कोलकाता: बंगाली भद्रलोक लंबे समय से बर्फ के साथ तेज़ शराब और ठंडी बीयर पीना पसंद करते रहे हैं, लेकिन अब कोलकाता में कॉकटेल का चलन लोगों को कुछ नया आजमाने के लिए प्रेरित कर रहा है. अब ट्रफल, मछली का सॉस, चंदन, शिमला मिर्च, चिकन का शोरबा और काला लहसुन जैसी चीजें भी कॉकटेल में इस्तेमाल हो रही हैं.
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में कॉकटेल का चलन अक्सर किसी मशहूर विदेशी ड्रिंक में मिर्च, मसाले या फल मिलाने तक सीमित रहता है, लेकिन कोलकाता ने अलग रास्ता चुना है. यहां रसोई और बार के स्वाद को मिलाया जा रहा है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शहर के लोग ट्रिन्कास और ओलिपब जैसे पुराने बार छोड़कर आठ लोगों के बैठने की जगह वाले बार में मछली के सॉस वाले कॉकटेल पीने लगे हैं. लोग दोनों जगह जा रहे हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखते हैं कि वे कितना पैसा खर्च करना चाहते हैं.
पार्क स्ट्रीट पर लकड़ी की दीवारों वाले योकोचो (Yokocho) में बढ़िया खाना और बंगाली स्वाद वाले कॉकटेल मिलते हैं. यहां 39 साल के ग्राहक रित्विक घोष जिन से बना ‘बॉन्ड वॉक्ड इनटू योकोचो’ नाम का कॉकटेल पी रहे थे. इसे बनाने में जैतून का तेल, साके, गंधराज यानी स्थानीय खुशबूदार नींबू और ड्राई वर्माउथ का इस्तेमाल किया जाता है.
सिगरेट पीने वाले कमरे में सिगरेट का कश लेते हुए उन्होंने कहा, “बांगाली-रा मद्यपान करते भालोबाशे (बंगाली लोगों को शराब पीना पसंद है). लेकिन हमारे शराब पीने का तरीका भी बदला है. हमारे यहां का ढांचा पुराने समय में अटका हुआ है, लेकिन हम नहीं.”
उन्होंने कहा, “ट्रिन्कास या द ब्रॉडवे हमारे लिए एक भावना की तरह हैं, लेकिन अब हम महंगे और शानदार बार में जाने की चाहत भी रखते हैं और वहां खर्च करने की क्षमता भी है.”

कोलकाता में हमेशा से शराब आसानी से और कम कीमत पर मिलती रही है. दशकों से यहां शराब पीने की संस्कृति छोटे बार, क्लब और होटलों के बार के आसपास बनी रही है. 2016 तक कॉकटेल भी यहां चलन में आने लगे थे. लेकिन आम लोगों के लिए विकल्प लगभग एक जैसे ही थे: बीयर का एक मग, बर्फ के साथ व्हिस्की, टकीला और टॉनिक वॉटर या शायद लॉन्ग आइलैंड आइस्ड टी. कॉकटेल महंगे होते थे और लोग बार जाने की मुख्य वजह इन्हें नहीं मानते थे.
अब ऑनलाइन ट्रेंड लगातार देखने वाली Gen Z और मिलेनियल पीढ़ी कुछ ऐसा चाहती है, जिसके बारे में वे दूसरों को बता सकें. वे रंग-बिरंगे, इंस्टाग्राम पर तस्वीरें डालने लायक शर्बत जैसे ड्रिंक, अजीब तरह की सामग्री और अपने गिलास में कुछ खास अंदाज चाहती हैं. पिछले तीन साल में शहर में करीब एक दर्जन नए और महंगे कॉकटेल बार खुले हैं. इनमें Little Bit Sober, AMPM, Nutcase Etc., Conversation Room, Yokocho, Synthe और Rannaghor शामिल हैं.
Nutcase की सह-संस्थापक रितुपर्णा बनर्जी ने कहा, “कोलकाता में शराब पीने की संस्कृति अब पहले से ज्यादा विकसित हुई है. पहले यहां छोटे बार और नाइटलाइफ की मजबूत संस्कृति थी. बार का यह नया चलन शहर में पहले से मौजूद व्यवस्था को और बेहतर बना रहा है. हम पुराने बार की जगह नहीं ले रहे, बल्कि उनके साथ मौजूद हैं.”
कोलकाता के बार कॉकटेल को अपना स्थानीय रंग दे रहे हैं. यहां तेज स्वाद वाली शराब से बने ड्रिंक को पसंद किया जा रहा है और बंगाली घरों की रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीजों, जैसे गोबिंदभोग चावल, करी पत्ता और खजूर के गुड़ के साथ प्रयोग किए जा रहे हैं.
Countertop India, Boilermaker और Quinta Cantina के संस्थापक साझेदार पंकज बालाचंद्रन ने कहा, कोलकाता के कॉकटेल में स्थानीय चीजों को शामिल करना “सिर्फ पुरानी यादों को ताजा करने के लिए नहीं है.”
उन्होंने कहा, “यह कोलकाता के लिए शराब पीने की अपनी अलग पहचान बनाने का एक तरीका भी है, जो सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु की नकल नहीं करती.”
इस नए चलन से कोलकाता के बाहर के लोग भी आकर्षित हो रहे हैं. कोलकाता को नाइटलाइफ और बार के बजाय उसकी विरासत और स्ट्रीट फूड के लिए ज्यादा जाना जाता है. बार की रैंकिंग करने वाले प्लेटफॉर्म 30 Best Bars ने 25 से 27 सितंबर तक तीन दिन का कोलकाता कॉकटेल वीक आयोजित किया. इसमें देशभर और यहां तक कि मलेशिया से भी बारटेंडर, ग्राहक और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पहुंचे.
Tulleeho और 30 Best Bars के संस्थापक विक्रम अचंता ने दिप्रिंट से कहा, “भारत में हमेशा बड़े कदम उठाने का चलन रहा है. हमने छोटे-छोटे कदम उठाने पर कभी ज्यादा ध्यान नहीं दिया. अभी कोलकाता में कॉकटेल का बढ़ता चलन भी इसी सोच को दिखाता है.”
ड्रिंक में ही डिनर?
कोलकाता के कुछ बार में अब ड्रिंक और खाने के बीच फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है.
अब यहां टैंगरा चिली चिकन, प्रॉन कॉकटेल और बंगाली चटनी जैसे पकवानों से प्रेरित कॉकटेल मिल रहे हैं. सरसों, धुएं में पकाई गई मिर्च और फर्मेंट की गई चीजें भी ड्रिंक के मेन्यू में शामिल हो रही हैं.
अचंता ने कहा, “बारटेंडर अब कोई परहेज नहीं कर रहे हैं. वे देख रहे हैं कि ग्राहकों को नमकीन स्वाद वाले कॉकटेल पसंद आ रहे हैं. कुछ बारटेंडर तो बिरयानी का स्वाद भी कॉकटेल में ला रहे हैं.”
इन कॉकटेल को बनाने का तरीका बंगाली स्वाद और अलग-अलग चीजों के मेल पर आधारित है.


Rannaghor में ‘अ फिशी अफेयर’ में Dewar’s 15, आइस्ले व्हिस्की, मूंगफली, फिश सॉस और कोकम मिलाए जाते हैं. वहीं, ‘भाई फोंटा’ में ग्रे गूज, ट्रफल, चंदन और तुलसी को एक गिलास में मिलाया जाता है.
Little Bit Sober का ‘मिडिल ऑफ नोवेयर’ कॉकटेल Patrón Reposado के साथ भुनी हुई शिमला मिर्च के शर्बत, पांच तरह के मसालों और फर्मेंट किए गए चेरी टमाटर से बनाया जाता है. Nutcase में ‘हॉट एंड कोल्ड’ आधा कॉकटेल और आधा शर्बत है. इसमें Johnnie Walker Black के साथ चॉकलेट, मिर्च और संतरा मिलाया जाता है. इसे चम्मच से खाने के लिए बनाया गया है.

पहले कॉकटेल बनाने का तरीका सीधा था. ड्रिंक या तो मीठा होता था, खट्टा होता था या फिर इन दोनों स्वादों का मेल होता था. अब इनमें नमकीन, धुएं जैसा, तीखा और उमामी स्वाद भी शामिल हो गया है. मिसो, तिल, कसुंदी और साफ किए गए टमाटर से बने ड्रिंक अब कोलकाता के लोगों को अजीब नहीं लगते. बारटेंडर अपने ड्रिंक बनाने के लिए अब और भी जटिल तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
उदाहरण के लिए, Nutcase में स्मोक्ड चिपोटले साल्सा से बने कॉकटेल को इस तरह साफ किया जाता है कि उसका स्वाद नमकीन बना रहे, लेकिन ड्रिंक पारदर्शी हो जाए. इसके अलावा फैट-वॉशिंग तकनीक भी है. इसमें शराब में फैट मिलाया जाता है और बाद में उसे निकाल दिया जाता है. इससे ड्रिंक का स्वाद बेहतर और मुंह में उसका एहसास ज्यादा गाढ़ा हो जाता है.
Nutcase की सह-संस्थापक रितुपर्णा बनर्जी ने कहा, “कोलकाता के लोग अब उन तकनीकों के साथ सहज हो रहे हैं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर दूसरे शहरों के महंगे कॉकटेल बार में होता है. इनमें ड्रिंक को साफ करना, दूध से वॉशिंग, फैट-वॉशिंग, कार्बोनेशन और घर पर बनाए गए कॉर्डियल शामिल हैं.”
उन्होंने अविनंदन बनर्जी और मुनीर मोहंती के साथ मिलकर Nutcase शुरू किया था.
खाने-पीने के लेखक और इस क्षेत्र के जानकार आयंद्राली दत्ता ने कहा, “पुराना बार कहता है, ‘आइए, बैठिए, ड्रिंक लीजिए और बात करते हैं.’ नया बार कहता है, ‘आइए, कुछ नया अनुभव कीजिए और फिर उसके बारे में बात करते हैं.’”
रेस्तरां कारोबारी तबरेज नदीम के मुताबिक, स्थानीय चीजों का इस्तेमाल करने से बारटेंडर के पास ग्राहकों को बताने के लिए और भी कहानियां होती हैं. नदीम Lee Road पर करीब चार महीने पहले खुले शानदार बार Synthe के सह-संस्थापक हैं.
उन्होंने कहा, “स्थानीय चीजों को शामिल करने से बारटेंडर के लिए स्थानीय ग्राहकों या दूसरे शहरों से आने वाले लोगों से जुड़ना आसान हो जाता है.”
हालांकि, Synthe का कॉकटेल मेन्यू खास तौर पर बंगाली स्वाद पर आधारित नहीं है. यहां के 11 कॉकटेल को 2030 से 2130 तक की एक काल्पनिक समयरेखा के हिसाब से रखा गया है. हर ड्रिंक एक अलग विचार, एहसास या भविष्य की कल्पना को दिखाता है, लेकिन दूसरे नए बार की तरह यहां भी तीखे स्वाद वाले ड्रिंक पसंद किए जाते हैं.

हरी सब्जियों और जड़ी-बूटियों से बना एक ड्रिंक लगभग सलाद जैसा लगता है. ऑक्सीडाइज्ड वाइन उष्णकटिबंधीय फलों से बने टकीला कॉकटेल में नमकीन स्वाद जोड़ती है. कैमोमाइल से ओल्ड फैशन्ड कॉकटेल का स्वाद हल्का हो जाता है, जबकि वसाबी, युजू और मेजकल मिलकर धुएं जैसे, तीखे और खट्टे स्वाद वाला ड्रिंक बनाते हैं.
नदीम ने कहा, “हमने देखा कि कई बार स्थानीय स्वादों के साथ प्रयोग कर रहे हैं. Synthe में हम स्थानीय के बजाय अंतरराष्ट्रीय स्वादों के साथ ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं. हम कोलकाता के लोगों को बेहतर और खास अनुभव देना चाहते हैं, जिसमें ज्यादा दमदार और दुनिया भर के स्वाद हों.”

पुराना ढांचा, नई भाषा
जब रितुपर्णा बनर्जी करीब दो दशक तक मुंबई, बेंगलुरु और लंदन में रहने के बाद 2023 में कोलकाता लौटीं, तो उन्हें लोगों से मिलने-जुलने और बस आराम से वक्त बिताने के लिए जगह ढूंढने में परेशानी हुई. इसलिए उन्होंने 2025 में Nutcase नाम का एक बार खोल लिया. उनके लिए यह काम आसान भी था, क्योंकि वह 14 साल तक शेफ रह चुकी थीं.
तब तक कोलकाता में कॉकटेल का नया चलन शुरू हो चुका था. इस क्षेत्र में आने वाले शुरुआती बार में से एक Little Bit Sober (LBS) था, जो 2023 में चौरंगी रोड पर खुला. उस समय इस तरह के बार चलाने के लिए कोई खास मॉडल या उदाहरण मौजूद नहीं था.
LBS की सह-संस्थापक मौमिता मुखर्जी ने कहा, “हम जब भी कहीं घूमने जाते थे, तो हमें ऐसी शांत जगहों पर जाना पसंद था, जहां शानदार कॉकटेल और खाना मिलता हो. इसलिए जब हमने कोलकाता के बाजार के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की, तो हमें पता चला कि यहां ऐसे लोगों का एक छोटा समूह है, जिन्हें इस तरह की जगहें पसंद हैं, लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं है.”
यह बात उन्होंने उस लंबे वीकेंड के दौरान कही, जब भीड़ के शोर के बीच जोर-जोर से बोलने के कारण उनकी आवाज लगभग चली गई थी.

अचंता के मुताबिक, Little Bit Sober के खुलने से कोलकाता के कॉकटेल जगत में बड़ा बदलाव आया.
उन्होंने कहा, “दस साल पहले, जब कोलकाता में The Grid खुला था, तो कॉकटेल के लिहाज से वह पहला गंभीर प्रयास था. इसके बाद अगला बड़ा बदलाव आने में काफी समय लगा…और फिर 2023 में Little Bit Sober खुला. मुझे लगता है कि कारोबारी भी सही समय का इंतजार कर रहे थे, जब ग्राहक इस तरह के बार को अपनाने के लिए तैयार हों.”

आज कोलकाता में शराब पीने की जगहों के मामले में पुराने बार और नए बार एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी कम और बाजार के दो अलग-अलग हिस्से ज्यादा हैं. लोग अपनी पसंद और उस दिन खर्च करने के बजट के हिसाब से जगह चुनते हैं.
रितुपर्णा बनर्जी ने अपने कानों के पीछे अपने छोटे, सफेद होते बालों को करते हुए कहा, “कोलकाता में शराब पीने की संस्कृति अब पहले से ज्यादा विकसित हुई है. पहले यहां छोटे बार और नाइटलाइफ की मजबूत संस्कृति थी. बार का यह नया चलन शहर में पहले से मौजूद व्यवस्था में कुछ नया जोड़ रहा है. हम पुराने बार की जगह नहीं ले रहे, बल्कि उनके साथ मौजूद हैं.”
इनमें से कई नए बार ने कोलकाता के पुराने दौर को नकारने के बजाय उससे चीज़ें अपनाई हैं. कुछ बार पुरानी इमारतों में खुले हैं और वहां की बनावट को अपने अनुभव का हिस्सा बनाया है. मनोहरपुकुर रोड पर स्थित Nutcase के आधुनिक कॉकटेल मेन्यू के साथ पुराने जमाने की खड़खड़ी वाली खिड़कियां और आर्ट डेको शैली की सजावट दिखाई देती है. चौरंगी रोड पर Conversation Room भी एक पुरानी औपनिवेशिक इमारत में है, जहां ऊंची छतें और पुरानी बनावट देखने को मिलती है.

पुराने और नए बार का माहौल भी काफी अलग है. इसकी एक वजह इनका आकार है. Olypub और Trincas में करीब 200-200 लोग बैठ सकते हैं, जबकि Synthe जैसे नए बार में सिर्फ 32 सीटें हैं. Rannaghor में तो केवल आठ लोगों के बैठने की जगह है. हालांकि, सभी नए बार छोटे नहीं हैं. Little Bit Sober में 56 लोगों के बैठने की जगह है. यहां गहरे लाल रंग के मखमली पर्दों के बीच बिजली जैसे चमकीले नीले रंग का बार है. वहीं, AMPM में 158 लोग बैठ सकते हैं.
खाने-पीने की लेखिका और इस क्षेत्र की जानकार आयंद्राली दत्ता के मुताबिक, दोनों तरह के बार के बीच अंतर इस बात से भी जुड़ा है कि लोग अब बाहर जाकर वक्त बिताने से क्या उम्मीद करते हैं. अब हर किसी के लिए सिर्फ ड्रिंक और तेज म्यूजिक काफी नहीं है. नए बार एक खास अनुभव दे रहे हैं, जिसमें सजावट, खाना और उसके पीछे की कहानी भी शामिल है.
उन्होंने कहा, “पुराना बार कहता है, ‘आइए, बैठिए, ड्रिंक लीजिए और बात करते हैं.’ नया बार कहता है, ‘आइए, कुछ नया अनुभव कीजिए और फिर उसके बारे में बात करते हैं.’”

पुराने बार भी कॉकटेल के इस नए चलन का हिस्सा बन रहे हैं. तीन दिन तक चले कोलकाता कॉकटेल वीक के दौरान कम से कम पांच या छह बार टेकओवर एक साथ हुए. 27 सितंबर को 89 साल पुराने ब्रॉडवे होटल में पहली बार ऐसा आयोजन हुआ. इसमें दक्षिण गोवा के MOFO नाम के स्पीकईजी टैवर्न ने बार की जिम्मेदारी संभाली और अपने ड्रिंक परोसे.
तीसरी पीढ़ी के मालिक राघव सहगल ने कहा, “हमने यह आयोजन नए बार से मुकाबला करने के लिए नहीं किया. हमें लगा कि ब्रॉडवे के ग्राहक कुछ अलग अनुभव करने के लिए तैयार हैं. इसके अलावा, कोई मुकाबला नहीं है. हम सब मिलकर कोलकाता के फूड एंड बेवरेज (F&B) क्षेत्र को अगले स्तर पर ले जा सकते हैं.”
2022 के आखिर से कोलकाता में दूसरे शहरों से आने वाले बारटेंडर और मिक्सोलॉजिस्ट के कार्यक्रम लगातार बढ़े हैं. खासकर पिछले दो साल में बार टेकओवर का चलन तेजी से बढ़ा है.
अचंता ने कहा, “यहां के बारटेंडरों को इससे अच्छा अनुभव मिलता है, लेकिन ग्राहकों को भी नई चीजें सीखने को मिलती हैं. उनके स्वाद की पसंद भी बदलती रहती है और वे नए प्रयोगों को अपनाने के लिए ज्यादा तैयार होते हैं.”

कोलकाता के कॉकटेल पसंद करने वाले ग्राहकों ने मलेशिया के पेनांग स्थित Good Friends Club के बारटेंडर केल्विन वोंग को भी प्रभावित किया. उन्होंने JW Marriott के 2:Fifty9 The Bar में बार टेकओवर के दौरान अपने ड्रिंक परोसे. उनका केले की क्रेम ब्रूले से प्रेरित कॉकटेल काफी पसंद किया गया.
उन्होंने कहा, “हम कोलकाता में मलेशिया का एक छोटा-सा हिस्सा लेकर आए थे… और मुझे कहना होगा कि यहां के लोग खूब ड्रिंक करते हैं. वे जानना चाहते थे कि इसमें किस तरह की शराब का इस्तेमाल किया गया है, कौन-सी मलेशियाई चीजें मिलाई गई हैं और फैट-वॉशिंग जैसी कोई खास प्रक्रिया अपनाई गई है या नहीं. यहां के लोग हर चीज के बारे में जानने को उत्सुक थे.”

महंगा पड़ता है बाहर पीना
कोलकाता के नए बार में एक खास तरीके से तैयार की गई कॉकटेल की कीमत आमतौर पर 600 से 1,000 रुपये होती है. महंगी शराब और कॉकटेल बनाने के खास तरीकों की वजह से इसकी कीमत और बढ़ जाती है. लेकिन ऐसा लगता है कि शहर के लोग खर्च करने की एक सीमा तक ही तैयार हैं.
नदीम ने कहा, “कोलकाता का फूड एंड बेवरेज (खाने-पीने) का कारोबार अच्छा है. यहां आपको 50 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का खाना मिल जाएगा. आम धारणा के उलट, ज्यादातर बंगाली लोग बाहर खाना-पीना पसंद करते हैं. लेकिन इस शहर में लोग कीमत को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं. इसकी तुलना दिल्ली से नहीं की जा सकती, जहां प्रति व्यक्ति औसत बिल (APC यानी Average Per Cover) काफी ज्यादा होता है.”
योकोचो में दो लोगों का औसत बिल, जिसमें ड्रिंक्स भी शामिल हैं, 3,000 से 3,500 रुपये तक होता है. लेकिन शेफ और पार्टनर औरोनी मुखर्जी का कहना है कि कोलकाता के लोग पैसे खर्च करने को लेकर ज्यादा सोच-विचार करते हैं.
उन्होंने कहा, “दिल्ली में दिखावा करने का चलन है. वहां लोग सिर से पैर तक महंगे ब्रांड के कपड़े और दूसरी चीजें पहने रहते हैं और खूब पैसा खर्च करते हैं. कोलकाता में लोग खर्च तो करते हैं, लेकिन बहुत सोच-समझकर.”

अगर कोलकाता के लोगों को अपने पैसे के हिसाब से सही कीमत और अनुभव मिले, तो वे ज्यादा खर्च करने को तैयार हो जाते हैं. बनर्जी का कहना है कि उन्हें एक कॉकटेल के लिए “1,800 रुपये” तक खर्च करने के लिए मनाया जा सकता है.
कोलकाता के ये नए कॉकटेल पसंद करने वाले लोग इस बात को लेकर काफी खास पसंद रखते हैं कि उनके गिलास में क्या डाला जा रहा है.
बनर्जी के बार में जानबूझकर महंगी और अच्छी क्वालिटी की शराब रखी जाती है. जिन ग्राहकों को जिन या वोडका से बनी कॉकटेल चाहिए, वे खुद अपनी पसंद का ब्रांड चुनना चाहते हैं. उन्हें वर्माउथ, अमारो और बिटर्स जैसी चीजों के बारे में भी अपनी पसंद और राय पता है.

मिलेनियल यानी नई पीढ़ी के शराब पीने वाले अरित्र सेन के लिए पार्क स्ट्रीट का ओलिपब और एस्टर होटल का प्लश (अब फीनिक्स) आज भी दोस्तों के साथ बाहर जाने के लिए पहली पसंद हैं. लेकिन कभी-कभी उन्हें महंगे और शानदार बार में जाना भी पसंद है.
सेन ने कहा, “मैं खाने-पीने का शौकीन हूं. मुझे ड्रिंक करना और नए प्रयोग करना पसंद है. मुझे अच्छी तरह से तैयार किए गए अनुभव भी पसंद हैं. जैसे व्हिस्की सांबा में जापानी थीम वाला अनुभव.”
शहर में नए बार खुलने के साथ कोलकाता की नाइटलाइफ अब सिर्फ पार्क स्ट्रीट तक सीमित नहीं रह गई है. पहले रात में बाहर घूमने-फिरने के लिए शहर के लगभग सभी लोग पार्क स्ट्रीट पर ही इकट्ठा होते थे.
32 साल की डेंटिस्ट बृष्टि ने बताया कि 10 साल पहले डेट पर बाहर जाना थोड़ा डरावना होता था.
उन्होंने कहा, “वहां परिवार के लोग, दोस्त या यहां तक कि कोई पुराना पार्टनर भी मिल सकता था. इसकी वजह यह थी कि शराब पीने या किसी शानदार जगह पर खाना खाने के लिए ट्रिंकास, समप्लेस एल्स और मोकोम्बो जैसी जगहों पर यानी पार्क स्ट्रीट पर ही जाना पड़ता था.”

अब शहर की रिहायशी गलियां और पुराने मोहल्ले डेट पर जाने के नए ठिकाने बन गए हैं.
बृष्टि ने कहा, “ये छोटी-छोटी जगहें कोलकाता के लोगों को ज्यादा निजी माहौल में शराब पीने का मौका दे रही हैं. साथ ही, यहां किसी जान-पहचान वाले से टकराए बिना डेट पर जाना भी आसान हो गया है.”
फिर भी, पार्क स्ट्रीट के पुराने बार और रेस्तरां का आकर्षण ऐसा है, जिसकी बराबरी नए बार आसानी से नहीं कर सकते.
दत्ता के मुताबिक, कोलकाता में बार जाने का रिश्ता पारंपरिक रूप से मुंबई या दिल्ली की तरह सिर्फ “नाइटलाइफ” से नहीं रहा है. यहां दोस्तों के साथ बैठकर बातचीत करना, जानी-पहचानी जगहों पर जाना, संगीत सुनना और अपनापन महसूस करना ज्यादा अहम रहा है. कोलकाता में दत्ता ने पहली बार करीब साल 2000 में ट्रिंकास में ड्रिंक की थी.
उन्होंने कहा, “मुझे आज भी याद है कि वह जगह कितनी सादगी भरी थी. वहां का साधारण इंटीरियर, लोगों की बातचीत की जानी-पहचानी आवाजें, संगीत और पार्क स्ट्रीट का वह खास आकर्षण. वहां कुछ भी दिखावटी नहीं था और शायद यही उसकी सबसे खास बात थी. वह जगह सहज, स्वागत करने वाली और पूरी तरह कोलकाता जैसी लगती थी.”
घोष अपने ‘बॉन्ड वॉक्ड इनटू योकोचो’ नाम के ड्रिंक का आनंद लेते हुए इस बात से सहमत नहीं थे कि नए बार पुरानी जगहों की जगह ले रहे हैं.
उन्होंने कहा, “कोलकाता कभी ट्रिंकास या द ब्रॉडवे से अपना रिश्ता नहीं तोड़ेगा. हम एक प्रेमी को छोड़कर दूसरे के पास नहीं जा रहे हैं. इसे डबल-डेटिंग कहते हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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