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Sunday, 30 August, 2026
होमफीचर‘आप महिला हैं, ब्रूअरी कैसे चलाएंगी?’ —कैसे रसज्ञा धर्मना ने इस सवाल का जवाब एक फैक्ट्री बनाकर दिया

‘आप महिला हैं, ब्रूअरी कैसे चलाएंगी?’ —कैसे रसज्ञा धर्मना ने इस सवाल का जवाब एक फैक्ट्री बनाकर दिया

रसज्ञा राव धर्मना भारत में माइक्रोब्रूअरी शुरू करने और कमर्शियल बीयर बनाने वाली यूनिट चलाने वाली पहली महिला हैं. अब उन्होंने भारत की पहली कॉर्न लैगर 'Thala' लॉन्च की है—'विजय माल्या ने मुझे प्रेरित किया.'

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पणजी: 2017 में रसज्ञा राव धर्मना विशाखापट्टनम के एक बैंक में लोन लेने गई थीं. वह आंध्र प्रदेश की पहली माइक्रोब्रूअरी खोलना चाहती थीं. बैंक वालों ने कहा, “अपने पति, पिता या कम से कम किसी पुरुष पार्टनर को लेकर आइए. आप एक महिला हैं, आप ब्रूअरी कैसे चलाएंगी?” उन्होंने सीधे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बड़े अधिकारियों को ईमेल कर दिया और पूछा कि आखिर उनकी कौन सी योग्यता में कमी है. साढ़े चार महीने बाद उन्हें लोन मिल गया और उनकी ब्रूअरी भी शुरू हो गई.

2021 तक, जब उन्होंने गोवा में एक कमर्शियल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए विस्तार करने का फैसला किया, तो वही बैंकिंग सिस्टम खुद उनके पीछे आ गया और लोन के कागज लेकर उनके पास पहुंचा. इस बार उन्हें सिर्फ 15 दिनों में पैसा मिल गया.

बीयर भले ही अब ज्यादा आसानी से मिलने लगी है, लेकिन इसे बनाने का कारोबार अभी भी पुरुषों की दुनिया है. भारत की बढ़ती बीयर इंडस्ट्री में महिला ब्रूअर्स और महिला उद्यमियों की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है. ज्यादातर महिलाओं को HR और मार्केटिंग जैसी भूमिकाओं तक ही सीमित रखा जाता है. लेकिन अब चीजें बदल रही हैं. भारत में Women Brewers Collective की शुरुआत 2021 में सिर्फ पांच सदस्यों के साथ हुई थी, लेकिन चार साल बाद इसके 26 सदस्य हो गए. जब किरण मजूमदार-शॉ ने 1970 के दशक में ऑस्ट्रेलिया में मास्टर ब्रूअर बनने की ट्रेनिंग ली थी, तब लैंगिक भेदभाव की वजह से उन्हें ब्रूइंग का अपना सपना छोड़कर बायोटेक्नोलॉजी में जाना पड़ा. लेकिन आज धर्मना और लिनेट पिरेस जैसी महिलाओं ने इस क्षेत्र के दरवाजे खोल दिए हैं.

रसज्ञा राव धर्मना के नाम कई पहली उपलब्धियां हैं. वह भारत में माइक्रोब्रूअरी शुरू करने वाली पहली महिला बनीं. उन्होंने विजाग में Myz-Uno शुरू की. इसके बाद वह कमर्शियल बीयर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने वाली पहली महिला बनीं, जिसका नाम Reybeir (रेयबेयर) है. वह कॉर्न से बनी lager (लेगर) शुरू करने वाली पहली महिला भी बनीं, जिसका नाम Thala (थाला) है. लेकिन उनके अपने शब्दों में, उन्होंने “अभी तो शुरुआत ही की है.”

“मैं बचपन से ही एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चलाना चाहती थी. बीयर बस संयोग से मेरी जिंदगी में आ गई. और विजय माल्या मेरे लिए प्रेरणा बने,” धर्मना ने दिप्रिंट को बताया. “लोग जो कहना चाहें कह सकते हैं, लेकिन उन्होंने बीयर को फैशनेबल बनाया और उसे लाइफस्टाइल का हिस्सा बना दिया. उनकी बिजनेसमैन के तौर पर काबिलियत का सबूत यह है कि Kingfisher के बाद कई बीयर ब्रांड आए, लेकिन कोई भी उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाया जो उन्होंने हासिल किया. यह बहुत बड़ा लक्ष्य है, लेकिन मैं उनकी जैसी सफलता दोहराना चाहती हूं.”

गोवा में Reybeir की फैक्ट्री. इस नाम का मतलब है ‘बीयर का राजा’ | फोटो: त्रिया गुलाटी | दिप्रिंट

गोवा के हरवलम में तीन एकड़ में फैली Reybeir ब्रूअरी की प्रोडक्शन लाइन पर कुछ महिलाएं बीयर की बोतलों पर Thala के लेबल लगा रही हैं. वहीं दूसरी तरफ दो पुरुष बोतल भरने वाली बेल्ट पर काम कर रहे हैं. यह प्लांट United Breweries की बेथोरा वाली फैक्ट्री से लगभग 26 किलोमीटर दूर है, जहां Kingfisher भी बनाई जाती है.

धर्मना अपने आप में एक ऐसी महिला हैं जिन्होंने इस क्षेत्र में नई राह बनाई है. शराब के पूरे कारोबार में काम करने वाली दूसरी महिलाएं भी इसे मानती हैं.

गोवा की एगेव-स्पिरिट कंपनी माया पिस्तोला की सीओओ किम्बर्ली परेरा ने कहा, “जब कोई महिला ऐसे क्षेत्र में आगे बढ़ती है जहां ऐतिहासिक रूप से महिलाओं की संख्या बहुत कम रही है, तो वह सिर्फ अपने लिए करियर नहीं बनाती. वह उन सभी लोगों के लिए रास्ता बनाती है जो इस क्षेत्र में आने के बारे में सोच रहे हैं और उन लोगों की झिझक भी कम करती है जो वही काम करना चाहते हैं.”

उनके मुताबिक, किसी महिला को इंडस्ट्री के तकनीकी, कारोबारी और पारंपरिक रूप से पुरुषों वाले हिस्से में सफल होते देखना लोगों की यह सोच बदल देता है कि क्या संभव है.

शराब न पीने वाली ब्रूअर

धर्मना पिछले दस साल से बीयर बना रही हैं और उन्होंने देश की पहली कॉर्न-बेस्ड lager भी बनाई है. फिर भी वह सख्त teetotaller (जो व्यक्ति शराब नहीं पीता) हैं और उन्होंने आज तक बीयर की एक बूंद भी नहीं पी है.

भारत में सदियों से फर्मेंटेशन और ब्रूइंग में कॉर्न का इस्तेमाल होता रहा है. लेकिन आधुनिक औद्योगिक ब्रूइंग में इसे पीछे छोड़कर जौ और हॉप्स को ज्यादा इस्तेमाल किया जाने लगा. धर्मना ने एक खास समस्या को हल करने का मौका देखा. वह ऐसी strong beer बनाना चाहती थीं जिसमें कड़वापन न हो.

“भारत में लगभग 85 से 88 प्रतिशत बीयर पीने वाले लोग स्ट्रॉन्ग बीयर चुनते हैं, क्योंकि उन्हें कम कीमत में सिर्फ ‘नशा’ चाहिए. लेकिन ज्यादा अल्कोहल वाली बीयर कड़वी हो जाती है. ज्यादातर हाई-अल्कोहल बीयर उन लोगों को संतुष्टि देती हैं जो ज्यादा स्ट्रेंथ चाहते हैं. मक्का ऐसा नहीं करता. यह तकनीकी रूप से ऐसी स्मूदनेस देता है जो दूसरा अनाज नहीं दे सकता. इससे बीयर में अल्कोहल ज्यादा हो सकता है, लेकिन पीने के समय उसका स्वाद तेज या कड़वा नहीं होता,” उन्होंने रेयबेयर प्लांट में कहा.

Thala का एक मग, जो भारत की पहली corn lager है. रसज्ञा धर्मना इसकी बारीकियों के बारे में विस्तार से बात करती हैं, लेकिन उन्होंने इसे कभी खुद नहीं चखा है | फोटो: त्रिया गुलाटी | दिप्रिंट

इसका एक और मकसद ऐसी स्ट्रॉन्ग बीयर बनाना था जो पारंपरिक भारतीय खाने के साथ अच्छी लगे, खाने के स्वाद से टकराए नहीं और बहुत ज़्यादा मीठी भी न लगे. उन्हें इसका उदाहरण भारत से बहुत दूर मैक्सिको में मिला, जहां मॉडलो जैसी बीयर स्मूदनेस देने के लिए कॉर्न का इस्तेमाल करती हैं. इसी तरह पिछले साल उनका ब्रांड थाला बना, जिसकी हर बोतल पर लिखा है: “भारत की पहली मकई बीयर।” इसका नाम तमिल शब्द ‘थाला’ से आया है, जिसका मतलब ‘लीडर’ है.

“मैं कोई नई चीज खोजने की कोशिश नहीं कर रही. अपनी बीयर के लिए मैंने सदियों पुराने इंग्रीडिएंट को चुना. ब्रांड के नाम के मामले में भी मैंने कुछ ऐसा ही किया,” धर्मना ने कहा. वह एक इंजीनियर हैं और उनके पास कॉर्नेल और यूनिवर्सिडैड कॉम्प्लुटेंस डी मैड्रिड से MBA की डिग्रियां भी हैं. “एक लीडर उदाहरण देकर रास्ता दिखाता है, और मेरी बीयर भी यही करेगी.”

मैं बीयर को लेकर जुनूनी नहीं हूं. मैं एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चलाने, बिजनेस करने और उसे मुफीद बनाने के लिए जुनूनी हूं.

– रसज्ञा राव धर्मना, Reybeir की संस्थापक

Thala फिलहाल दो वैरिएंट में आती है: 5% ABV और 8% ABV. गोवा की इस ब्रूअरी में बनने वाली यह बीयर भारत के दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच चुकी है. लेकिन धर्मना की दिलचस्पी बेंगलुरु या मुंबई के पहले से भरे हुए क्राफ्ट बीयर मार्केट में एक और बोतल जोड़ने में नहीं थी. बीयर को असली मांग पुदुचेरी और छत्तीसगढ़ जैसे बाजारों में मिली, जहां स्मूथ और ज्यादा अल्कोहल वाली बीयर की मांग काफी ज्यादा है. अब वह इस साल के अंत तक Thala को UAE, US और सिंगापुर तक ले जाने के लिए बातचीत कर रही हैं.

Thala दो वैरिएंट में आती है: 555 और ज्यादा strong 888 | फोटो: त्रिया गुलाटी | दिप्रिंट

कॉन्ट्रैक्ट ब्रूइंग की सीमा तोड़ना

धर्मना ने अपना प्लांट गोवा में खास तौर पर वहां के “पानी की गुणवत्ता” की वजह से बनाया. यह ऐसी तकनीकी और शायद कम दिलचस्प लगने वाली चीज है, जो असल में बीयर के स्वाद और कैरेक्टर को तय करने में उसकी ब्रांडिंग से कहीं ज्यादा अहम होती है. लेकिन वह यहां सिर्फ Thala नहीं बनाती. यह प्लांट कई दूसरी कंपनियों के ब्रांड्स के लिए भी कॉन्ट्रैक्ट पर बीयर बनाता है. इनमें गोवा की मशहूर पीपल्स लेगर भी शामिल है.

इसी बिजनेस के पीछे के हिस्से में धर्मना सबसे अलग नजर आती हैं.

कुछ महिलाओं ने खासकर क्राफ्ट बीयर की राजधानी माने जाने वाले बेंगलुरु में ब्रूअर के तौर पर मजबूत पहचान बनाई है. लिनेट पायर्स ने वीमेन ब्रूअर्स कलेक्टिव की शुरुआत की और वह सेवन रिवर्स ब्रूइंग कंपनी में मास्टर ब्रूअर हैं. विद्या कुबेर गीस्ट ब्रूइंग में ऑपरेशंस संभालती हैं. वर्षा भट लंबे समय से शहर के कई बड़े ब्रूपब्स में ब्रूइंग की जिम्मेदारी संभालती रही हैं. लेकिन धर्मना अपनी खुद की कमर्शियल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चलाने वाली अकेली महिला हैं.

दिल्ली के हौज खास मार्केट में फोर्ट सिटी नाम की ब्रूअरी चलाने वाले गौतम गांधी धर्मना को “एक बेहतरीन उद्यमी” कहते हैं.

उन्होंने कहा, “यह पुरुष या महिला की बात नहीं है. बाजार में जगह बनाना बहुत मुश्किल है. यह कॉम्पिटिटिव और हाई-रिस्क स्पेस है, लेकिन उन्होंने यह कर दिखाया. खासकर कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर के तौर पर वह बहुत अच्छा काम कर रही हैं. गोवा की सबसे पॉपुलर बीयर पीपल्स लैगर उनकी ब्रूअरी में बनती है.”

गांधी ने यह भी कहा कि उन्हें इसमें कोई हैरानी नहीं है. “महिलाएं प्राचीन समय से ही बीयर बनाती रही हैं. पुरुषों ने सिर्फ पिछले 500 सालों में बीयर बनाना शुरू किया है.”

कॉन्ट्रैक्ट ब्रूइंग में कोई बीयर ब्रांड अपनी बीयर बनाने का काम किसी लाइसेंस्ड ब्रूअरी को दे देता है, बजाय इसके कि वह खुद का प्लांट लगाए. भारत के कैपिटल-इंटेंसिव बीयर मार्केट में नए ब्रांड्स के लिए यह एक उपयोगी रास्ता है. उदाहरण के लिए, व्हाइट आउल ने मध्य प्रदेश के रायसेन में एक ऑन-कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग ब्रूअरी के साथ पार्टनरशिप की है. वहीं बीरा 91 ने शुरुआत में बेल्जियम में अपनी बीयर कॉन्ट्रैक्ट-मैन्युफैक्चर करवाई थी, जिसके बाद उसने भारत में भी प्रोडक्शन शुरू किया.

कॉन्ट्रैक्ट ब्रूइंग आमतौर पर पुरुषों के हाथ में है क्योंकि यह बहुत डिमांडिंग स्पेस है. इसे शुरू करने और फिर चलाने के लिए करोड़ों रुपये के लोन की जरूरत होती है. कमर्शियल यूनिट्स बिल्कुल आसान नहीं होतीं. जेंडर से अलग, ये हर किसी के लिए फाइनेंशियली डिमांडिंग होती हैं.

– नकुल भोंसले, ग्रेट स्टेट एलेवर्क्स के फाउंडर

इस साल यूनाइटेड ब्रूअरीज ने पंजाब की एडी ब्रोस्वोन ब्रूअरीज के साथ भी लॉन्ग-टर्म प्रोडक्शन डील की है. यह डील उसकी लुधियाना प्लांट बंद होने के बाद हुई.

पुणे, मुंबई और गोवा के 50 से ज्यादा बार्स और रेस्टोरेंट्स को सप्लाई करने वाली क्राफ्ट ब्रूअरी ग्रेट स्टेट एलेवर्क्स के फाउंडर नकुल भोंसले ने कहा, “कमर्शियल बीयर स्पेस में कॉन्ट्रैक्ट ब्रूइंग आम है. और यह आमतौर पर पुरुषों के हाथ में है क्योंकि यह डिमांडिंग काम है और इसे शुरू करने और चलाने के लिए करोड़ों रुपये के लोन की जरूरत होती है. कमर्शियल यूनिट्स बिल्कुल आसान नहीं हैं. जेंडर से अलग, ये हर किसी के लिए फाइनेंशियली डिमांडिंग होती हैं.”

Reybeir का विनिर्माण संयंत्र। रसज्ञा धर्मना भारत में वाणिज्यिक अनुबंध शराब बनाने का काम करने वाली पहली महिला हैं | Reybeir वेबसाइट

धर्मना जानबूझकर लो प्रोफाइल रखती हैं. वह उस फैनफेयर, सोशल मीडिया और प्रेस कवरेज से दूर रहती हैं जो आमतौर पर उनके जैसे कारोबारी को मिलते हैं. इसी वजह से इंडस्ट्री के ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं है कि वह असल में कौन हैं.

भोंसले को याद है कि उन्होंने गोवा की दुकानों में एक नई बीयर देखी थी और उसका स्वाद उन्हें बहुत पसंद आया. उन्होंने इसे “अब तक की सबसे अच्छी कमर्शियल लैगर” कहा. लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह ब्रांड किसका है या इसे कौन बना रहा है. उन्होंने इस बीयर को ढूंढना शुरू किया, लेकिन कई महीनों तक उसका पता नहीं लगा पाए. आखिरकार जब भोंसले ने धर्मना के कमर्शियल प्लांट Reybeir का नाम सुना, तब उन्हें समझ आया कि बीयर किसकी थी.

वहीं धर्मना की फिलहाल गोवा मार्केट में जाने की कोई योजना नहीं है. उनके मुताबिक, वहां के स्थानीय लोग ज्यादा बीयर नहीं पीते और पर्यटक आमतौर पर फैनी जैसे लोकल फ्लेवर्स को पसंद करते हैं.

उन्होंने कहा, “मैं बीयर को लेकर पैशनेट नहीं हूं. मैं एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चलाने, बिजनेस करने और उसे प्रॉफिटेबल बनाने को लेकर पैशनेट हूं.”

काम पर मैनेजर और घर पर भी 

धर्मना की बीयर की कहानी करीब 12 साल पहले शुरू हुई. 2014 में शादी के कुछ ही महीनों बाद, वह और उनके पति भरत कम्मा अपने-अपने MBA करने के लिए स्पेन चले गए. उन्होंने एक-दूसरे से एक सेमेस्टर के अंतर पर पढ़ाई की, इस दौरान एक-दूसरे का साथ दिया और इसी दौरान कहीं न कहीं बीयर उनकी साझा महत्वाकांक्षा की बातचीत का हिस्सा बन गई.

स्पेन में ही धर्मना के दिमाग में बीयर को एक बिजनेस के तौर पर देखने का विचार आने लगा. यूनिवर्सिडैड कॉम्प्लुटेंस डी मैड्रिड में अपनी क्लास के पहले दिन उन्होंने कहा कि उन्हें खुद को एक “एलियन” जैसा महसूस हुआ. कमरे में अकेली भारतीय छात्रा होने के नाते, जब उन्होंने बाकी छात्रों को बीयर के कैन और गिलास लेकर आते देखा तो वह हैरान रह गईं. यह उनके लिए एक “कल्चरल शॉक” था, जो जल्द ही जिज्ञासा में बदल गया.

धर्मना कहती हैं कि उन्होंने अपनी फैक्ट्री के लिए गोवा को वहां के पानी की क्वालिटी की वजह से चुना | फोटो: त्रिया गुलाटी | दिप्रिंट

हालांकि वह बीयर नहीं पीती थीं, धर्मना ने वाइन टेस्टिंग और ब्रूअरी टूर में जाना शुरू कर दिया. वह सिर्फ यह नहीं देख रही थीं कि लोग क्या पीते हैं, बल्कि यह भी देख रही थीं कि इसके आसपास किस तरह का बिजनेस और कल्चर बना है. इस इंडस्ट्री ने उन्हें आकर्षित किया और अपने देश में इसमें महिलाओं की कमी ने उन्हें इसमें सीधे उतरने से नहीं रोका.

“मेरा सपना एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट खोलने का था. बस उस यूनिट को अपना प्रोडक्ट मिल गया,” उन्होंने कहा.

आखिरकार यही सपना Reybeir बन गया. कम्मा, जिन्हें वह अपना “सबसे मजबूत सहारा” कहती हैं, पिछले आठ साल से वहां ऑपरेशंस संभाल रहे हैं. वह सीधे अपनी पत्नी को रिपोर्ट करते हैं.

वह बहुत मुश्किल से समझ में आने वाली इंसान हैं. बिजनेस में वह भावनाओं से नहीं चलतीं. हर चीज में उन्हें तर्क चाहिए. उनके लिए 2+2=4 है. वह भावनाओं के आधार पर फैसले नहीं लेतीं.

– भरत कम्मा, धर्मना के पति और Reybeir में ऑपरेशंस के प्रमुख

“फाइनेंस, मैनेजमेंट और बिजनेस से जुड़े फैसले वही लेती हैं, क्योंकि यह उनकी सबसे बड़ी ताकत है. ऑपरेशंस मेरी मजबूत साइड है, इसलिए मैं फ्लोर संभालता हूं,” कम्मा ने कहा.

इस व्यवस्था की वजह से वह मैन्युफैक्चरिंग फ्लोर पर काम करने वाले कर्मचारियों के ज्यादा करीब रहते हैं और उन्हें कर्मचारियों की नजर से धर्मना को देखने का मौका भी मिलता है.

उन्होंने कहा, “वह बहुत मुश्किल से समझ में आने वाली इंसान हैं. बिजनेस में वह भावनाओं से नहीं चलतीं. हर चीज में उन्हें तर्क चाहिए. उनके लिए 2+2=4 है. वह भावनाओं के आधार पर फैसले नहीं लेतीं.”

धर्मना उस चीज का पालन करती हैं जिसे वह “ट्रिपल बॉटम लाइन” कहती हैं: पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक स्थिरता.

Reybeir यूनिट में काम करती महिलाएं. फैक्ट्री की करीब 70 प्रतिशत वर्कफोर्स महिलाएं हैं | फोटो: त्रिया गुलाटी | दिप्रिंट

प्लांट पूरी तरह सोलर एनर्जी से चलता है, जबकि इसके ऑपरेशंस में नेचुरल गैस का इस्तेमाल होता है. कम्मा के मुताबिक, कर्मचारियों को जेंडर के बजाय उनकी स्किल के आधार पर सैलरी मिलती है. और इस समीकरण का तीसरा हिस्सा बिल्कुल साफ है: बिजनेस को पैसा कमाना ही होगा.

कम्मा ने आगे कहा, “वह हमेशा कहती हैं, ‘नंबर्स के बिना पैशन का कोई मतलब नहीं है.'” हालांकि वह उन्हें ऐसी इंसान भी बताते हैं जो “फेमिनिस्ट” सोच को पसंद करती हैं, और Reybeir में कर्मचारियों का प्रोफाइल भी यही दिखाता है.

इस फैसिलिटी की करीब 70 प्रतिशत वर्कफोर्स महिलाएं हैं. फैक्ट्री फ्लोर पर महिलाएं बीयर की बोतलें पैक करती हैं, लेबल लगाती हैं और कार्टन तैयार करती हैं. कुछ महिलाओं को ब्रूइंग की ट्रेनिंग भी दी गई है. एक इंटर्न खास तौर पर Reybeir में ब्रूइंग सीखने के लिए चेन्नई से गोवा तक आई और पिछले चार महीनों से यहां ट्रेनिंग ले रही है.

कम्मा ने कहा, “रसज्ञा कहती हैं कि अगर महिलाओं को सशक्त बनाया जाए, तो पूरा परिवार सशक्त होता है.”

मतभेद होते हैं. बहस होती है. काम उनके साथ घर तक आता है और घर की बातें काम में भी आ जाती हैं. फिर भी दोनों ने ऐसा रिश्ता बनाया है जिसमें कोई भी दूसरे को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं मानता.

सबसे जरूरी बात, कम्मा ने कहा, “हमारे रिश्ते में अहंकार की कोई जगह नहीं है.”

एक पाप का बिजनेस?

छोटे शहर की परवरिश से निकलकर भारत की कमर्शियल ब्रूइंग इंडस्ट्री में कदम रखने वाली कुछ महिलाओं में शामिल होने तक धर्मना का सफर लोगों से अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने लाता है.

कम्मा ने कहा, “कुछ लोग उसकी यात्रा से प्रेरित होते हैं, जबकि कुछ लोग उसे बहुत प्रभावशाली मानकर असहज हो जाते हैं.”

जब उन्होंने 2017 में विशाखापट्टनम में एक माइक्रोब्रूअरी Myz-Uno खोलकर शुरुआत की, तो सवाल सिर्फ बिजनेस की दुनिया से नहीं आए. रिश्तेदारों और उनके सोशल सर्कल ने भी उनसे सवाल किए. कुछ लोगों ने तो उनके माता-पिता से भी सवाल किया कि उन्होंने अपनी इकलौती संतान को कैसी परवरिश और कैसी वैल्यूज दी हैं. कुछ लोगों ने तो सीधे पूछ लिया: “आप यह पाप का बिजनेस क्यों कर रही हैं?”

धर्मना ने इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. उन्हें अपना साम्राज्य बढ़ाना था.

उन्होंने कहा, “फैक्ट्री या इक्विपमेंट को यह पता नहीं होता कि उन्हें चलाने वाला पुरुष है या महिला. फिर लोगों को क्यों पता होना चाहिए? मेरी परवरिश कभी इस सोच के साथ नहीं हुई कि पुरुष और महिलाओं में कोई फर्क होता है.”

Myz-Uno आंध्र प्रदेश की पहली माइक्रोब्रूअरी है और भारत में किसी महिला द्वारा शुरू की गई पहली माइक्रोब्रूअरी है | फोटो: फेसबुक

हालांकि धर्मना ने यह जरूर सोचा कि Myz-Uno किस तरह की जगह होगी. वह नहीं चाहती थीं कि उसकी बदनामी हो या वह ऐसी जगह बन जाए जहां परिवार आने से हिचकें. उन्होंने इसे एक महंगे और अच्छे रेस्टोरेंट की तरह डिजाइन किया, जहां लोग खाने, माहौल और अनुभव के लिए आ सकें और जिसके बीच में ताजा बनी बीयर हो.

अगर कोई काम पुरुष के लिए कानूनी है, तो मैं वह क्यों नहीं कर सकती? अगर यह पाप है या कुछ गलत है, तो सरकार को इसे बैन कर देना चाहिए. सिर्फ इसलिए मेरी नैतिकता पर सवाल मत उठाइए क्योंकि मैं एक महिला हूं.

– धर्मना

जल्द ही Myz-Uno को अच्छी प्रतिक्रियाएं मिलने लगीं. आंध्र प्रदेश की सबसे पुरानी लाइफस्टाइल पब्लिकेशंस में से एक Yo! Vizag ने Myz-Uno और एक दूसरी नई माइक्रोब्रूअरी Ironhill के खुलने को “2017 में विजाग में हुई 17 यादगार चीजों” में शामिल किया. उसने लिखा कि शहर ने अपनी पहली माइक्रोब्रूअरी के लिए “टोस्ट उठाया” था. ट्रिपएडवाइजर पर 2018 में एक रिव्यू करने वाले व्यक्ति ने लिखा कि अंदर जाना “पूरी तरह एक नई दुनिया में जाने जैसा” लगा. दूसरे लोगों ने बीयर और माहौल की तारीफ की. कुछ लोगों ने, जैसा कि होना ही था, कीमतों, सर्विस या कुछ खास बीयर की शिकायत भी की.

फिर भी लाइफस्टाइल मैगजीन और रेस्टोरेंट रिव्यू के पन्नों से बाहर, धर्मना के सोशल और फैमिली सर्कल में कई लोग महिलाओं को शराब बेचने के खिलाफ पुरानी बातें दोहराते रहे.

कम्मा ने याद करते हुए कहा, “मैंने उनसे कहा कि भारतीय समाज अभी इतना परिपक्व नहीं हुआ है कि वह महिलाओं की क्षमता को समझ सके कि वे शराब के क्षेत्र में आ सकती हैं. इसलिए हमें पता था कि उनके सामने क्या-क्या आएगा. लेकिन चाहे कुछ भी हुआ, हमने स्थिर रहने का फैसला किया.”

धर्मना के लिए स्थिर रहने का मतलब था कि वह दूसरे लोगों की असहजता को अपनी नैतिकता तय करने का आधार नहीं बनने देंगी.

उन्होंने कहा, “अगर कोई काम पुरुष के लिए कानूनी है, तो मैं वह क्यों नहीं कर सकती? अगर यह पाप है या कुछ गलत है, तो सरकार को इसे बैन कर देना चाहिए. सिर्फ इसलिए मेरी नैतिकता पर सवाल मत उठाइए क्योंकि मैं एक महिला हूं.”

और जब धर्मना ने अपनी बात साफ और जोर से कह दी, तो वह वापस अपने साधारण से केबिन में काम करने चली गईं.

यह एक बड़ी और साफ जगह है, जिसमें एक टेबल और एक कुर्सी के अलावा बहुत कम चीजें हैं. कोई शानदार सजावट नहीं, कोई दिखावा नहीं, ऐसी कोई चीज नहीं जो यह बताने के लिए बनाई गई हो कि बॉस कौन है. कमरे की सादगी धर्मना की तरह ही है: व्यावहारिक, बिना किसी ड्रामे के और नतीजों पर ध्यान देने वाली.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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