नई दिल्ली: रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों के प्रदर्शन वाली जगह से करीब 130 किलोमीटर दूर जमशेदपुर में पहचान को लेकर एक और आंदोलन चल रहा है. वहां भी नारे, आवाजें और पोस्टर हैं, लेकिन इस बार मामला अलग है. “जमशेदपुर FC (फुटबॉल क्लब) बचाओ, भारतीय फुटबॉल बचाओ,” ये पोस्टर लिए प्रदर्शनकारियों ने साकची में टाटा स्टील कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस का घेराव किया.
स्टील सिटी के फुटबॉल फैंस सड़कों पर उतरकर मांग कर रहे हैं कि टाटा स्टील भारतीय सुपर लीग (ISL) से जमशेदपुर FC को हटाने का अपना फैसला वापस ले. ISL देश की सबसे बड़ी फुटबॉल लीग है.
जमशेदपुर FC के आदिवासी फैन क्लब द ट्राइब्स आर्मी के एडमिन 27 साल के राजा हांसदा ने द प्रिंट से कहा, “जमशेदपुर को हमेशा फुटबॉल पसंद करने वाले शहर के रूप में जाना जाता है और हमें भरोसा था कि क्लब आगे बढ़ता रहेगा. हमने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन हमें अपने क्लब को बचाने की मांग करने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा. इस क्लब ने मुझे दोस्ती, यादें, एक समुदाय का हिस्सा होने का एहसास और बिल्कुल अलग-अलग जगहों के लोगों के साथ एक साथ आने की वजह दी है.”
सिर्फ एक फुटबॉल क्लब दांव पर नहीं है. कई लोगों के लिए जमशेदपुर FC को सपोर्ट करना शहर से जुड़ाव महसूस करने का एक तरीका है.
उन्होंने कहा, “यह क्लब जमशेदपुर की पहचान, यहां के लोगों और हमारे सभी के जुनून को दिखाता है. हममें से कई लोगों के लिए यह क्लब शहर, उसकी फुटबॉल संस्कृति और अगली पीढ़ी के बीच एक कड़ी है.”
फैंस को डर है कि ISL से जमशेदपुर FC के बाहर होने से झारखंड के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रोफेशनल भारतीय फुटबॉल टीम तक पहुंचने का रास्ता कमजोर हो जाएगा. ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने क्लब को 12 अगस्त तक अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की समय सीमा दी है. ऐसे में समर्थकों को उम्मीद है कि उनका प्रदर्शन टाटा स्टील को सीनियर टीम को जारी रखने के लिए मना सकता है.
जमशेदपुर FC के फैन क्लब द रेड माइनर्स के संस्थापक सदस्यों में से एक 31 साल के शेख इमरान के लिए यह घोषणा किसी झटके से कम नहीं थी. उन्होंने कहा कि जब क्लब का बयान सोशल मीडिया पर आया तो फैंस “हैरान, निराश और गुस्से में” थे.
उन्होंने दूसरे फैन ग्रुप्स से बात करना शुरू किया और टाटा स्टील कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करने का फैसला किया. क्लब के अलावा, गुस्सा राज्य की पहचान खोने को लेकर भी है.
इमरान ने कहा, “मेरे लिए जमशेदपुर FC हमारे शहर की पहचान, गर्व और सपनों को दिखाता है.”

उन्हें अभी भी 1 दिसंबर 2017 याद है, जब वह पहली बार फर्नेस यानी JRD टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स गए थे. वहां उन्होंने जमशेदपुर FC को मौजूदा चैंपियन एटलेटिको डी कोलकाता के खिलाफ खेलते हुए देखा था. यह पहली बार था जब उन्होंने स्टेडियम के अंदर फुटबॉल मैच देखा था.
उन्होंने कहा, “हमने अपने साथी रेड माइनर्स के साथ पहले मैच के लिए बैनर, नारे और पोस्टर तैयार करने की योजना बनानी शुरू की. जब मैंने फर्नेस को पूरी तरह भरा हुआ देखा, तो जमशेदपुर और आसपास के लोगों की प्रतिक्रिया देखकर मैं बहुत भावुक हो गया. यह ऐसा अनुभव था जिसे मैं हमेशा याद रखूंगा.”
इमरान ने कहा कि नौ साल बाद यह क्लब शहर की फुटबॉल संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन चुका है. उनके मुताबिक, सबसे बड़े बदलावों में से एक बच्चों के बीच दिखाई देता है.
उन्होंने कहा, “पहले बच्चे ब्राजील या मैनचेस्टर यूनाइटेड की जर्सी पहनते थे. आज कई बच्चे गर्व से जमशेदपुर FC की जर्सी पहनते हैं. वे अपने ही शहर के लिए खेलने का सपना देखते हैं. इस क्लब ने सबसे बड़ा बदलाव यही लाया है.”
जुड़ाव की यही भावना इस फैसले को फैंस के लिए और ज्यादा दुखद बनाती है.
इमरान ने कहा, “हम टाटा को इस शहर को बनाते हुए देखकर बड़े हुए हैं. जमशेदपुर FC लोगों के लिए एक और तोहफा जैसा लगा. इसलिए जब वह तोहफा छीन लिया जाता है, तो यह निजी नुकसान जैसा लगता है. ऐसा लगता है कि हम उस चीज का एक हिस्सा खो रहे हैं जो इस शहर को खास बनाती है.”
‘बच्चे इस क्लब में शामिल होने का सपना देखते हैं’
31 जुलाई को जमशेदपुर FC ने ऐलान किया कि वह 2026-27 सीजन से ISL से बाहर हो रहा है. क्लब ने कहा कि अब उसका ध्यान सीनियर टॉप-लेवल टीम चलाने के बजाय जमीनी स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को तैयार करने पर रहेगा.
जमशेदपुर FC के बयान में कहा गया, “हम जमीनी स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देने और विकसित करने का काम जारी रखेंगे. हम पूरे भारत में युवा फुटबॉल प्रतिभाओं को खोजते रहेंगे, ताकि जमीनी स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल तक युवा खिलाड़ियों के लिए एक मजबूत रास्ता बनाया जा सके.”
खिलाड़ियों के लिए क्लब का बाहर होना उस रास्ते को खतरे में डालता है, जिसने स्थानीय फुटबॉल खिलाड़ियों को प्रोफेशनल खेल तक पहुंचाया है.
16 साल के अपने प्रोफेशनल करियर में मोहन बागान और जमशेदपुर FC के लिए खेल चुके अनुभवी मिडफील्डर प्रणय हलदर टाटा फुटबॉल एकेडमी (TFA) से आए हैं. उन्होंने कहा कि यह खबर अचानक आई. खिलाड़ियों को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला था कि सीनियर टीम ISL से बाहर होने वाली है.
हलदर ने कहा, “हम प्रैक्टिस कर रहे थे, तभी हमें यह खबर मिली. कोई संकेत नहीं दिया गया था.”
उन्होंने कहा कि कई सालों से जमशेदपुर FC ने युवा खिलाड़ियों, खासकर झारखंड के खिलाड़ियों को एक मंच दिया है. सीनियर टीम नहीं होने पर कई खिलाड़ियों को एक बार फिर मौके की तलाश में राज्य से बाहर जाना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा, “झारखंड के कई जूनियर खिलाड़ी भारतीय फुटबॉल में प्रोफेशनल तौर पर खेल रहे हैं. अंडर-16 और अंडर-14 के ज्यादातर खिलाड़ी झारखंड से हैं. यह उनके लिए बहुत बड़ा मंच था. अब उन्हें फिर पश्चिम बंगाल जैसे दूसरे राज्यों में जाकर अपनी किस्मत आजमानी पड़ेगी.”
बहुमुखी प्रतिभा वाले डिफेंडर निखिल बरला सीधे TFA से सीनियर टीम में आए थे. उन्होंने कहा कि अपने घरेलू क्लब के लिए खेलना उनका सपना था.
बरला ने कहा, “TFA से JFC तक, सीनियर टीम के लिए खेलना मेरा सपना था. मेरा सपना पूरा हुआ था. यह सोचकर बहुत बुरा लग रहा है कि मेरा घरेलू क्लब बंद हो रहा है.”

खिलाड़ियों ने यह भी बताया कि क्लब ने शहर के फुटबॉल माहौल को कैसे प्रभावित किया. बरला ने भरे हुए स्टेडियम और फैंस के समर्थन को याद किया. उन्होंने कहा कि फर्नेस का माहौल टीम को प्रेरित करता था.
उन्होंने कहा, “TFA के बच्चे इस क्लब में शामिल होने का सपना देखते हैं.”
गोलकीपर अमृत गोपे 2017-18 से जमशेदपुर FC से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि उनके करियर का बड़ा हिस्सा इसी क्लब के आसपास बना है.
उन्होंने पूछा, “अगर सीनियर टीम ही नहीं होगी तो युवा क्या देखेंगे और खेलने के लिए क्यों आएंगे? दूसरे राज्य के क्लब उन्हें अपनी टीम में क्यों लेंगे?”

हलदर ने इस फैसले को “भारतीय फुटबॉल के लिए बुरी खबर” बताया. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में जमशेदपुर FC चैंपियनशिप के लिए लड़ रहा था, न कि टेबल में सबसे नीचे रहने के लिए संघर्ष कर रहा था. 2021-22 सीजन में क्लब ने ISL लीग विनर्स शील्ड जीती थी. हेड कोच ओवेन कॉयल के तहत टीम ने रिकॉर्ड 43 अंक हासिल किए थे.
हलदर ने कहा, “यह बहुत बड़ा मंच था.” उन्होंने बताया कि दो या तीन क्लब पहले ही उनसे संपर्क कर चुके हैं, लेकिन पूरी टीम को अभी भी उम्मीद है कि मैनेजमेंट अपना फैसला वापस ले सकता है.
उन्होंने कहा, “अगर फैसला वापस होने की 1 प्रतिशत भी संभावना है, तो भी हम अभी सकारात्मक हैं.”
जमशेदपुर FC के CEO मुकुल चौधरी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
‘मैं रो पड़ा’
क्लब के अपना फैसला वापस लेने की उम्मीद ने फैंस को सड़कों पर ला दिया है. जो खिलाड़ी इसी क्लब से आगे बढ़े हैं, उनके लिए यह प्रोफेशनल फुटबॉल तक पहुंचने का रास्ता खोने जैसा है. और क्लब के सबसे छोटे फैंस के लिए, यह अनिश्चितता उन सपनों तक पहुंच गई है जो अभी बनना शुरू ही हुए हैं.
इमरान ने कहा कि इससे पहले वह कभी प्रदर्शन में शामिल होने वाले व्यक्ति नहीं थे. लेकिन क्लब को हटाने के फैसले ने उन्हें बदल दिया.
उन्होंने कहा, “मैं ऐसा इंसान नहीं हूं जो प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरता है. लेकिन यह क्लब मेरे लिए इतना मायने रखता है कि मैं घर पर बैठकर इसे खत्म होते हुए नहीं देख सकता था.”
क्लब के सबसे छोटे फैंस के लिए, यह अनिश्चितता उन सपनों तक पहुंच गई है जो अभी बनना शुरू ही हुए हैं. | खास व्यवस्था
उन्हें अभी भी उम्मीद है कि टाटा स्टील अपने फैसले पर दोबारा विचार करेगा.
उन्होंने कहा, “बहुत देर होने से पहले हमारी बात सुनिए. हम कोई गलत या बहुत बड़ी मांग नहीं कर रहे हैं. हम सिर्फ आपसे ऐसी चीज को बचाने के लिए कह रहे हैं जिसने हजारों परिवारों को खुशी, उम्मीद और गर्व दिया है.”
और अगर फैसला वापस नहीं लिया गया तो?
इमरान ने कहा, “हम नहीं रुकेंगे. हम अपने प्यारे क्लब को बचाने के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे. जब तक इस क्लब को बचाने की उम्मीद है, हम कोशिश करते रहेंगे.”
12 साल के शारिक अख्तर के लिए क्लब का भविष्य प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने के उसके अपने सपने से जुड़ा हुआ है. शारिक सेंटर-बैक है और लेफ्ट-बैक की जगह पर भी खेलता है. वह जमशेदपुर FC की अंडर-14 एकेडमी का हिस्सा है.
उसने 2025 सीजन में नॉर्थईस्ट यूनाइटेड के खिलाफ जमशेदपुर FC का अपना पहला मैच देखा था. उसे याद है कि मैच के दौरान कुछ खिलाड़ियों ने उसे देखा तो वह बहुत खुश हुआ था. इसके बाद उसने जमशेदपुर FC को मोहन बागान और बेंगलुरु के खिलाफ खेलते हुए देखा. जब क्लब ने FC गोवा के खिलाफ खेला था, तब वह एस्कॉर्ट किड भी था.
उसकी सबसे पसंदीदा याद मोहन बागान के खिलाफ मैच की है, जब रित्विक दास ने बराबरी का गोल किया था.
शारिक ने कहा, “मुझे बहुत दुख हो रहा है. जब मैंने सुना कि जमशेदपुर FC ISL से बाहर हो रहा है, तो मैं रो पड़ा. मुझे अपने सपने और अपने दोस्तों के सपनों की चिंता होने लगी.”
क्लब ने उसके सपने को आकार दिया है. जमशेदपुर FC को देखते हुए उसे भरोसा हुआ है कि एक दिन वह एक प्रोफेशनल खिलाड़ी के तौर पर फर्नेस के मैदान पर उतर सकता है.
उसने कहा, “मैं प्रोफेशनल तौर पर खेलना चाहता हूं. जमशेदपुर FC हमारे लिए भारत में खेलने, अपने माता-पिता को गर्व महसूस कराने और अपने शहर का प्रतिनिधित्व करने का रास्ता है.”
उसने कहा कि अगर सीनियर टीम खत्म हो जाती है तो उसे फर्नेस का माहौल और क्लब के फैंस बहुत याद आएंगे.
उसने कहा, “अगर जमशेदपुर FC बना रहता है, तो मैं उसे मोहन बागान के खिलाफ खेलते देखना चाहता हूं. यह प्रतिद्वंद्विता अपने आप में इतिहास है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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