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Sunday, 9 August, 2026
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मान, बादल और वडिंग-चन्नी निशाने पर, AI से बने वीडियो बदल रहे हैं पंजाब के राजनीतिक प्रचार का तरीका

पंजाब में AI से बने वीडियो नया हथियार बन गए हैं. इनमें असली फुटेज, नकली संवाद और व्यंग्य को मिलाकर AAP, SAD, BJP और कांग्रेस के बीच सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने और राजनीतिक नैरेटिव बनाने की होड़ चल रही है.

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चंडीगढ़: पिछले हफ्ते कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखपाल सिंह खैरा ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) पर “शालीनता की सारी हदें पार करने” का आरोप लगाया. दरअसल, AI से बनाए गए एक वीडियो में उन्हें और पंजाब कांग्रेस के अन्य नेताओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सामने रैंप पर चलते हुए दिखाया गया था. खैरा ने वीडियो को मानहानिकारक और अपमानजनक बताते हुए इसके पीछे मौजूद लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से इसे हटाने की अपील की.

उन्होंने अकाल तख्त के जत्थेदार से भी अपील की कि सिख पगड़ी का अपमान करने वाले इस वीडियो का संज्ञान लिया जाए. खैरा ने वीडियो हटाने और इसमें शामिल गुमनाम अकाउंट्स की पहचान की मांग को लेकर अदालत का भी रुख किया. शुक्रवार को चंडीगढ़ जिला अदालत ने उनकी याचिका पर Meta Platforms Inc. (फेसबुक और इंस्टाग्राम) को नोटिस जारी किया.

यह घटना पंजाब में तेजी से बदल रहे राजनीतिक प्रचार का एक और उदाहरण है, जहां AI का इस्तेमाल अलग-अलग पार्टियों की ओर से विरोधियों को निशाना बनाने वाले व्यंग्यात्मक कंटेंट बनाने के लिए किया जा रहा है.

सोशल मीडिया पर AI से बने ऐसे वीडियो की बाढ़ आ गई है, जिनमें विरोधियों का मजाक उड़ाया जाता है, पुराने विवादों को फिर से उठाया जाता है और राजनीतिक नैरेटिव को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है. पहले लगभग हर चुनावी अभियान की पहचान बन चुके कांग्रेस बनाम शिरोमणि अकाली दल के अखबारों में दिए जाने वाले विज्ञापनों की लड़ाई की जगह अब इन AI से बने वीडियो ने ले ली है.

इन वीडियो में AI से बनाए गए विजुअल, क्लोन की गई आवाजें और काल्पनिक बातचीत को असली न्यूज फुटेज के साथ मिलाया जाता है, ताकि वे पारंपरिक चुनावी प्रचार सामग्री से ज्यादा प्रभावशाली लगें. हालांकि, कई वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि वे नकली हैं, लेकिन असली घटनाओं को इन बनाए गए विजुअल के साथ मिलाने से कई बार दर्शकों के लिए तुरंत यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन-सी घटना वास्तविक है और कौन-सी डिजिटल तरीके से बनाई गई राजनीतिक कहानी.

इन वीडियो की पहचान करने का एकमात्र संकेत यह डिस्क्लेमर होता है कि इन्हें एआई की मदद से बनाया गया है.

हालांकि, ऐसा कम ही होता है, लेकिन राजनीतिक पार्टियां अपने काम और उपलब्धियों का प्रचार करने के लिए भी AI से बने वीडियो का इस्तेमाल कर रही हैं. पंजाब में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं, ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह डिजिटल मुकाबला और तेज होने की संभावना है.

AAP और उसके समर्थक दो तरह का कंटेंट तैयार कर रहे हैं. एक तरफ इसका इस्तेमाल भगवंत मान सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और शासन से जुड़ी पहलों को बेहतर तरीके से, भावनात्मक कहानियों के जरिए लोगों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है. दूसरी तरफ, राजनीतिक विरोधियों पर व्यक्तिगत हमले करने वाले वीडियो भी पोस्ट किए जा रहे हैं.

AI से बने एक प्रचार वीडियो में एक ऐसी युवा महिला की कल्पना की गई है, जिसे पार्टी की हर महीने मिलने वाली 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलती है. AI से बनाए गए विजुअल और नैरेशन के जरिए वीडियो में उसकी रोजमर्रा की जिंदगी दिखाई गई है और बताया गया है कि यह पैसा उसे अपने और अपने परिवार के लिए छोटी-छोटी चीजें खरीदने में कैसे मदद करता है.

एक अन्य वीडियो में विदेश से लौटे एक युवक को दिखाया गया है, जो पिछले कुछ वर्षों में अपने गांव में हुए विकास से प्रभावित है.

एक और वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इटली की जॉर्जिया मेलोनी के साथ खड़े दिखाया गया है और दोनों पंजाब में AAP की उपलब्धियों की सूची वाली एक पुस्तिका जारी करते हुए नज़र आते हैं.

AAP के राजनीतिक हमले काफी ज्यादा तीखे हैं. कई वीडियो शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को निशाना बनाते हैं. इनमें काल्पनिक बातचीत और बढ़ा-चढ़ाकर बनाए गए हालात के जरिए उन्हें दिखाया जाता है. कुछ वीडियो में उन्हें अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ ‘अफीम की लत’ को लेकर चर्चा करते हुए दिखाया गया है, जबकि कुछ में यह दावा किया गया है कि पंजाब में सफल होने वाले हर कारोबार में उनकी हिस्सेदारी है.

ऐसे ही एक वीडियो में हरसिमरत को एक गांव में महिलाओं के साथ बैठा दिखाया गया है, जो भगवंत मान के काम की तारीफ कर रही हैं. वीडियो में दिखाया गया है कि वह उनके काम से इतनी प्रभावित होती हैं कि चुपके से जाकर AAP को वोट दे देती हैं.

एक अन्य वीडियो में उन्हें बैंक जाकर महिलाओं को हर महीने मिलने वाले 1,000 रुपये खुद के लिए निकालते हुए दिखाया गया है. इसमें वह स्वीकार करती हैं कि बादलों ने पंजाब को सिर्फ ‘लूटा’ है.

कुछ अन्य वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का ज़िक्र किया गया है और यह दिखाने की कोशिश की गई है कि पंजाब की आज की कई समस्याओं के लिए वह जिम्मेदार हैं. वहीं, कुछ वीडियो नाटकीय तरीके से तैयार किए गए AI नैरेटिव के जरिए बेअदबी विवाद को फिर से उठाते हैं.

यहां तक कि वे संस्थान, जिन्हें पारंपरिक रूप से राजनीतिक व्यंग्य से दूर रखा जाता रहा है, भी अब ऐसे कंटेंट का विषय बन रहे हैं.

उदाहरण के लिए AAP के ऑनलाइन अभियान से जुड़े अकाउंट्स द्वारा प्रसारित एक वीडियो में बादल को एक ‘जादुई चिराग’ रगड़ते हुए दिखाया गया है और अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज्ज सामने आते हैं. इस काल्पनिक बातचीत में जत्थेदार बादल को भरोसा दिलाते हुए दिखते हैं कि वह उनकी इच्छा के अनुसार काम करेंगे. इससे यह संकेत देने की कोशिश की गई है कि सिखों का सर्वोच्च धार्मिक पद अकाली नेतृत्व के इशारे पर काम करता है.

AAP ने वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को निशाना बनाते हुए भी AI से बने वीडियो तैयार किए हैं. इन वीडियो में ड्रग्स के कारोबार से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक आरोपों को काल्पनिक कहानियों और बनाई गई बातचीत के जरिए फिर से सामने लाया गया है.

कुछ अन्य वीडियो जेल से रिहा होने के बाद मजीठिया की सक्रिय राजनीति में वापसी का मज़ाक उड़ाते हैं. इनमें से एक क्लिप में उन्हें ‘माझा के जनरल’ के बजाय तंज कसते हुए ‘माझा का चूहा’ कहा गया है. AI से बनाए गए कार्टून जैसे चित्रों के जरिए उनकी राजनीतिक छवि को कमजोर करने की कोशिश की गई है.

SAD ने मान को बनाया निशाना

SAD ने भी सत्तारूढ़ पार्टी के नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए AI को उतनी ही आक्रामकता से अपनाया है.

मुख्यमंत्री भगवंत मान शायद विपक्ष की ओर से बनाए गए AI वाले व्यंग्य का सबसे ज्यादा निशाना बनने वाले नेता हैं. कई रील्स में उन्हें परिवार के सदस्यों या राजनीतिक सहयोगियों के साथ काल्पनिक बातचीत करते हुए दिखाया गया है. इनमें से कई में उन्हें शराब पीते हुए दिखाया गया है, जबकि उन्होंने शराब न पीने की कसम खाई थी. वहीं, एक वीडियो में कल्पना की गई है कि बादल के दोबारा सत्ता में आने का सपना देखने के बाद वह घबराकर उठ जाते हैं और उन्हें डर लगता है कि उन्हें पंजाब छोड़कर भागना पड़ेगा.

AI से बने एक अन्य वीडियो में 2015 के बेअदबी मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के सामने बादल की पेशी का काल्पनिक दृश्य दिखाया गया है. इस बनाए गए दृश्य में SIT के अधिकारियों को बादल के साथ सम्मान से पेश आते और बार-बार उनसे पूछते हुए दिखाया गया है कि उन्हें कौन से सवाल पूछने चाहिए. इसके बाद वीडियो में मान के साथ एक काल्पनिक फोन पर बातचीत दिखाई जाती है, जिसमें मान जांचकर्ताओं से कहते हैं कि बादल से कुछ पूछने की जरूरत नहीं है और उन्हें बस घर भेज देना चाहिए. इस तरह जांच को वास्तविक जांच के बजाय राजनीतिक ड्रामा के तौर पर दिखाया गया है.

अकाली दल की ओर से बनाए गए अन्य वीडियो भी AI की कहानी के जरिए मौजूदा राजनीतिक विवादों को फिर से पेश करते हैं. एक वीडियो में एक सार्वजनिक बैठक की काल्पनिक कहानी दिखाई गई है, जिसमें मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले उनसे सवाल करने की तैयारी कर रहे लोगों को उनके घरों में नजरबंद कर दिया जाता है.

इसके बाद AI से बनाए गए इन दृश्यों के बीच टीवी न्यूज की उस कार्यक्रम की असली फुटेज भी दिखाई जाती है. इससे पूरा वीडियो असली जैसा लगता है, जबकि इसकी ज्यादातर कहानी पूरी तरह काल्पनिक होती है.

एक अन्य वीडियो में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्र मुख्यमंत्री को निशाना बनाते हुए उनसे राज्य में हुए कई परीक्षा पेपर लीक के बारे में सवाल करते दिखाए गए हैं.

एक अन्य वीडियो में AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को मान से यह कहते हुए दिखाया गया है कि अपनी खराब हुई छवि को सुधारने का एकमात्र तरीका महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देना है. वीडियो के अंत में मान यह कहते हुए दिखाए गए हैं कि कुछ हजार रुपये फेंकने पर वह पंजाबियों की वफादारी खरीद सकते हैं.

पंजाब सरकार की ओर से अपने कर्मचारियों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता देने में देरी भी एक व्यंग्यात्मक AI वीडियो का विषय बन गई है.

BJP: अलग रणनीति

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने AI को लेकर कुछ अलग रणनीति अपनाई है. पार्टी अक्सर शासन से जुड़े मुद्दों और न्यूज घटनाओं को सिनेमाई राजनीतिक कहानियों के रूप में पेश करती है.

एक वीडियो में बरनाला में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह AI के जरिए बनाई गई कहानी के रूप में दिखाया गया है, जिसमें मान को कार्रवाई का आदेश देते हुए दिखाया गया है. असली फुटेज पर निर्भर रहने के बजाय वीडियो में AI से बनाए गए नैरेशन, किरदारों और दृश्यों के जरिए विवाद को दोबारा बनाया गया है, ताकि लोगों में भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा हो.

BJP के एक अन्य वीडियो में संवाद के बजाय प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है. इसमें मान को अपने कार्यालय के अंदर बैठे हुए दिखाया गया है और उनके आसपास रखी हर चीज़, फाइलें, कागज़, एक कप और यहां तक कि एक गिलास, से पानी लीक होने लगता है. इस दृश्य के जरिए परीक्षा पेपर लीक के विवादों को दिखाने की कोशिश की गई है. साथ ही, देश के दूसरे हिस्सों में पेपर लीक को लेकर BJP पर विपक्ष के हमलों का जवाब भी दिया गया है.

एक अन्य AI से बने वीडियो में मान को एक बड़े काफिले में सफर करते हुए दिखाया गया है, जबकि उनके आसपास हो रही घटनाओं से वह पूरी तरह अनजान रहते हैं. काल्पनिक यात्रा आगे बढ़ने के साथ उन्हें सार्वजनिक प्रदर्शनों, कथित तौर पर लूटी जा रही महिलाओं और परेशान नागरिकों को नज़रअंदाज़ करते हुए दिखाया गया है. इससे BJP के इस नैरेटिव को मजबूत करने की कोशिश की गई है कि AAP सरकार आम लोगों से कट गई है.

राज्य में विपक्ष की ओर से शेयर किए गए कई वीडियो भी असली विवादों को पूरी तरह काल्पनिक बातचीत के साथ जोड़ते हैं. एक वीडियो में मान को कथित तौर पर गैंगस्टरों से पैसे लेते हुए दिखाया गया है. इसके बाद उनकी मां के साथ एक काल्पनिक बातचीत दिखाई जाती है, जिसमें वे चर्चा करते हैं कि पैसे को सुरक्षित तरीके से कहां छिपाया जाए. इस कहानी में उनके करीबी एक व्यक्ति से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तलाशी का भी जिक्र किया जाता है. इस तरह एक वास्तविक राजनीतिक विवाद को काल्पनिक दृश्यों और AI से बनाए गए संवाद के साथ जोड़कर एक नाटकीय कहानी बनाई गई है.

कांग्रेस: मुकाबले में पीछे से पकड़ बनाने की कोशिश

इस बीच, कांग्रेस खुद AI से बनाए गए राजनीतिक कंटेंट का निशाना बन रही है. इसमें पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है, खासकर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बीच कथित खींचतान को. एक अन्य वीडियो में कांग्रेस पार्टी को मौत की हालत में दिखाया गया है.

एक राजनीतिक संचार विशेषज्ञ ने दिप्रिंट को बताया कि चुनावी अभियान एक नए दौर में पहुंच गया है, जहां AI का इस्तेमाल अब केवल पोस्टर बनाने या भाषणों का अनुवाद करने तक सीमित नहीं है.

चंडीगढ़ के DAV कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग की कनवलप्रीत कौर ने कहा, “AI राजनीतिक पार्टियों को ऐसे प्रभावशाली नैरेटिव बनाने में मदद कर रहा है, जिनमें हास्य, सिनेमा, पैरोडी और वास्तविक घटनाओं के चुनिंदा संदर्भों को इस तरह मिलाया जाता है कि वे सोशल मीडिया के लिए बेहद प्रभावी बन जाते हैं. पहले ये लड़ाइयां अखबारों में विज्ञापनों के जरिए लड़ी जाती थीं.”

उन्होंने 2006 को याद करते हुए बताया कि कांग्रेस ने अखबारों में शिरोमणि अकाली दल के खिलाफ कार्टून कैंपेन चलाया था. उन्होंने कहा, “उस समय यह कंटेंट चौंकाने वाला था क्योंकि हमले व्यक्तिगत थे और इस्तेमाल की गई भाषा बहुत कड़ी थी, लेकिन अब सोशल मीडिया पर ऐसे व्यक्तिगत हमले सामान्य हो गए हैं.”

उनके अनुसार, सभी पार्टियों में एक खास बात यह देखने को मिल रही है कि “राजनीतिक कार्यक्रमों की असली टीवी फुटेज या वास्तविक वीडियो के साथ AI से बनाए गए विजुअल और क्लोन की गई आवाजों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है.”

उन्होंने कहा, “यह तकनीक ऐसी काल्पनिक कहानियों को विश्वसनीय बनाती है, जो असल में पूरी तरह बनाई गई होती हैं. इससे दर्शकों के लिए सत्यापित रिपोर्टिंग और डिजिटल तरीके से बनाए गए राजनीतिक संदेश के बीच अंतर करना और मुश्किल हो जाता है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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