नई दिल्ली: बेंगलुरु के कारोबारी और A1 Sports World के संस्थापक कार्तिक SG ने यह घोषणा करने के बाद ऑनलाइन बहस छेड़ दी है कि उनकी कंपनी अब राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश या बिहार के पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी नहीं देगी.
बुधवार को कार्तिक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि कंपनी ने इन चार राज्यों के पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी नहीं देने का फैसला किया है. यह फैसला उनकी टीम के अंदर एक पूर्व कर्मचारी से जुड़ी एक घटना को लेकर हुई चर्चा के बाद लिया गया. कार्तिक ने उस पूर्व कर्मचारी पर महिला सहकर्मियों के साथ गलत व्यवहार करने का आरोप लगाया.
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मुझे इसके लिए माफ करें… लेकिन आज हमने लंबी चर्चा और बहस के बाद यह बात बिल्कुल साफ कर दी है… हम अपनी कंपनी में उत्तर भारत के इन चार राज्यों से आने वाले किसी भी पुरुष उम्मीदवार को नौकरी नहीं देंगे.” उन्होंने यह भी कहा कि इन राज्यों की महिला उम्मीदवारों ने इस फैसले का समर्थन किया है.
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए इस फैसले की जल्द ही आलोचना होने लगी. यूजर्स ने कंपनी पर क्षेत्र के आधार पर पक्षपात करने और भर्ती में भेदभाव करने का आरोप लगाया. दूसरे उद्यमियों और CEOs की ओर से भी कार्तिक की आलोचना की गई.
उद्यमी आदित्य आर्य ने इस फैसले पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को नौकरी देने का फैसला उसके राज्य के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी क्षमता और व्यवहार के आधार पर होना चाहिए.
उन्होंने कार्तिक की पोस्ट के जवाब में लिखा, “सोचिए, भर्ती करने में कोई इतना खराब हो कि लोगों की क्षमता और व्यवहार को अलग-अलग जांचने के बजाय पूरे-पूरे राज्यों को ही ब्लैकलिस्ट कर दे. और फिर एक कर्मचारी को अपनी बात सही साबित करने के लिए इस्तेमाल करे. यह पोस्ट UP, राजस्थान, बिहार या MP के बारे में कम और आपकी भर्ती प्रक्रिया के बारे में ज्यादा बताती है.”
एक्स पर एक अन्य यूजर ने इस फैसले को “अपने ही देश के लोगों के प्रति बेहद अज्ञानतापूर्ण, गैर-पेशेवर और पक्षपाती” बताया.
फैसले के पीछे की वजह
भर्ती के इस फैसले को लेकर बहस और आलोचना कार्तिक की ओर से फैसले का बचाव करने वाली कई पोस्ट किए जाने के बाद भी जारी रही.
उन्होंने हाल की एक घटना का जिक्र किया. इसमें चार राज्यों में से एक राज्य के एक पुरुष कर्मचारी को कथित तौर पर एक महिला सहकर्मी के साथ गलत व्यवहार और उसे परेशान करने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था.
कार्तिक ने कहा, “यह मामला दो हफ्ते पहले शुरू हुआ, जब ऊपर बताए गए राज्यों में से एक राज्य के एक कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया. उसे दो बार चेतावनी देने के बावजूद वह महिला कर्मचारियों के साथ गलत व्यवहार कर रहा था और उनमें से एक पर जबरदस्ती कर रहा था.”
उन्होंने आगे कहा, “क्या आपको लगता है कि ऐसी सोच और विचारधारा वाले पुरुष अवसर पाने के लायक भी हैं?”
कार्तिक ने आगे भी अपने फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि यह फैसला महिला कर्मचारियों की ओर से उठाई गई चिंताओं के बाद लिया गया था और इसका उद्देश्य कार्यस्थल की सुरक्षा और व्यवहार से जुड़ी उन समस्याओं को दूर करना था, जिनका उन्होंने जिक्र किया था.
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