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Tuesday, 7 July, 2026
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दिल्ली में बारिश लगभग कभी भी सामान्य नहीं रही: आंकड़े

2019 में जब पूरे भारत में सामान्य से 110% बारिश हुई थी, तब दिल्ली में बारिश एक दशक के दूसरे सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी.

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नई दिल्ली: इस साल जून में दिल्ली में सिर्फ 41.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस महीने की औसत बारिश 74 मिमी होती है. यानी इस बार जून में दिल्ली में सामान्य से लगभग आधी बारिश हुई. दक्षिण-पश्चिम मानसून 2 जुलाई को दिल्ली पहुंचा, जो तय समय से पांच दिन देर से था, लेकिन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा मानसून आने की घोषणा के बाद भी दिल्ली के कई हिस्से सूखे रहे.

इस हफ्ते जहां मुंबई में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है, वहीं 7 जुलाई को दिल्ली का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और इसके उच्च बने रहने की संभावना है. 6 जुलाई को दिल्ली में नमी (ह्यूमिडिटी) 85 प्रतिशत दर्ज की गई, जिससे एक्यूवेदर के मुताबिक ‘फील्स लाइक’ तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.

लेकिन पिछले साल जून में दिल्ली में 107 मिमी बारिश हुई थी, जो इस साल जून की बारिश से दोगुने से भी ज्यादा थी. वहीं जून 2024 में राजधानी में 243 मिमी बारिश हुई थी, जो जून की औसत 74 मिमी बारिश से लगभग तीन गुना थी.

ग्राफिक: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट
ग्राफिक: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट

स्काईमेट वेदर में मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन विभाग के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा, “दिल्ली में मानसून के दौरान बारिश का कोई तय पैटर्न नहीं है. लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि पिछले 8-10 सालों में यहां बारिश काफी अनियमित रही है.”

आईएमडी के मानसून आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में हर साल बारिश का स्तर काफी बदलता रहता है. कभी सामान्य से कम बारिश होती है तो कभी सामान्य से ज्यादा, और कई बार लगातार दो सालों में भी यह बदलाव देखने को मिलता है. दिप्रिंट ने पिछले 15 साल के दिल्ली के बारिश के आंकड़ों का विश्लेषण कर इस साल-दर-साल बदलने वाले पैटर्न को समझने की कोशिश की.

साल 2011 के बाद दिल्ली में सबसे कम मानसूनी बारिश 2014 में हुई थी. उस साल सिर्फ 370 मिमी बारिश दर्ज की गई थी. यह El Niño का भी एक मध्यम प्रभाव वाला साल था और पूरे भारत में मानसून की औसत बारिश से 10 प्रतिशत कम बारिश हुई थी.

वहीं, पिछले 15 सालों में सबसे ज्यादा मानसूनी बारिश 2021 में हुई थी. उस साल दिल्ली में 1,169 मिमी बारिश दर्ज की गई थी. यह दिल्ली की लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) यानी 30 साल की औसत बारिश के मुकाबले 83 प्रतिशत ज्यादा थी. एलपीए किसी क्षेत्र में 30 साल की औसत बारिश होती है और इसी को मानक माना जाता है.

महेश पलावत ने बताया कि दिल्ली में जिन वर्षों में ज्यादा मानसूनी बारिश होती है, उनमें अक्सर बारिश कई दिनों तक लगातार नहीं होती. बल्कि एक या दो दिन में बहुत तेज बारिश हो जाती है.

उन्होंने कहा, “80 और 90 के दशक में जो लगातार बारिश होती थी, वह अब लगभग गायब हो गई है. अब दिल्ली में कम समय में बहुत तेज बारिश के दौर ज्यादा देखने को मिलते हैं.”

दिल्ली में मानसून की बारिश क्यों होती है?

देश के बाकी हिस्सों की तरह दिल्ली में भी बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है. यह मानसून केरल से भारत में प्रवेश करता है और फिर उत्तर की ओर बढ़ता है. लेकिन दिल्ली समुद्र से दूर है. साथ ही हिमालय, अरावली पर्वतमाला और स्थानीय हवाओं का असर भी यहां की बारिश पर काफी पड़ता है.

आईएमडी के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर जून के आखिर में दिल्ली पहुंचता है. लेकिन दिल्ली में सबसे ज्यादा बारिश जुलाई और अगस्त में होती है, जबकि सितंबर के साथ बारिश का मौसम खत्म होने लगता है.

ग्राफिक: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट
ग्राफिक: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट

हालांकि पिछले 15 साल के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में सिर्फ दो साल—2011 और 2023—में ही सामान्य या औसत बारिश हुई. इस दौरान सात साल सामान्य से कम बारिश हुई, जबकि छह साल सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई.

ग्राफिक: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट
ग्राफिक: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट

आंकड़े यह भी बताते हैं कि El Niño और La Niña जैसी बड़ी जलवायु घटनाएं भी दिल्ली के मानसून को प्रभावित करती हैं. ये घटनाएं प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में होती हैं और समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने या घटने से जुड़ी होती हैं.

El Niño के दौरान समुद्र का तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून अक्सर कमजोर पड़ जाता है. वहीं ला नीना के दौरान इसका उल्टा होता है और भारत में मानसून ज्यादा मजबूत रहता है.

उदाहरण के तौर पर, 2014, 2015 और 2016 में प्रशांत महासागर में बहुत मजबूत एल नीनो विकसित हुआ था. यह अब तक का दूसरा सबसे शक्तिशाली एल नीनो माना जाता है. इन तीनों सालों में दिल्ली में सामान्य से कम बारिश हुई.

दिल्ली में बारिश इतनी अनियमित क्यों होती है?

लेकिन 2019 में, जब पूरे भारत में लॉन्ग पीरियड एवरेज का 110 प्रतिशत बारिश हुई, तब दिल्ली में सिर्फ 404 मिमी बारिश दर्ज की गई. यह एक दशक की दूसरी सबसे कम बारिश थी.

इससे पता चलता है कि दिल्ली का मानसून हमेशा देश के बाकी हिस्सों जैसा नहीं होता और स्थानीय कारण भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं.

साल 2022 में आईआईटी दिल्ली के सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंसेज की एक स्टडी में कहा गया कि 1980 के दशक से 2016 तक दिल्ली में मानसून की कुल बारिश दो वजहों से कम हुई.

पहली वजह यह थी कि बड़े स्तर पर मानसूनी हवाओं का सिस्टम कमजोर हो गया. दूसरी वजह यह थी कि दिल्ली में तेजी से हुए शहरीकरण (अर्बनाइजेशन) ने यह तय करना शुरू कर दिया कि शहर के किस हिस्से में बारिश होगी और किस हिस्से में नहीं.

इस अध्ययन में 1987-1996 की बारिश को आधार माना गया. इसके बाद के दो दशकों (1997-2006 और 2007-2016) में दिल्ली की मानसूनी बारिश लगभग 30 प्रतिशत कम पाई गई.

शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि समय के साथ मानसून लो-लेवल जेट (एमएलएलजे) कमजोर हो गया. एमएलएलजे निचले वायुमंडल में चलने वाली हवाओं का एक सिस्टम है, जो अरब सागर से नमी लेकर आता है. यही भारतीय मानसून की बारिश की सबसे बड़ी वजहों में से एक है.

लेकिन इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि दिल्ली में तेजी से बढ़ते शहरीकरण की वजह से शहर के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग मात्रा में बारिश होने लगी. इसकी वजह अर्बन हीट आइलैंड (यूएचआई) प्रभाव है.

यूएचआई प्रभाव के कारण जिन इलाकों में ज्यादा इमारतें और कंक्रीट होती है, वहां का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में काफी ज्यादा हो जाता है.

इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में कुल बारिश कम हो गई है, बल्कि अब शहर के अलग-अलग इलाकों में होने वाली बारिश की मात्रा और उसका फैलाव पहले की तुलना में ज्यादा बदलने लगा है.

ये नतीजे भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे के मौसम वैज्ञानिकों के व्यापक अध्ययन से भी मेल खाते हैं. उन्होंने पाया कि 1950 के दशक के बाद से भारत में अत्यधिक बारिश की घटनाएं तीन गुना बढ़ गई हैं, जबकि मानसून की कुल बारिश और नमी दोनों में कमी आई है.

इस बीच आईएमडी के जुलाई महीने के ताजा मानसून पूर्वानुमान में कहा गया है कि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के ज्यादातर इलाकों में सामान्य से कम बारिश होगी.

इस पूर्वानुमान में खेती, पीने के पानी और दूसरी जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई गई है. IMD के नक्शे के मुताबिक, इस महीने दिल्ली में भी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है.

ग्राफिक: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट
ग्राफिक: मान्या अग्रवाल/दिप्रिंट

आईएमडी ने कहा, “ऐसी स्थिति में कई क्षेत्रों में गर्मी से होने वाली परेशानी (हीट स्ट्रेस) का खतरा बढ़ सकता है और उपलब्ध जल संसाधनों पर दबाव भी बढ़ सकता है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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