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Sunday, 9 August, 2026
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नायडू सरकार में FDI बढ़ा तो TDP ने गिनाईं उपलब्धियां, YSRCP सांसद बोले—आंकड़ों का राजनीतिक इस्तेमाल

FDI में बढ़ोतरी के आंकड़े राजनीतिक विवाद का विषय बन गए हैं; नायडू सरकार इसे निवेशकों के लिए अनुकूल बदलाव के तौर पर पेश कर रही है, जबकि YSRCP नेता का कहना है कि सदन में 'बेबुनियाद जानकारी' दी गई है.

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हैदराबाद: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी का जमीनी स्तर पर लोगों की मदद और सीधे पैसे ट्रांसफर करने पर जोर रहा है. लेकिन आंकड़ों के मुताबिक, इसकी कीमत निवेश के रूप में चुकानी पड़ी. ये आंकड़े इस हफ्ते संसद में पेश किए गए.

बुधवार को लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों से पता चला कि आंध्र प्रदेश में आने वाला विदेशी निवेश, जो 2019 से 2024 के बीच राज्य में लोकप्रिय योजनाओं पर ज्यादा ध्यान देने के दौरान धीरे-धीरे आ रहा था, सरकार बदलने के बाद तेजी से बढ़ने लगा.

2024 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेतृत्व वाली सरकार आने के बाद आंध्र प्रदेश में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) छह गुना बढ़ गया. इसकी तुलना YSRCP सरकार के वित्त वर्ष 2023-24 में मिले निवेश से की गई है. यह जगन के मुख्यमंत्री के रूप में आखिरी साल था.

केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के तहत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2019 से दिसंबर 2024 के बीच आंध्र प्रदेश में कुल करीब 1.11 अरब डॉलर यानी करीब 8,679.14 करोड़ रुपये का FDI आया. इसका औसत हर साल करीब 92 मिलियन डॉलर रहा.

इसके मुकाबले, पिछले सिर्फ दो वित्त वर्षों में TDP के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान FDI करीब 608.59 मिलियन डॉलर यानी करीब 5,900 करोड़ रुपये रहा है. ये आंकड़े लोकसभा में पेश किए गए.

ये आंकड़े तब पेश किए गए जब तिरुपति के सांसद और YSRCP नेता मड्डिला गुरुमूर्ति ने अपने लोकसभा क्षेत्र में रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए मिले निवेश की मात्रा के बारे में पूछा.

आंकड़ों से पता चलता है कि FDI के जरिए निवेश लगातार बढ़ा. वित्त वर्ष 2023-24 में यह 92.13 मिलियन डॉलर था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 233.14 मिलियन डॉलर हो गया. इसके बाद वित्त वर्ष 2025-26 में यह और बढ़कर 608.59 मिलियन डॉलर हो गया.

इसका मतलब है कि सरकार ने अपने पहले साल में FDI को दोगुने से ज्यादा बढ़ाया और दूसरे साल में इसे करीब तीन गुना कर दिया. वित्त वर्ष 2025-26 में सबसे बड़ा निवेश मेटल से जुड़े उद्योगों, फूड प्रोसेसिंग, सीमेंट और जिप्सम उत्पादों, सर्विसेज, ऑटोमोबाइल, केमिकल, इलेक्ट्रिकल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स में आया. इससे कई अलग-अलग क्षेत्रों में निवेशकों का भरोसा बढ़ता दिखा.

TDP जाहिर तौर पर इन आंकड़ों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए कर रही है. पार्टी का कहना है कि जगन के कार्यकाल में लोगों की कल्याणकारी योजनाओं पर ज्यादा ध्यान देने और संपत्ति बनाने पर कम ध्यान देने की वजह से निवेश बहुत कम हो गया था. एक बयान में सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा कि उसकी सरकार ने निवेश के माहौल में सुधार लाने के लिए बुनियादी समस्याओं को ठीक किया है.

लंबे समय से TDP अपने चुनावी अभियानों और संदेशों में कहती रही है कि जगन सरकार की नीतियों में बदलाव और नियमों से जुड़ी परेशानियों के कारण निवेशकों का भरोसा तेजी से कम हुआ. इससे कभी भारत के सबसे बड़े निवेश केंद्रों में शामिल आंध्र प्रदेश FDI के मामले में देश के निचले आधे हिस्से में पहुंच गया.

TDP के बयान में कहा गया, “हमने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित करने पर ध्यान दिया है.”

हालांकि, तिरुपति के सांसद ने दिप्रिंट को बताया कि केंद्र सरकार आंकड़ों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र से जुड़ा आंकड़ा मांगा था, लेकिन केंद्र ने पूरे आंध्र प्रदेश में आए FDI का आंकड़ा बताया.

गुरुमूर्ति ने कहा, “मैंने उनसे तिरुपति में FDI से जुड़े रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में मदद करने को कहा था. NDA सरकार, जिसमें TDP भी सहयोगी है, ने इस मौके का इस्तेमाल अपनी उपलब्धियां दिखाने के लिए किया और इस तरह सदन को गुमराह किया. मेरे सवाल के जवाब के आखिर में इन जानकारियों को रखकर जवाब देना एक ऐसी जानकारी देने की कोशिश ज्यादा लगती है जिसकी जरूरत नहीं थी.”

केंद्र ने अपने जवाब में निवेश को बढ़ावा देने वाली कई राष्ट्रीय योजनाओं का भी जिक्र किया. इनमें तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में निवेश को समर्थन देने वाली प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाएं, सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम, BioE3 और मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और तिरुपति में रिसर्च को बढ़ावा देने वाली दूसरी नीतियां शामिल हैं.

भारत में FDI से जुड़ी नीति बनाने के लिए DPIIT मुख्य विभाग है. भारत में आने वाले FDI के आंकड़ों को संभालने और उनका प्रबंधन करने की जिम्मेदारी भी इसी विभाग की है. ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को मिली रकम की जानकारी के आधार पर तैयार किए जाते हैं.

आंध्र प्रदेश में FDI आने में केंद्र की भूमिका

केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ साझेदारी करने के आर्थिक फायदे साफ दिखाई देते हैं.

कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य की प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए ‘ब्रांड AP’ को मजबूत करने में केंद्र के योगदान की बात की.

NDA को समर्थन देने के बाद राज्य की आर्थिक दिशा में आए राजनीतिक बदलाव का जिक्र करते हुए TDP प्रमुख ने कहा कि “ब्रांड AP” बनाने के उनके लगातार प्रयासों को केंद्र का भी समर्थन मिला.

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि केंद्र ने आंध्र प्रदेश को तकनीक के जानकार और उद्योग को प्राथमिकता देने वाले राज्य के रूप में पेश किया है. इससे राज्य को देशी और विदेशी निवेश का बड़ा हिस्सा हासिल करने में मदद मिली है.

जनवरी 2026 में जारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में भारत में हुए कुल निवेश का 25 प्रतिशत आंध्र प्रदेश को मिला.

आंध्र प्रदेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन मिल रहा है, यह बात 2024 से ही साफ थी. उस समय केंद्रीय सूचना और प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने कहा था कि केंद्र और आंध्र प्रदेश, दोनों जगह NDA की सरकार आने से डबल इंजन की ताकत के साथ राज्य का विकास तेज होगा.

पिछले साल विजयवाड़ा में मीडिया से बात करते हुए मुरुगन ने कहा था, “आंध्र प्रदेश को नई सरकार के साथ FDI का केंद्र बनाया जाएगा. सरकार 2023-24 में दर्ज 8.2 प्रतिशत GDP विकास दर को आगे बढ़ाएगी और भारत को अगले कुछ वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सुधार जारी रखेगी. आंध्र प्रदेश में राजस्व बढ़ाने के लिए FDI के नियमों और नीतियों को आसान बनाया गया है.”

मंत्री ने कहा था कि 2024 के बजट में आंध्र प्रदेश के लिए कृषि, बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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