में दूध की जगह वनस्पति फैट, तेल या प्रोटीन जैसी गैर-दूध वाली चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि डेयरी प्रोडक्ट जैसी खासियतें लाई जा सकें.

यह प्रस्ताव Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Amendment Regulations, 2026 के ड्राफ्ट का हिस्सा है. इसे 22 सितंबर को जारी किया गया था. इस ड्राफ्ट के जरिए 2011 के नियमों में बदलाव करने का प्रस्ताव है. इसमें “दूध से नहीं बने घटकों से तैयार पनीर” को उन प्रोडक्ट्स की सूची में शामिल करने की बात कही गई है, जिनकी बिक्री पर रोक लगाई जाएगी.

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब एनालॉग पनीर पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. बाजारों में ऐसे प्रोडक्ट तेजी से आम हो रहे हैं. चिंता है कि अगर इन्हें आम पनीर के नाम से बेचा, लेबल किया या प्रचारित किया गया तो ग्राहक इन्हें असली पनीर समझ सकते हैं.

FSSAI ने अपनी अधिसूचना में कहा कि यह बदलाव ऐसे प्रोडक्ट्स को ग्राहकों के सामने किस तरह पेश किया जाता है, इस मुद्दे को दूर करने के लिए किया जा रहा है. अधिसूचना में कहा गया है, “इस संशोधन का प्रस्ताव ऐसे नियम में किया गया है, जिससे एनालॉग प्रोडक्ट्स को पनीर के रूप में बनाने और बेचने पर रोक लगाई जा सके. इसका मकसद प्रोडक्ट की प्रकृति और उसमें इस्तेमाल चीजों को लेकर ग्राहकों को गुमराह होने से बचाना है.”

FSSAI ने यह भी कहा कि ‘Analogue in Dairy Context’ कैटेगरी के तहत पहले से लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन वाले प्रोडक्ट्स को अपने नाम, लेबल या मार्केटिंग में ‘Paneer’ शब्द का इस्तेमाल बंद करना होगा.

प्रस्तावित बदलाव के तहत Food Safety and Standards (Prohibition and Restrictions on Sales) Regulations, 2011 में एक नया क्लॉज जोड़ा जाएगा. इसमें दूध से नहीं बने घटकों से तैयार पनीर की परिभाषा दी जाएगी.

प्रस्तावित रोक उन प्रोडक्ट्स पर लागू होगी, जिनमें दूध से मिलने वाले घटकों की जगह पूरी तरह या कुछ हद तक गैर-दूध वाली चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे प्रोडक्ट देखने में, उनकी बनावट या इस्तेमाल के मामले में आम डेयरी प्रोडक्ट जैसे हो सकते हैं. लेकिन नियमों के तहत उन्हें अलग कैटेगरी में रखा जाता है.

इस मुद्दे पर कई राज्यों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कार्रवाई भी की है. रेगुलेटर्स दूध से बने प्रोडक्ट्स और गैर-डेयरी विकल्पों के बीच साफ अंतर करने की कोशिश कर रहे हैं.

महाराष्ट्र ने जुलाई-अगस्त में एनालॉग या गैर-डेयरी पनीर के उत्पादन, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक लगाई थी. इसके बाद गुजरात ने भी एनालॉग पनीर, चीज और मक्खन पर रोक लगाने की घोषणा की.

FSSAI के वेस्ट रीजन ने पहले ही फूड बिजनेस से जुड़े लोगों को निर्देश दिया था कि वे चीज एनालॉग को पनीर के रूप में न बेचें. ऐसे प्रोडक्ट इस्तेमाल करने वाले प्रतिष्ठानों से मेन्यू या डिस्प्ले बोर्ड पर इसके इस्तेमाल की जानकारी देने को भी कहा गया था.

नई अधिसूचना अभी सिर्फ एक ड्राफ्ट नियम है और इससे पूरे देश में अंतिम तौर पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है. FSSAI ने राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से 60 दिनों तक संबंधित पक्षों और आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं.

इस अवधि में मिले सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद प्रस्तावित बदलाव को अंतिम रूप दिया जाएगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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