scorecardresearch
Sunday, 9 August, 2026
होमदेशड्राइवरों की हरिद्वार से संसद तक कांवड़ यात्रा सोनीपत में रोकी गई, संसद में गंगाजल चढ़ाना मु्श्किल

ड्राइवरों की हरिद्वार से संसद तक कांवड़ यात्रा सोनीपत में रोकी गई, संसद में गंगाजल चढ़ाना मु्श्किल

ड्राइवर अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान खींचने के लिए संसद में गंगाजल चढ़ाना चाहते थे. ‘जब भी कोई दुर्घटना होती है, तो हमारे ड्राइवर भीड़ की हिंसा का शिकार हो जाते हैं. लोग यह भी नहीं देखते कि गलती किसकी है.’

Text Size:

गुरुग्राम: ट्रक और कमर्शियल वाहन चलाने वाले ड्राइवरों का एक समूह 1 अगस्त को हरिद्वार से पैदल चला था. उनके पास गंगाजल था, जिसे वे 11 अगस्त को दिल्ली में संसद भवन में चढ़ाना चाहते थे. वे संसद भवन को “लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर” बताते हैं. लेकिन हरियाणा के सोनीपत में पुलिस ने उन्हें रोक दिया. ड्राइवरों ने कहा कि उनके खाने-पीने का सामान ले जाने वाली गाड़ी को रोक लिया गया था और उन्हें उस सामान तक पहुंचने नहीं दिया गया, इसलिए उन्हें कई घंटे बिना खाना खाए रहना पड़ा.

यह यात्रा ड्राइवरों के “मान-सम्मान, अधिकार और सुरक्षा” के नाम से आयोजित की गई थी. इसे शनिवार को ही सोनीपत में गन्नौर के पास पुलिस ने रोक दिया था. गन्नौर, सिंघु-दिल्ली बॉर्डर से करीब 40 किलोमीटर दूर है.

इसके बावजूद यात्रा के आयोजकों ने रविवार, 9 अगस्त को देशभर के ड्राइवरों से सिंघु बॉर्डर पर इकट्ठा होने की अपील की थी. इस अपील से पुलिस सतर्क हो गई. यात्रा को सिंघु की तरफ आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई.

यात्रा के संयोजक सुरेंद्र जाट ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका खाने-पीने का सामान ले जाने वाला वाहन जब्त कर लिया, जिससे ड्राइवरों को कई घंटे तक खाने के लिए कुछ नहीं मिला.

जाट ने दिप्रिंट को बताया कि ड्राइवर संसद भवन में गंगा जल चढ़ाना चाहते थे, क्योंकि संसद भवन “लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर” है. उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद देशभर में ड्राइवरों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उनकी तरफ सरकार का ध्यान खींचना था.

जाट ने कहा, “जब भी कोई दुर्घटना होती है, हमारे ड्राइवर भीड़ की हिंसा का शिकार हो जाते हैं. लोग यह भी नहीं देखते कि गलती किसकी थी. बड़े वाहन के ड्राइवर होने की वजह से हमें ही दोषी माना जाता है. कई मामलों में दुर्घटनाओं में ड्राइवर मारे जाते हैं या दिव्यांग हो जाते हैं.”

“हम चाहते हैं कि दुर्घटना या भीड़ की हिंसा में मारे गए ड्राइवरों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिले और गंभीर रूप से घायल होने पर 50 लाख रुपये दिए जाएं. हम यह भी चाहते हैं कि ड्राइवरों पर हमला करके उन्हें मारने वालों के खिलाफ हत्या के तहत सख्त कार्रवाई की जाए.”

जाट ने यह भी कहा कि ड्राइवर हिट-एंड-रन मामलों में बनाए गए सख्त प्रावधानों को पूरी तरह हटाने की मांग कर रहे हैं.

आयोजकों ने इस आंदोलन को ड्राइवरों के सम्मान, सुरक्षा, वेतन, कल्याण और उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए एक अलग व्यवस्था से जुड़ी कई मांगों वाला आंदोलन बताया है. इसमें उन ड्राइवरों के लिए वोट देने की व्यवस्था की मांग भी शामिल है, जो काम के कारण अपने घर और विधानसभा क्षेत्र से दूर रहते हैं.

गन्नौर थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर बीर सिंह ने कहा कि ड्राइवरों को समझाया गया था कि वे अपनी यात्रा गन्नौर में ही खत्म कर दें और गंगा जल स्थानीय मंदिर में चढ़ा दें.

सिंह ने दिप्रिंट को बताया, “वे दिल्ली की तरफ आगे बढ़ना चाहते थे. लेकिन स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली की तरफ जाने वाली आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है. हमने यात्रियों से बात की और हमारे समझाने पर वे गन्नौर में ही अपनी यात्रा खत्म करने और स्थानीय मंदिर में गंगा जल चढ़ाने के लिए तैयार हो गए.”

हिट-एंड-रन का कानून जो अभी लागू नहीं है

ड्राइवरों के गुस्से की एक बड़ी वजह भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(2) है. इसमें कहा गया है कि अगर कोई ड्राइवर लापरवाही या तेज और गलत तरीके से गाड़ी चलाने के कारण किसी की मौत कर देता है और इसकी जानकारी दिए बिना घटनास्थल से भाग जाता है, तो उसे 10 साल तक की जेल हो सकती है.

यह प्रावधान पुराने भारतीय दंड संहिता की धारा 304A की जगह लाया गया था, जिसमें सजा कम थी. इस प्रावधान के खिलाफ जनवरी 2024 में ट्रक ड्राइवरों ने देशभर में प्रदर्शन किया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने इसे फिलहाल रोक दिया था. अभी तक इसे लागू करने की अधिसूचना जारी नहीं की गई है.

इससे जुड़ी धारा 106(1) लागू है. इसमें ऐसी लापरवाही या गलत काम के कारण मौत होने पर, जिसे गैर इरादतन हत्या नहीं माना जाता, 5 साल तक की जेल हो सकती है.

अलग से, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134 अभी भी लागू है. इसके तहत दुर्घटना में शामिल ड्राइवर को घायल व्यक्ति को इलाज दिलाने में मदद करनी होती है और पुलिस को दुर्घटना की जानकारी देनी होती है, चाहे धारा 106(2) का क्या हुआ हो.

परिवहन संगठनों का कहना है कि अगर धारा 106(2) को मौजूदा रूप में लागू किया गया, तो इसमें उस ड्राइवर के बीच सही अंतर नहीं किया गया है जो कानून से बचने के लिए घटनास्थल से भागता है और उस ड्राइवर के बीच जो दुर्घटना की जगह पर भीड़ की हिंसा के डर से भागता है. यही अंतर धारा 106(2) को वापस लेने की ड्राइवरों की मांग का मुख्य मुद्दा बना हुआ है.

अब जब यात्रा दिल्ली से पहले ही रोक दी गई है, तो 11 अगस्त मंगलवार तक संसद भवन में गंगा जल पहुंचाने की उनकी तय समय सीमा पूरी होती हुई नहीं दिख रही है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: RSS गुरु की शिष्य मोदी सरकार को नसीहत: Gen Z पर भागवत के समर्थन में छिपा है इंदिरा गांधी दौर का सबक


 

share & View comments