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Wednesday, 7 October, 2026
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नोएडा की सोसाइटी के पूल में तैरना है? तो पास, फीस और RWA की मंजूरी की ज़रूरत पड़ेगी

स्विमिंग पूल, जिम और क्लब हाउस कभी गेटेड सोसाइटी में रहने की खास सुविधाओं के तौर पर दिखाए जाते थे. अब NCR में ये सुविधाएं रेजिडेंट्स और RWAs के बीच विवाद की नई वजह बन रही हैं.

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नोएडा: अमित नोएडा की गोल्फ सिटी में रहते हैं. 34 साल के अमित ने जिस घर को किराये पर लिया है, उसमें पहले मकान मालिक रहते थे. उस समय वे सोसाइटी की कॉमन सुविधाओं का इस्तेमाल बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के कर सकते थे, लेकिन अमित के किराये पर आने के बाद नियम बदल गए.

अमित का कहना है कि हर महीने तय 3,000 रुपये मेंटेनेंस चार्ज देने के बावजूद अब उन्हें जिम के लिए 700 रुपये और स्विमिंग पूल के लिए 800 रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं.

MNC में काम करने वाले अमित ने कहा, “मकान मालिक खुद यहां रहते थे. वे मेंटेनेंस चार्ज देते थे और सभी सुविधाओं का इस्तेमाल करते थे, लेकिन जैसे ही उसी घर में किरायेदार आता है, उन्हीं सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए उससे अतिरिक्त पैसे लिए जाते हैं.”

स्विमिंग पूल, जिम, क्लब हाउस, कम्युनिटी हॉल और स्पोर्ट्स कोर्ट—ये वे सुविधाएं हैं, जिन्होंने नोएडा और गुरुग्राम की गेटेड सोसाइटियों को महज रहने की जगह से आगे बढ़ाकर लग्जरी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाया, लेकिन इन सुविधाओं के साथ कुछ ऐसे नियम भी जुड़े हैं, जिनकी वजह से अब सोसाइटियों में एक नया विवाद खड़ा हो रहा है.

इन सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर बनाए गए नियमों ने निवासियों और रेजिडेंट्स वेल्फेयर एसोसिएशन (RWA) या Apartment Owners Associations (AOA) के बीच मतभेद का एक नया मोर्चा खोल दिया है.

खासकर किरायेदारों को अब पता चल रहा है कि कॉमन एरिया और सुविधाओं का इस्तेमाल सिर्फ सोसाइटी में रहने भर से आसान नहीं है. इसके लिए RWA के नियम, अतिरिक्त शुल्क, बुकिंग की शर्तें, मेंबरशिप और कई जगहों पर सीमित समय जैसी पाबंदियां भी हैं.

हालांकि RWAs और मैनेजमेंट कमेटियों का कहना है कि ऐसे नियम सुविधाओं के रखरखाव, सुरक्षा, भीड़ को नियंत्रित करने और सभी निवासियों को बराबर इस्तेमाल का मौका देने के लिए ज़रूरी हैं.

फेडरेशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशंस (FAOA) के अध्यक्ष संजय लाल ने कहा, “दुर्भाग्य से, कॉमन सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर होने वाले विवाद अब निवासियों, किरायेदारों और अपार्टमेंट एसोसिएशनों के बीच तनाव की एक बड़ी वजह बनते जा रहे हैं.” FAOA फ्लैट मालिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों को देखने वाली एक प्रमुख संस्था है.

उन्होंने कहा, “RWA या AOA एक ऐसी संस्था है, जिसे सोसाइटी के कामकाज को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए बनाया गया है. वह कॉमन एरिया या सुविधाओं की मालिक नहीं होती. पदाधिकारी सोसाइटी का प्रशासन चलाने के लिए चुने जाते हैं, न कि दूसरे निवासियों पर व्यक्तिगत अधिकार जताने के लिए.”

अमित के लिए मामला सिर्फ अतिरिक्त पैसे देने का नहीं है. सवाल यह है कि एक ही घर में रहने और उन्हीं सुविधाओं का इस्तेमाल करने के बावजूद मकान मालिक और किरायेदार के साथ अलग-अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है.

नोएडा की एक गेटेड सोसाइटी के अंदर जिम | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
नोएडा की एक गेटेड सोसाइटी के अंदर जिम | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

किसे मिलती है सुविधा?

महानगरों की अपार्टमेंट सोसाइटियों में मेंटेनेंस चार्ज देना आम बात है. RWA इसी रकम से कॉमन एरिया और सोसाइटी की सुविधाओं का रखरखाव करती है, लेकिन किरायेदारों से इन्हीं सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए अलग से शुल्क लिया जाना अब नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों में विवाद का बड़ा कारण बनता जा रहा है.

घर वही है. जिम वही है. स्विमिंग पूल भी वही है. लेकिन अमित के मुताबिक, इन सुविधाओं का इस्तेमाल करने की कीमत इस बात पर बदल जाती है कि उस घर में कौन रह रहा है—मकान मालिक या किरायेदार.

गोल्फ सिटी की RWA की ओर से अप्रैल 2026 में जारी एक नोटिस भी किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए सुविधाओं और शुल्क में इस अंतर को दिखाता है. नोटिस में कहा गया था कि सोसाइटी का स्विमिंग पूल एक मई से निवासियों के लिए खोल दिया जाएगा. हालांकि, किरायेदारों के लिए इसके इस्तेमाल का शुल्क तय किया गया था.

नोटिस में लिखा था, “हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सोसाइटी का स्विमिंग पूल एक मई से निवासियों के लिए खोल दिया जाएगा. किरायेदारों के लिए शुल्क: पूरे सीजन के लिए प्रति व्यक्ति 700 रुपये.”

नोएडा की एक दूसरी गेटेड सोसाइटी में जिम और स्विमिंग पूल के समय को लेकर निवासियों और RWA के बीच विवाद सामने आया है. सेक्टर 75 की एक सोसाइटी में इन सुविधाओं का इस्तेमाल एक बार में केवल एक घंटे के लिए किया जा सकता है. इसके अलावा पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग समय तय किया गया है.

43-वर्षीय मिशा शर्मा ने कहा, “मेरे पति और मेरे ऑफिस का समय एक जैसा है और हमारी दूसरी जिम्मेदारियां भी हैं. इसके बावजूद हम दोनों एक साथ इन सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकते. बिना निवासियों से सलाह किए नियम बना दिए जाते हैं, फिर चाहे उन नियमों की वजह से हमें कितनी भी परेशानी क्यों न हो.”

हालांकि, AOA के एक सदस्य ने नियमों और उनके समय का बचाव करते हुए कहा कि इन्हें निवासियों से बातचीत के बाद बनाया गया था. उनका कहना था कि किसी भी निवासी ने इन समयों या पुरुषों और महिलाओं के लिए स्विमिंग पूल के अलग-अलग समय को लेकर आपत्ति नहीं जताई थी.

RWA के एक सदस्य ने कहा, “पूल में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग समय की मांग ज्यादातर खुद निवासी ही करते हैं. अगर कोई महिला किसी खास समय पर या अपने पति के साथ पूल का इस्तेमाल करना चाहती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी सभी महिलाएं भी उसी समय सहज महसूस करेंगी.”

उन्होंने यह भी बताया कि समय तय करने का एक मकसद ज्यादा से ज्यादा निवासियों को इन सुविधाओं का इस्तेमाल करने का मौका देना है, क्योंकि जगह सीमित है और एक समय में बहुत ज्यादा लोग इनका इस्तेमाल नहीं कर सकते.

नोएडा के सेक्टर-74 स्थित सुपरटेक केपटाउन में सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर विवाद ने एक अलग रूप ले लिया है. यहां शुल्क व्यक्ति और परिवार के हिसाब से अलग-अलग तय किया गया है.

एक व्यक्ति से सोसाइटी की सुविधाओं और कॉमन एरिया के इस्तेमाल के लिए हर महीने 500 रुपये लिए जाते हैं, जबकि एक परिवार से 1,000 रुपये प्रति माह लिए जाते हैं. परिवार में कितने सदस्य इन सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं, इससे शुल्क में कोई बदलाव नहीं होता.

सुपरटेक केपटाउन के 42 साल के निवासी कुश सिंह ने कहा, “चार लोगों के परिवार से 1,000 रुपये लिए जाते हैं, जबकि एक व्यक्ति के तौर पर मुझे 500 रुपये देने पड़ते हैं. इसके अलावा हर महीने 4,000 रुपये मेंटेनेंस चार्ज भी देना होता है. इस तरह RWA किरायेदारों को बेवकूफ बनाती हैं.”

यह विवाद सिर्फ किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए अलग-अलग शुल्क तक सीमित नहीं है. नोएडा और गुरुग्राम की कुछ हाउसिंग सोसाइटियों में एक ही निवासी के परिवार के अलग-अलग सदस्यों—चाहे वे माता-पिता हों या भाई-बहन के लिए भी अलग नियम और शुल्क देखने को मिल रहे हैं.

नोएडा के सेक्टर-45 स्थित अम्रपाली सफायर की एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “मैं अपनी बहन के साथ रहती हूं, लेकिन RWA ने फिर भी मुझे बताया कि मैं जिम का इस्तेमाल नहीं कर सकती, क्योंकि मैं उनके हिसाब से परिवार की सदस्य नहीं हूं.”

हालांकि, सोसाइटी की AOA के एक सदस्य ने इस नियम का बचाव किया. उन्होंने कहा कि अगर परिवार के सदस्य अपने रिश्ते से जुड़े दस्तावेज जमा करते हैं, तो उन्हें सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है.

AOA सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “सिर्फ खून के रिश्ते वाले परिवार के सदस्यों को ही सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति है. बाहरी लोगों को अनुमति नहीं दी जाती, क्योंकि इससे भीड़ बढ़ती है और उपकरणों या सुविधाओं को नुकसान पहुंच सकता है.”

NCR की RWAs और AOAs ने मनमाने तरीके से अतिरिक्त शुल्क लगाने के आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि कॉमन सुविधाओं को सुचारु रूप से चलाने और उनका रखरखाव करने के लिए नियम और मेंटेनेंस शुल्क जरूरी हैं.

गुरुग्राम की एक सोसाइटी के RWA सदस्य ने कहा, “सुविधाओं के इस्तेमाल को व्यवस्थित करने और सोसाइटी को सुचारु रूप से चलाने के लिए नियम जरूरी हैं. मेंटेनेंस चार्ज का इस्तेमाल उन उपकरणों और सुविधाओं के रखरखाव पर किया जाता है, जिनका निवासी इस्तेमाल करते हैं. अगर नियम और पर्याप्त फंड नहीं होंगे, तो सोसाइटियां इन सुविधाओं को कैसे उपलब्ध कराएंगी और उनका रखरखाव कैसे करेंगी?”

नोएडा में RWA के शीर्ष संगठन URJA (United Residents Joint Action) के अध्यक्ष अतुल गुलाटी ने कहा कि आम तौर पर सोसाइटी के सदस्यों को सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति होती है. उनके साथ आने वाले मेहमान भी इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं.

उन्होंने बताया कि ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां आमतौर पर निवासियों से हर महीने मेंटेनेंस या सब्सक्रिप्शन शुल्क लेती हैं. इसमें सोसाइटी की विभिन्न कॉमन सुविधाओं और अन्य सेवाओं के रखरखाव और इस्तेमाल का खर्च शामिल होता है. हालांकि, इन सुविधाओं के इस्तेमाल के नियम हर सोसाइटी में अलग-अलग हो सकते हैं.

गुलाटी ने कहा, “इन सुविधाओं के इस्तेमाल को लेकर सरकार की ओर से कोई तय नियम नहीं हैं. ज्यादातर सोसाइटियों में नियम सोसाइटी की मैनेजमेंट और निवासी मिलकर तय करते हैं. ये नियम वहां रहने वाले लोगों की जरूरतों और उनकी पसंद को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं.”

गेटेड सोसाइटी में किराएदारों और रहने वालों के लिए अलग-अलग नियम और कानून किराएदारों के बीच बढ़ती चिंता का विषय बन गए हैं | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
गेटेड सोसाइटी में किराएदारों और रहने वालों के लिए अलग-अलग नियम और कानून किराएदारों के बीच बढ़ती चिंता का विषय बन गए हैं | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

RWA के नियमों की हकीकत

गुरुग्राम में करीब 40 किलोमीटर दूर, कुछ ऐसी ही मनमानी व्यवस्थाओं को लेकर निवासी और किरायेदार सवाल उठा रहे हैं.

अतुल गुलाटी गुरुग्राम के सेक्टर 49 स्थित Orchid Petals में 3BHK फ्लैट में रहते हैं. उनके मुताबिक, सोसाइटी की RWA की ओर से बनाए गए एक नए नियम ने उन्हें उस समय हैरान कर दिया, जब उनकी मां को सोसाइटी के कॉमन पार्क में आयोजित डांडिया नाइट में शामिल होने के लिए 4,000 रुपये देने पड़े.

कार्यक्रम का आयोजन सोसाइटी की RWA ने किया था और सभी निवासियों के लिए यह कार्यक्रम मुफ्त था. लेकिन गुलाटी के मुताबिक, जब उनकी मां के लिए इवेंट पास लेने RWA के पास गए, तो उनसे परिवार के दो सदस्यों के लिए 4,000 रुपये लिए गए.

गुलाटी ने आरोप लगाया, “सोसाइटी के अंदर मिलने वाली सुविधाएं और यहां आयोजित होने वाले कार्यक्रम हमारे आवास से जुड़े अधिकारों का हिस्सा हैं, जिनके लिए हम मेंटेनेंस चार्ज देते हैं. लेकिन अब RWA का तानाशाही रवैया हमें हकीकत दिखा रहा है. आए दिन नए नियम और नए शुल्क सामने आ जाते हैं.”

उन्होंने कहा, “क्योंकि मेरी मां का नाम निवासियों की सूची में नहीं है, इसलिए RWA उन्हें सोसाइटी का हिस्सा नहीं मानती. उनके मुताबिक, मेरा परिवार भी इसका हिस्सा नहीं है. हमें कार्यक्रम के लिए पैसे देकर टिकट लेना पड़ा.”

हालांकि, RWA अध्यक्ष राजीव अस्थाना ने इस आरोप से इनकार किया. उन्होंने कहा कि पैसे वाले पास सिर्फ उन बाहरी लोगों के लिए थे, जिन्हें निवासी अपने साथ कार्यक्रम में लाना चाहते थे. उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ऐसे पासों की संख्या सीमित रखी गई थी.

अस्थाना ने कहा, “कार्यक्रम निवासियों के लिए पूरी तरह मुफ्त था. कुछ ही पेड पास उन निवासियों के लिए रखे गए थे, जो सोसाइटी के बाहर से अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को लाना चाहते थे. किसी भी निवासी से कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पैसे नहीं लिए गए.”

गुलाटी ने भुगतान से जुड़े दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले को RWA के सामने भी उठाया था और निवासियों के WhatsApp ग्रुप में अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी.

गुलाटी ने आरोप लगाया, “जब मैंने यह मुद्दा उठाया और RWA के सामने अपनी बात रखी, तो मुझे निवासियों के WhatsApp ग्रुप से ही हटा दिया गया.”

उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम में RWA के सदस्यों के रिश्तेदारों समेत कई बाहरी लोग बिना किसी शुल्क के शामिल हुए.

इसके बाद गुलाटी ने दूसरे निवासियों के सामने भी यह मुद्दा उठाया और सवाल किया कि एक ही नियम को अलग-अलग लोगों पर अलग तरीके से क्यों लागू किया जा रहा है.

गुलाटी ने आरोप लगाया, “RWA चाहती हैं कि निवासी चुपचाप उनके हर फैसले और हर नए नियम को मानते रहें. लेकिन जैसे ही कोई अपनी आवाज उठाता है या सवाल करता है, उसे निशाना बनाया जाने लगता है.”

उन्होंने कहा कि आखिरकार उन्हें अपनी मां को कार्यक्रम में शामिल कराने के लिए यह रकम चुकानी ही पड़ी.

सुविधाओं तक पहुंच के लिए अलग-अलग शुल्क और समय कई समाजों के निवासियों द्वारा उठाई गई कुछ चिंताएं हैं | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
सुविधाओं तक पहुंच के लिए अलग-अलग शुल्क और समय कई समाजों के निवासियों द्वारा उठाई गई कुछ चिंताएं हैं | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

वरिष्ठ नागरिकों के लिए क्लब हाउस

अम्रपाली सफायर की रहने वाली विभा मिश्रा को रिटायरमेंट के बाद अपनी सोसाइटी के क्लब हाउस में एक जाना-पहचाना सा रूटीन मिल गया था. 63-वर्षीय विभा लगभग हर दिन वहां सोसाइटी के दूसरे वरिष्ठ नागरिकों के साथ समय बिताती थीं. कभी खबरों या टीवी शो पर चर्चा होती, कभी दिनभर की बातें साझा की जातीं और कभी लोग बस एक-दूसरे की जिंदगी के किस्से सुनते-सुनाते रहते.

करीब दो साल से चल रहा यह सिलसिला अब टूट गया है. सोसाइटी की AOA ने वरिष्ठ नागरिकों से कहा है कि वे हर दिन क्लब हाउस में इकट्ठा न हों.

मिश्रा ने कहा, “कभी मौसम बहुत गर्म होता है, तो कभी बहुत ठंडा. कई बार गार्डन में बैठना भी ठीक नहीं लगता. इसलिए हम लोग आमतौर पर क्लब हाउस में एक साथ बैठकर बातचीत करते हैं, लेकिन अब AOA के सदस्यों ने हमें वहां बैठने से मना कर दिया है.”

कुछ निवासियों ने आरोप लगाया कि RWA क्लब हाउस की जगह को व्यावसायिक कार्यक्रमों के लिए किराये पर दे रही है. हालांकि, एसोसिएशन ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि क्लब हाउस के कुछ हिस्सों में मरम्मत का काम चल रहा है.

करीब चार महीने से यह मुद्दा सोसाइटी के WhatsApp ग्रुप में चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है.

कई वरिष्ठ नागरिकों के लिए क्लब हाउस सिर्फ एक कॉमन सुविधा नहीं है. यह उनके लिए एक ऐसी जगह बन चुका है, जहां वे अपने हमउम्र लोगों और पड़ोसियों से मिलते हैं, एक-दूसरे के साथ किस्से साझा करते हैं और घर से बहुत दूर गए बिना कुछ घंटे साथ बिता लेते हैं.

मिश्रा ने कहा, “वरिष्ठ नागरिक बहुत दूर नहीं जा सकते. जब हमारे पास आखिरकार एक ऐसी जगह है जहां हम सभी साथ बैठ सकते हैं, तो बिना कोई बैठक किए और निवासियों से पूछे यह फैसला ले लिया गया. हम भी इसी सोसाइटी का हिस्सा हैं और मेंटेनेंस चार्ज देते हैं.”

हालांकि, अम्रपाली नोएडा की AOA के एक सदस्य ने इन आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने दिप्रिंट से कहा कि क्लब हाउस के कुछ हिस्सों में मरम्मत का काम चल रहा है और निवासियों को न तो वहां बैठने से रोका गया है और न ही सुविधा के दूसरे हिस्सों का इस्तेमाल करने से.

AOA सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ये सभी झूठे आरोप हैं, जिन्हें AOA को बदनाम करने के लिए फैलाया जा रहा है. AOA के सदस्य सोसाइटी के लिए स्वेच्छा से काम करते हैं. किसी को भी क्लब हाउस में आने या वहां बैठने से नहीं रोका गया है.”

समस्या सिर्फ दिल्ली-NCR तक सीमित नहीं

कर्नाटक के बेंगलुरु में भी किरायेदारों और छोटे फ्लैटों में रहने वाले लोगों को इसी तरह के विवादों का सामना करना पड़ रहा है. सोशल मीडिया पर ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं. इस साल अप्रैल में एक किरायेदार की ओर से कॉमन सुविधाओं के सीमित इस्तेमाल को लेकर की गई पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई.

पोस्ट में किरायेदार ने आरोप लगाया कि पूरी मेंटेनेंस फीस देने के बावजूद हाउसिंग सोसाइटी के मैनेजमेंट ने 1BHK और 1RK फ्लैटों में रहने वाले लोगों को जिम और स्विमिंग पूल इस्तेमाल करने से रोक दिया.

पोस्ट वायरल होने के बाद कई और लोगों ने अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने शहर की गेटेड सोसाइटियों में खासकर पुरुष किरायेदारों के साथ होने वाले कथित “भेदभाव” की शिकायत की.

इलेक्ट्रॉनिक सिटी फेज-1 के कम्मासंद्रा में 2BHK किराये पर लेकर रहने वाले 36 वर्षीय सार्थक एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट हैं.

उन्होंने कहा, “पुरुष किरायेदारों के साथ यह बहुत आम समस्या है. हम मेंटेनेंस, किराया और उनसे मांगी जाने वाली बाकी सभी रकम देते हैं, लेकिन जब सुविधाओं के इस्तेमाल की बात आती है तो हमें उनका इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाती.”

हालांकि, बेंगलुरु के एक रियल एस्टेट कारोबारी, जो कई हाउसिंग सोसाइटियों से जुड़े हैं, के मुताबिक मामला जितना दिखाई देता है, उससे कहीं ज्यादा जटिल है.

रियल्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “कुछ सोसाइटियों में 1BHK जैसे छोटे फ्लैट कानूनी तौर पर स्वीकृत ही नहीं होते. इनमें से कई फ्लैट किराये पर दिए जाते हैं और उनके मालिक या वहां रहने वाले लोग सोसाइटी के रखरखाव में उसी तरह योगदान नहीं करते. हो सकता है कि वे बिल्डर को सीधे भुगतान करते हों. कुछ सोसाइटियों में उन्हें कॉमन एरिया का इस्तेमाल न करने देने की यह भी एक वजह हो सकती है.”

मामला सिर्फ सुविधाओं तक पहुंच का नहीं

कॉमन एरिया के इस्तेमाल, उनके लिए बनाए गए नियमों और मेंटेनेंस चार्ज को लेकर होने वाले विवाद अब सोसाइटी के WhatsApp ग्रुप और सोशल मीडिया तक पहुंच चुके हैं.

मेंटेनेंस चार्ज में बार-बार होने वाली बढ़ोतरी RWA और निवासियों के बीच विवाद का एक बड़ा कारण बन गई है. कई निवासी सवाल उठा रहे हैं कि मरम्मत, रेनोवेशन और नई सुविधाएं लगाने के नाम पर उनसे बार-बार अतिरिक्त पैसे क्यों मांगे जाते हैं.

गुरुग्राम के सेक्टर 54 की रहने वाली अर्पिता त्रिपाठी ने आरोप लगाया, “हजारों रुपये मेंटेनेंस चार्ज देने के बावजूद हर दूसरे दिन RWA मेंटेनेंस बढ़ाने की बात करती है या रेनोवेशन और किसी नई सुविधा के लिए निवासियों से पैसे मांगती है. इन फैसलों पर पहले कभी हमसे चर्चा भी नहीं की जाती.”

कुछ निवासियों की नाराजगी अपनी सोसाइटी की RWA तक सीमित नहीं है. वे अब इन मामलों में सरकार से हस्तक्षेप की मांग तक पहुंच चुके हैं.

अम्रपाली सफायर में 2020 से रह रही कविता झा ने बताया कि वह अपनी सोसाइटी से जुड़ी समस्याओं को लेकर कई बार जिला रजिस्ट्रार कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय का दरवाजा खटखटा चुकी हैं. उनका कहना है कि या तो शिकायतों पर लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं होती या फिर कोई समाधान नहीं निकलता.

AOA से जुड़े रोजमर्रा के विवादों और सोसाइटी की दूसरी समस्याओं के लिए झा ने अब जिला रजिस्ट्रार कार्यालय या मुख्यमंत्री की CM विंडो पर शिकायत करना भी छोड़ दिया है. इसके बजाय वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सोशल मीडिया हैंडल के जरिए सीधे शिकायत करती हैं.

झा ने कहा, “सोसाइटियों की समस्याओं पर सरकार और मुख्यमंत्री को ध्यान देने की जरूरत है. हमारी समस्याओं का कोई समाधान नहीं करता और कई मामलों में लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है. सरकार को हाउसिंग सोसाइटियों से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए और उन्हें हल करने की दिशा में काम करना चाहिए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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