बेंगलुरु: एक्सपायर हो चुका मांस, दूध, सॉस और फंगस लगी सब्जियां. ये कुछ ऐसी चीजें हैं जो कर्नाटक के फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) विभाग को शनिवार को देश की कुछ बड़ी फूड लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज कंपनियों में मिलीं. सरकार अब एक्सपायर हो चुके खाने को परोसने या रखने वाले संस्थानों का पता लगाने के लिए बड़े स्तर पर जांच कर रही है.
कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग के एक बयान में कहा गया, “कोल्डमैन लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड और राधाकृष्ण फूडलैंड लिमिटेड में की गई जांच के दौरान करीब 70 किलो सोया सॉस और अलग-अलग तरह के सॉस, जिनकी एक्सपायरी डेट करीब थी, पाए गए. इन्हें जब्त कर लिया गया.”
बयान में आगे कहा गया कि मांस के 5 सैंपल, खाने की दूसरी चीजों के 13 सैंपल और करीब 10 लीटर पेय पदार्थ, जिनमें स्ट्रॉबेरी फ्लेवर वाले ड्रिंक भी शामिल थे, लिए गए और जांच के लिए भेजे गए.
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खाडर ने बड़े और मशहूर होटलों और रेस्टोरेंट में अचानक जांच करने का आदेश दिया है. इन जांचों में कई ऐसे संस्थानों में रखे और परोसे जा रहे खाने की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक बातें सामने आई हैं.

इस विशेष जांच अभियान के तहत 30 टीम बनाई गईं. इनमें नामित अधिकारी और फूड सेफ्टी अधिकारी शामिल थे. इन टीमों को बेंगलुरु में मौजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय होटलों को मांस और समुद्री भोजन जैसी खाद्य सामग्री सप्लाई करने वाले संस्थानों में भेजा गया.
शुक्रवार को हुई जांच में पता चला कि कई मशहूर फाइव-स्टार होटल और दूसरे बड़े संस्थान बासी या एक्सपायर हो चुका खाना रख रहे थे और संभव है कि उसे परोस भी रहे हों. इनमें शहर के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले कई होटल शामिल हैं. इनमें कुछ ऐसे होटल भी हैं जहां राजनीतिक नेता बैठकें और सम्मेलन करते हैं.
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जांच के दौरान द ललित अशोक से 76 किलो मांस और 200 किलो सब्जियां, शांगरी-ला से 15 किलो मांस और ताज यशवंतपुर से 72 किलो मांस और समुद्री भोजन जब्त किया गया. फूड इंस्पेक्टरों को द रेडिसन ब्लू (एट्रिया) में 105 किलो एक्सपायर हो चुका खाना भी मिला. इसमें 50 किलो चिकन, 25 किलो मांस, 23 किलो मछली और 7 किलो एक्सपायर हो चुकी सब्जियां शामिल थीं.
ये जांच महाराष्ट्र FDA द्वारा छह रेस्टोरेंट और खाने की दुकानों के फूड बिजनेस लाइसेंस निलंबित किए जाने के कुछ दिन बाद हुई हैं. इनमें दक्षिण मुंबई का एक बड़ा और महंगा संस्थान भी शामिल था. महाराष्ट्र FDA ने पाया था कि इनमें से कई बड़े रेस्टोरेंट और क्लब गंदे किचन चला रहे थे और एक्सपायर हो चुका सामान और गलत लेबल वाले उत्पाद रख रहे थे.

खाडर ने शुक्रवार को इससे पहले पत्रकारों से कहा, “लोगों के बीच आम धारणा है कि अगर कोई फाइव-स्टार होटल है, तो वहां खाने की चीजों की गुणवत्ता और साफ-सफाई बहुत अच्छी होगी. इसलिए हम यह जांचना चाहते थे कि क्या यह सच है या नहीं.”
कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, “विशेष जांच अभियान के दौरान बेंगलुरु शहर के 26 थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों की जांच की गई. कुल 35 खाने के सैंपल लिए गए और जांच के लिए फूड लेबोरेटरी भेजे गए.”
विभाग ने यह भी कहा कि इनमें से कई संस्थानों के किचन और खाने का सामान रखने वाली जगहों पर साफ-सफाई की स्थिति खराब थी. मांस के उत्पादों पर FSSAI की जरूरत के मुताबिक लेबल नहीं लगाए गए थे और कई दूसरी गड़बड़ियां भी मिलीं. इसके अलावा, इनमें से ज्यादातर संस्थान एक्सपायर हो चुका दूध, बेकरी का सामान, मांस और समुद्री भोजन के साथ-साथ सब्जियां भी रख रहे थे. विभाग ने यह भी पाया कि शाकाहारी और मांसाहारी खाने के सामान को अलग-अलग रखने की व्यवस्था नहीं थी.
खाडर ने कहा कि बड़े और महंगे होटलों को यह नहीं सोचना चाहिए कि सरकार उनके खाने और पेय पदार्थों की जांच नहीं करती. उन्होंने आगे कहा, “छोटे संस्थानों का भरोसा तब बढ़ेगा जब वे देखेंगे कि बड़े होटल भी अगर गुणवत्ता बनाए नहीं रखते हैं तो उनकी भी जांच की जा रही है. इसका मतलब है कि हम किसी को भी नहीं छोड़ेंगे.”
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