गुरुग्राम: ट्रक और कमर्शियल वाहन चालकों का एक समूह 1 अगस्त को हरिद्वार से पैदल यात्रा पर निकला था. वे 11 अगस्त को दिल्ली में संसद भवन में, जिसे उन्होंने “लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर” बताया, गंगाजल चढ़ाना चाहते थे, लेकिन हरियाणा के सोनीपत में पुलिस ने उन्हें रोक दिया. ड्राइवरों ने कहा कि उनके सामान को ले जा रहे वाहन को हिरासत में लिए जाने और उस तक उनकी पहुंच सीमित किए जाने के कारण उन्हें घंटों बिना खाना खाए रहना पड़ा.
ड्राइवरों के “मान-सम्मान, अधिकार और सुरक्षा” के बैनर तले आयोजित इस यात्रा को शनिवार को ही सोनीपत में गन्नौर के पास पुलिस ने रोक दिया था. यह जगह सिंघु-दिल्ली बॉर्डर से करीब 40 किलोमीटर दूर है.
इसके बावजूद आयोजकों ने रविवार, 9 अगस्त को देशभर के ड्राइवरों से सिंघु बॉर्डर पर इकट्ठा होने की अपील की थी. हालांकि, इस अपील से पुलिस सतर्क हो गई. यात्रा को सिंघु की ओर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई.
यात्रा के संयोजक सुरेंद्र जाट ने आरोप लगाया कि पुलिस ने खाने-पीने का सामान ले जा रहे उनके वाहन को जब्त कर लिया, जिससे ड्राइवरों के पास घंटों तक खाने के लिए कुछ नहीं था.
जाट ने दिप्रिंट को बताया कि ड्राइवर संसद में गंगाजल इसलिए चढ़ाना चाहते थे क्योंकि संसद भवन “लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर” है. उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद देशभर में ड्राइवरों के सामने आने वाली समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान खींचना था.
जाट ने कहा, “जब भी कोई हादसा होता है, हमारे ड्राइवर सार्वजनिक रूप से पीट-पीटकर मार दिए जाने यानी मॉब लिंचिंग का शिकार बन जाते हैं. लोग यह भी नहीं देखते कि गलती किसकी है. बड़े वाहन के ड्राइवर होने के कारण हमें ही दोषी माना जाता है. कई मामलों में हादसों में ड्राइवरों की मौत हो जाती है या वे दिव्यांग हो जाते हैं.”
उन्होंने कहा, “हम हादसों या मॉब लिंचिंग में मारे गए ड्राइवरों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और गंभीर रूप से घायल होने पर 50 लाख रुपये का मुआवजा चाहते हैं. हम यह भी चाहते हैं कि ड्राइवरों की मॉब लिंचिंग करने वालों के खिलाफ हत्या के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए.”
जाट ने आगे कहा कि ड्राइवर हिट एंड रन मामलों में लागू किए गए कड़े प्रावधानों को पूरी तरह खत्म करने की भी मांग कर रहे हैं.
आयोजकों ने इस आंदोलन को ड्राइवरों के मान-सम्मान, सुरक्षा, वेतन, कल्याण और उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए एक अलग व्यवस्था से जुड़ी लंबी मांगों वाला आंदोलन बताया है. इसके अलावा, उन ड्राइवरों के लिए वोट देने की व्यवस्था की भी मांग है, जो काम के कारण अपने गृह निर्वाचन क्षेत्रों से दूर रहते हैं.
गन्नौर थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर बीर सिंह ने कहा कि ड्राइवरों को गन्नौर में ही अपनी यात्रा समाप्त करने और स्थानीय मंदिर में गंगाजल चढ़ाने के लिए समझाया गया था.
सिंह ने दिप्रिंट को बताया, “वे दिल्ली की ओर आगे बढ़ना चाहते थे. हालांकि, स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली की ओर जाने वाले आवागमन को नियंत्रित किया जा रहा है. हमने यात्रियों से बातचीत की और हमारे समझाने पर वे गन्नौर में अपनी यात्रा समाप्त करने और स्थानीय मंदिर में गंगाजल चढ़ाने के लिए सहमत हो गए.”
जो हिट-एंड-रन कानून लागू ही नहीं है
ड्राइवरों के गुस्से की कई वजहों में एक प्रमुख मुद्दा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(2) है. इसके तहत अगर कोई ड्राइवर लापरवाही या तेज और खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने के कारण किसी की मौत का कारण बनता है और घटना की जानकारी दिए बिना मौके से भाग जाता है, तो उसे 10 साल तक की जेल हो सकती है.
इस प्रावधान को पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) की अपेक्षाकृत नरम धारा 304A की जगह लाया गया था. इसके बाद जनवरी 2024 में ट्रक ड्राइवरों ने देशभर में प्रदर्शन किया था. इसके बाद से केंद्र सरकार ने इस प्रावधान को फिलहाल रोककर रखा है. अभी तक इसे लागू करने के लिए अधिसूचित नहीं किया गया है.
इससे जुड़ी धारा 106(1) लागू है. इसमें गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में न आने वाली लापरवाही या तेज और खतरनाक तरीके से किए गए कृत्य के कारण मौत होने पर पांच साल तक की जेल का प्रावधान है.
अलग से, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134 के तहत हादसे में शामिल ड्राइवर के लिए घायल व्यक्ति को चिकित्सा सहायता दिलाने में मदद करना और पुलिस को हादसे की जानकारी देना जरूरी है. यह नियम धारा 106(2) की स्थिति से अलग लागू है.
ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि अगर धारा 106(2) को मौजूदा स्वरूप में लागू किया जाता है, तो इसमें उस ड्राइवर के बीच पर्याप्त अंतर नहीं किया गया है जो कानून से बचने के लिए मौके से भागता है और उस ड्राइवर के बीच जो हादसे की जगह पर भीड़ की हिंसा के डर से भाग जाता है. यही अंतर धारा 106(2) को वापस लेने की ड्राइवरों की मांग के केंद्र में है.
अब जब यह यात्रा दिल्ली पहुंचने से पहले ही रोक दी गई है, तो मंगलवार, 11 अगस्त तक संसद में गंगाजल पहुंचाने की उनकी घोषित समयसीमा पूरी होने की संभावना कम दिखाई दे रही है.
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